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महाराष्ट्र एटीएस ने संदिग्ध शख्स को किया गिरफ्तार, भाजपा और आरएसएस नेताओं पर हमले की थी योजना

कुछ दिनों पहले पुणे पुलिस ने दो आरोपी मोहम्मद इमरान अलियास (23 साल) और मोहम्मद यूनुस को गिरफ्तार किया था। उन्हें पुलिस ने एक बाइक चोरी करने के संदेह में गिरफ्तार किया था।

Maharashtra ATS arrests man suspected of planning attack on BJP and RSS leaders- India TV Hindi
Image Source : FILE PHOTO महाराष्ट्र एटीएस ने संदिग्ध शख्स को किया गिरफ्तार

महाराष्ट्र एटीएस अल-सूफा आतंकी संगठन मामले की जांच कर रही है। इसी जांच के दौरान ATS ने एक और शख्स को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए संदिग्ध आतंकी का नाम अब्दुल कादिर बताया जा रहा है, जिसकी उम्र 40 साल है। सूत्रों ने बताया की अब्दुल को ATS ने महाराष्ट्र के गोंदिया जिले से गिरफ्तार किया है। ATS के एक बड़े अधिकारी ने बताया की कादिर पर आरोप है कि उसने इस मामले में पहले गिरफ्तार दो आरोपियों को रहने और छिपने की जगह दी थी। कादिर को आज लोकल कोर्ट में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने उसे आगे की जांच के लिए ATS की कस्टडी में भेज दिया। 

एक और संदिग्ध गिरफ्तार 

बता दें की कुछ दिनों पहले पुणे पुलिस ने दो आरोपी मोहम्मद इमरान अलियास (23 साल) और मोहम्मद यूनुस को गिरफ्तार किया था। उन्हें पुलिस ने एक बाइक चोरी करने के संदेह में गिरफ्तार किया था। इनकी गिरफ्तारी के बाद पुणे पुलिस को पता चला की ये आरोपी राजस्थान में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा एक मामले में वांटेड हैं। एटीएस सूत्रों ने इंडिया टीवी को जानकारी दी कि गिरफ्तार किए गए आरोपी कई आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की योजना बना रहे थे और वे अल-सूफा से जुड़े हुए थे।

युवाओं को बरगलाने का काम करती थी यह संगठन

गिरफ्तारी के दौरान, एटीएस ने आरोपियों के पास से विस्फोटक, ड्रोन संबंधित उपकरण, लैपटॉप और अरबी भाषा में लिखी गई इंक्रीमिनेटिंग किताबें जब्त की। एटीएस को शक है कि आरोपियों ने मोटरसाइकिल का इस्तेमाल कर आतंकवादी हमला करने की योजना बनाई थी। महाराष्ट्र में अल-सूफा के साजिश की जांच के लिए एटीएस ने अवैध गतिविधियों के रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत एक मामला दर्ज किया है। NIA सूत्रों ने बताया की इस आतंकी साजिश में भाजपा नेता और आरएसएस सदस्यों को टारगेट किया जाना था । जांम के बाद यह साबित हुआ कि इसमें कराची में स्थित कुछ इंडियन मुजाहिदीन के लीडर भी शामिल हैं, जिसके कारण केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मामले को एनआईए को सौंप दिया था। जांच में यह भी पता चला है कि यह संगठन राजस्थान के युवाओं को रेडिकलाइज करने के लिए इंटरनेट का उपयोग कर रही थी।