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Earthquake: भारत के इस राज्य में देर रात दो बार कांपी धरती, जानें रिक्टर स्केल पर कितनी रही तीव्रता

मणिपुर में बुधवार तड़के भूकंप के दो झटके महसूस किए गए। भूकंप का केंद्र मणिपुर के चुराचांदपुर में था। पहले भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.2 मापी गई।

प्रतीकात्मक फोटो- India TV Hindi
Image Source : PIXABAY.COM प्रतीकात्मक फोटो

मणिपुर में बुधवार तड़के दो बार भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, पहले भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.2 मापी गई और इसका केंद्र मणिपुर के चुराचांदपुर में था। भूकंप आज सुबह 01:54:29 बजे पर आया। भूकंप का केंद्र 24.46 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 93.70 डिग्री पूर्वी देशांतर पर, 40 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। इससे पहले मणिपुर में तड़के 2:26:10 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 2.5 मापी गई।

गुजरात के कच्छ में 3.4 तीव्रता का भूकंप

इससे पहले भारत के गुजरात राज्य के कच्छ जिले में 14 मई की शाम 3.4 तीव्रता का भूकंप आया था। हालांकि, इस भूकंप के कारण किसी के हताहत होने या संपत्ति को नुकसान नहीं हुआ। भूकंपीय अनुसंधान संस्थान (ISR), गांधीनगर द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, भूकंप शाम 6:55 बजे दर्ज किया गया था, जिसका केंद्र जिले के भचाऊ से 12 किलोमीटर उत्तर-उत्तरपूर्व में स्थित था। जिला आपदा प्रतिक्रिया अधिकारियों ने तुरंत स्थिति का जायजा लिया और जान-माल के किसी नुकसान की पुष्टि नहीं की।

बता दें कि कच्छ जिला "बहुत उच्च जोखिम" वाले भूकंपीय क्षेत्र में स्थित है और यहां अक्सर कम तीव्रता के भूकंप आते रहते हैं। यह भौगोलिक स्थिति ही इस क्षेत्र को भूकंप के प्रति संवेदनशील बनाती है। कच्छ ने 2001 में एक विनाशकारी भूकंप का सामना किया था, जिसने जिले में भारी तबाही मचाई थी। उस त्रासदी में लगभग 13,800 लोगों की जान चली गई थी और 1.67 लाख से अधिक लोग घायल हुए थे। उस भयावह अनुभव के बाद से स्थानीय प्रशासन और निवासियों ने भूकंप सुरक्षा और तैयारी के प्रति अधिक सतर्कता बरती है।

भूकंप आने के क्या हैं कारण?

Earthquake धरती की सतह पर अचानक होने वाला एक कंपन है, जो धरती के अंदर स्थित टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल के कारण से होता है। पृथ्वी की ऊपरी परत क्रस्ट कई बड़े-बड़े टुकड़ों में बंटी हुई है, जिन्हें टेक्टोनिक प्लेट्स कहते हैं। ये प्लेट्स लगातार धीरे-धीरे हिलती रहती हैं। जब ये प्लेट्स आपस में टकराती हैं और फिसलती हैं या एक-दूसरे के नीचे-ऊपर जाती हैं, तो इनके किनारों पर बहुत ज्यादा स्ट्रेस जमा हो जाता है। ए वक्त ऐसा आता है जब यह तनाव सहन नहीं हो पाता और वह अचानक एक झटके के रूप में बाहर निकलता है। इसी झटके से धरती हिलती है और भूकंप के झटके महसूस किए जाते हैं।

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