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FEO कानून के तहत इकबाल मिर्ची पर ED का शिकंजा और कसा, अतिरिक्त संपत्तियां अटैच करने को कोर्ट की मिली मंजूरी

एजेंसी का मानना है कि ये संपत्तियां अवैध कमाई से जुड़ी हैं। कोर्ट की मंजूरी के बाद ED की कार्रवाई और तेज होगी और मिर्ची से जुड़े आर्थिक मामलों में शिकंजा और कसा जाएगा।

इकबाल मिर्ची की फाइल फोटो- India TV Hindi
Image Source : REPORTER INPUT इकबाल मिर्ची की फाइल फोटो

प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत मुंबई की एक विशेष अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को मृतक अंडरवर्ल्ड डॉन  इकबाल मिर्ची और उसके परिवार से जुड़ी अतिरिक्त संपत्तियों को फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स (FEO) एक्ट, 2018 के तहत अटैच करने की अनुमति दे दी। बुधवार को पारित आदेश में अदालत ने ED को FEO एक्ट की धारा 5(1) के तहत एग्ज़िबिट ‘C’ में वर्णित संपत्तियों को अटैच करने की अनुमति दी। साथ ही, चल रही जांच के दौरान पहचानी गई अन्य संपत्तियों को शामिल करने के लिए धारा 13 के तहत पूरक आवेदन दाखिल करने की भी इजाजत दी।

दुबई में स्थित विदेशी संपत्तियां भी शामिल 

यह आवेदन ED के मुंबई जोनल ऑफिस-I द्वारा दायर किया गया था, जिसमें कहा गया कि ये संपत्तियां आगे की जांच के दौरान सामने आईं और पहले से ही PMLA के तहत चल रही अटैचमेंट कार्यवाही का हिस्सा हैं। इन संपत्तियों में वर्ली, मुंबई स्थित करीब 4,970.41 वर्ग मीटर में फैले तीन प्रमुख भूखंड,राबिया मेंशन, मरियम लॉज शामिल हैं। इसके अलावा दुबई में स्थित विदेशी संपत्तियां, जैसे होटल मिडवेस्ट अपार्टमेंट और कॉर्पोरेट बे व DEC टावर्स में 14 रियल एस्टेट यूनिट्स भी शामिल हैं।

अपराध की आय से खरीदी गईं थी संपत्तियां

ईडी के अनुसार, ये संपत्तियां इकबाल मेमन द्वारा अर्जित अपराध की आय से खरीदी गई थीं। इन्हें प्रॉक्सी के जरिये रखा गया था। इसमें सर मोहम्मद यूसुफ ट्रस्ट और परिवार के सदस्य, आसिफ इकबाल मेमन, जुनैद इकबाल मेमन और हाजरा इकबाल मेमन शामिल हैं।

एजेंसी ने अदालत को बताया कि आरोपियों को फरवरी 2021 में इसी अदालत द्वारा पहले ही फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर घोषित किया जा चुका है और उनकी भारत व विदेश स्थित संपत्तियों को जब्त करने के निर्देश दिए गए थे।

 154 करोड़ रुपये से अधिक की रकम विदेश भी भेजी गई

ED के अनुसार, जांच में सामने आया कि इकबाल मिर्ची ने 1986 में अपनी फर्म M/s Rockside Enterprises के जरिए वर्ली की ये संपत्तियां 6.5 लाख रुपये में खरीदी थीं और बाद में ट्रस्ट व डमी किरायेदारों के जरिए वास्तविक स्वामित्व छिपाया गया। आगे यह भी आरोप लगाया गया कि वाधवान बंधुओं द्वारा वर्ली की संपत्तियों के अधिग्रहण के लिए 154 करोड़ रुपये से अधिक की रकम विदेश भेजी गई थी, और दुबई की अन्य संपत्तियां भी इसी वित्तीय लेन-देन का हिस्सा थीं।

पहले भी संपत्तियों को किया जा चुका अटैच

अदालत ने नोट किया कि इन संपत्तियों को पहले ही 2019 और 2020 में PMLA के तहत अस्थायी रूप से अटैच किया जा चुका था, जिसे बाद में एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने पुष्टि भी दी थी। अदालत ने माना कि यह विश्वास करने के मजबूत कारण हैं कि ये संपत्तियां अपराध से अर्जित आय या बेनामी संपत्तियां हैं, जो पहले से घोषित फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स के स्वामित्व में हैं।

आखिकार अदालत ने आवेदन स्वीकार करते हुए कहा कि ED को कानून की उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए FEO एक्ट की धारा 5(1) के तहत इन संपत्तियों को अटैच करने की अनुमति दी जाती है।