मुंबई से उद्धव ठाकरे की शिवसेना के टिकट पर चुनाव जीतने वाली सरिता म्हस्के लगभग एक दिन गायब रहने के बाद वापस लौट आई हैं। उन्होंने यह भी साफ किया है कि वह अपनी पार्टी के साथ हैं और शिंदे गुट में नहीं शामिल हो रही हैं। सारिका ने बताया कि वह तुलजापुर मंदिर में दर्शन के लिए गई थी इसलिए उन्हें देरी हो गई।
शिवसेना यूबीटी की नगरसेविका सरिता म्हस्के ने बताया कि वह कहीं गायब नहीं हुई थीं। न ही वह किसी भी विपक्षी दल के संपर्क में थी। उन्होंने मन्नत मानी थी कि, अगर चुनाव जीत गई तो तुलजापुर मंदिर में दर्शन करने जाएंगी। उसी के लिए वह गई थीं। मैंने यह बात मिलिंद नार्वेकर को बताई थी। तब तक अफवाह फैलाने लगी थी। इसलिए मुझे फोन बंद करने के लिए पार्टी की तरफ से कहा गया था। इसलिए फोन बंद था।
बीजेपी उम्मीदवार को दी थी मात
सरिता म्हस्के ने शिवसेना के टिकट पर वार्ड नं. 157 से चुनाव जीता था और नगर सेविका बनी थीं। उन्होंने बीजेपी की आशा तायड़े को हराया था। डॉ. सरिता म्हस्के सेना भवन में कॉर्पोरेटर की मीटिंग से गायब थीं। इसके बाद उनके शिंदे गुट में शामिल होने के कयास लगाए गए। हालांकि, बाद में सारे कयास गलत साबित हुए।
ठाकरे बंधुओं के पास 65 नगर सेवक
मुंबई में ठाकरे बंधुओं ने गठबंधन में चुनाव लड़ा था और उनकी पार्टी के 65 उम्मीदवारों की जीत मिली है। बीजेपी और शिवसेना शिंदे गुट के महायुति गठबंधन के पास बहुमत है। हालांकि, मेयर के पद को लेकर दोनों पार्टियों में अंदरूनी खींचतान जारी है। इसी कड़ी में दोनों पार्टियां अन्य दलों के नगर सेवकों का समर्थन हासिल करने की कोशिश भी कर रही हैं। हालांकि, मुंबई में महायुति का मेयर बनना तय है।
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