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Hindi News पंजाब पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की, जानें क्यों अहम है ये मीटिंग

पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की, जानें क्यों अहम है ये मीटिंग

चंडीगढ़ में मेयर चुनाव में धांधली को लेकर आम आदमी पार्टी के विरोध प्रदर्शन के बीच पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से दिल्ली में मुलाकात की। पुरोहित केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक भी हैं।

राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की- India TV Hindi Image Source : PTI राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की

पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से दिल्ली में मुलाकात की। पुरोहित केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के प्रशासक भी हैं। गृह मंत्री के कार्यालय ने बैठक के बारे में जानकारी दी है। यह बैठक चंडीगढ़ मेयर चुनाव में भाजपा की जीत के कुछ दिनों बाद हुई है। इसमें तीनों पदों पर बीजेपी का कब्जा बरकरार रखा गया है, जोकि कांग्रेस-आप गठबंधन के लिए बड़ा एक झटका है। आम आदमी पार्टी ने पीठासीन अधिकारी पर मतपत्रों के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया था।

आप को नहीं मिली थी राहत

 

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट की एक खंडपीठ ने आम आदमी पार्टी (आप) को बुधवार को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया, जिसने आरोप लगाया था कि मतपत्रों से छेड़छाड़ की गई थी। पार्टी ने अदालत के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की देखरेख में दोबारा चुनाव कराने की मांग की थी।

सुप्रीम कोर्ट याचिका पर विचार करने पर सहमत

वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आप पार्षद के उस अनुरोध पर विचार करने के लिए सहमत हो गया जिसमें हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग की गई थी। हाई कोर्ट ने चंडीगढ़ में नए मेयर चुनाव की मांग करने वाली पार्टी को कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था।

सीएम भगवंत मान को लिखा था पत्र

बता दें कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित के कई मामलों में मतभेद रहे हैं। पंजाब की आप सरकार लगातार राज्यपाल पर निशाना साधती रही है। जनवरी महीने में राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पूछा था कि पारिवारिक विवाद मामले में दोषी ठहराए गए राज्य मंत्री अमन अरोड़ा को अभी तक मंत्री पद से क्यों नहीं हटाया गया और विधानसभा सदस्यता क्यों नहीं खत्म की गई। वहीं, बीजेपी और अकाली दल ने एक्शन की मांग की थी।