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महाराष्ट्र: सांसद-विधायक आएं तो खड़े होना जरूरी, ये नियम नहीं माना तो सरकारी कर्मचारियों पर होगा एक्शन

महाराष्ट्र सरकार की तरफ से सरकारी कर्मचारियों के लिए जारी की गई गाइडलाइन चर्चा का विषय बनी हुई है। इसमें कहा गया है कि सांसद-विधायक दफ्तर आएं तो उनके सम्मान में सरकारी कर्मचारियों का खड़े होना जरूरी है। इन दिशा-निर्देशों को विस्तार से पढ़ें।

maharashtra govt guidelines- India TV Hindi Image Source : PTI सांसद-विधायक से शिष्टाचार के नए दिशा-निर्देश जारी।

मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक नई गाइडलाइन जारी की है, जिसमें सांसदों (MPs) और विधायकों (MLAs) के प्रति व्यवहार के लिए विस्तृत प्रोटोकॉल तय किया गया है। सरकार ने कहा है कि जनप्रतिनिधियों के साथ बातचीत या मुलाकात के दौरान सम्मानजनक रवैया बनाए रखना अनिवार्य होगा। इस खबर में विस्तार से जानें कि नया आदेश क्या है, पत्राचार पर निगरानी और जवाब देने की समय सीमा क्या है, इस आदेश के उल्लंघन पर क्या कार्रवाई की जाएगी।

क्या है नया आदेश?

गुरुवार को जारी इस सरकारी प्रस्ताव में अधिकारियों से कहा गया है कि जब कोई सांसद या विधायक उनके कार्यालय आए या उनसे मिलने पहुंचे, तो अधिकारी अपनी सीट से खड़े होकर उनका अभिवादन करें। सरकार ने इसे “आचरण और शिष्टाचार का न्यूनतम मानक” बताया है। गाइडलाइन में यह भी कहा गया है कि जनप्रतिनिधियों से फोन पर बातचीत करते समय विनम्र भाषा का उपयोग करें, और किसी भी तरह की असभ्यता या अनादरपूर्ण व्यवहार से बचें।

पत्राचार पर निगरानी और जवाब देने की समय सीमा

सरकार ने विभागों को निर्देश दिया है कि सांसद और विधायक की तरफ से भेजे गए पत्रों का एक अलग रजिस्टर डिजिटल या फिजिकल बनाया जाए। इन पत्रों का जवाब दो महीने के भीतर देना अनिवार्य होगा। यदि समय सीमा में जवाब देना संभव ना हो, तो विभाग प्रमुख, जनप्रतिनिधि को देरी का कारण लिखित में बताएंगे।

मुलाकात के लिए तय समय

गाइडलाइन में अधिकारियों से कहा गया है कि वे हर महीने पहले और तीसरे गुरुवार को दो घंटे का समय केवल सांसदों और विधायकों से मुलाकात के लिए निर्धारित करें। जरूरी मुद्दों पर जनप्रतिनिधि कार्यालय समय में कभी भी अधिकारियों से मिल सकते हैं।

सरकारी कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी

सरकार प्रस्वाव के अनुसार, सरकारी और अर्ध-सरकारी कार्यक्रमों जैसे उद्घाटन या भूमि पूजन में संबंधित क्षेत्र के सांसद और विधायक को आमंत्रित करना आवश्यक है। उनके नाम, पद और प्रोटोकॉल के अनुसार सही स्थान पर बैठने की व्यवस्था की जानी चाहिए।

जानकारी मुहैया कराने के नियम

गाइडलाइन में कहा गया है कि जनहित से संबंधित सूचनाएं जहां RTI लागू होती हो वह जनप्रतिनिधियों को मुफ्त में उपलब्ध कराई जाएं। इसके अलावा विभागों को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक जानकारी समय-समय पर अपडेट रखने के लिए भी कहा गया है।

ट्रेनिंग अनिवार्य

राज्य सरकार ने यह भी निर्देश दिए कि सभी प्रशिक्षण संस्थान चाहे नए अधिकारी हों या पहले से सेवा में, उन्हें जनप्रतिनिधियों से संवाद, शिष्टाचार और प्रोटोकॉल से संबंधित मॉड्यूल्स की ट्रेनिंग दी जाए।

उल्लंघन पर होगी कार्रवाई

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई अधिकारी इन निर्देशों का पालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ महाराष्ट्र सिविल सर्विस रूल्स के तहत कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, अनदेखी या देरी को “सेवा में ढिलाई” की श्रेणी में मानते हुए अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएंगे।

सरकार ने क्यों जारी किया यह आदेश?

हाल के वर्षों में कई बार सांसदों और विधायकों ने शिकायत की है कि अधिकारी उनसे मुलाकात में देरी करते हैं या उनके साथ असम्मानजनक व्यवहार किया जाता है। सरकार का कहना है कि यह गाइडलाइन बेहतर समन्वय, प्रशासनिक दक्षता और जनसेवा में जवाबदेही बढ़ाने के लिए जारी की गई है।

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