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Hindi News धर्म त्योहार Ganesh Chaturthi 2025 Puja Vidhi, Sthapana Muhurat Live Update: गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त शुरू, जानिए गणपति जी को बिठाने की विधि मंत्र सहित

Ganesh Chaturthi 2025 Puja Vidhi, Sthapana Muhurat Live Update: गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त शुरू, जानिए गणपति जी को बिठाने की विधि मंत्र सहित

Ganesh Chaturthi 2025: गणेश चतुर्थी के पावन मौके पर गणेश जी की पूजा के साथ ही उनकी प्रतिमा को भी घर में स्थापित करने का विधान है। ऐसे में आज हम आपको बताने वाले हैं कि गणेश चतुर्थी पर मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।

Ganesh Chaturthi 2025- India TV Hindi Image Source : FREEPIK गणेश चतुर्थी 2025

Ganesh Chaturthi 2025: गणेश चतुर्थी का पावन त्योहार 27 अगस्त  2025 को है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला यह त्योहार हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा के साथ ही गणपति की स्थापना भी लोग घरों में करते हैं। माना जाता है कि भगवान गणेश को घर में स्थापित करने से सुख-समृद्धि घर में आती है। आइए ऐसे में जान लेते हैं कि गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त कब से कब तक रहेगा। 

गणेश स्थापना शुभ मुहूर्त शहर अनुसार

गणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त 

  • अमृत काल- 07:33 से सुबह 09:09 
  • शुभ चौघड़िया- सुबह 10:46 AM से दोपहर 12:22 PM तक
  • गणेश जी की मूर्ति को घर में स्थापित करने का सबसे शुभ मुहूर्त- 11:05 बजे से शुरू होकर दोपहर 1:40 तक

हालांकि 27 अगस्त को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट से राहुकाल शुरू हो जाएगा, इसलिए भक्तों को इससे पहले ही घर में गणेश जी की मूर्ति को स्थापित कर देना चाहिए। 

गणेश चतुर्थी पर पूजा की विधि 

गणेश चतुर्थी के दिन आपको सुबह जल्दी उठकर स्नान-ध्यान करना चाहिए। इसके बाद घर के पूजा स्थल को भी स्वच्छ करना चाहिए और वहां गंगाजल का छिड़काव करना चाहिए। जिस स्थान पर गणेश जी को स्थापित करने वाले हैं वहां भी साफ-सफाई अवश्य करें। शुभ मुहूर्त में गणेश जी की मूर्ति को स्थापित करें। मूर्ति को स्थापित करने के लिए आपको चौकी बिछानी चाहिए और उस पर लाल, पीला या हरा कपड़ा बिछाना चाहिए। इसके बाद गणेश जी की मूर्ति को स्थापित करें और उन्हें फूल, दुर्वा, मोदक आदि अर्पित करें। इसके बाद दीपक जलाकर गणेश जी के मंत्रों का जप आपको करना चाहिए। इसके बाद गणेश चतुर्थी की व्रत कथा का पाठ आपको सपरिवार करना चाहिए और अंत में आरती करनी चाहिए। इसके बाद प्रसाद का वितरण करना चाहिए। इस दिन विधि-विधान से गणेश जी की पूजा करने से और घर में गणपति जी की मूर्ति को स्थापित करने से जीवन की विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं। 

Live updates : Ganesh Chaturthi Puja Vidhi And Ganesh Sthapna Subh Muhurat

  • 9:35 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्थी तक घर की इन दिशाओं में दीपक जलाना बेहद शुभ

    10 दिवसीय गणेशोत्सव के दौरान आपको घर के कुछ विशेष कोनों में दीपक जलाना चाहिए। सबसे पहले 10 दिन तक घर के मुख्य द्वार पर दीपक अवश्य जलाएं इसके साथ ही घर के उत्तर-पूर्व कोने और पूजा घर में भी आपको दीपक अवश्य जलाना चाहिए। इसके साथ ही रसोई घर में भी दीपक अवश्य जलाएं। 

  • 7:00 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    गणेश चतुर्थी पर शिव चालीसा पाठ से मिलेंगे शुभ फल

    दोहा ॥
    श्री गणेश गिरिजा सुवन , मंगल मूल सुजान।
    कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥

    ॥ चौपाई ॥
    जय गिरिजा पति दीन दयाला ।
    सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥भाल चन्द्रमा सोहत नीके ।
    कानन कुण्डल नागफनी के ॥

    अंग गौर शिर गंग बहाये ।
    मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥

    वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे ।
    छवि को देखि नाग मन मोहे ॥

    मैना मातु की हवे दुलारी ।
    बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥

    कर त्रिशूल सोहत छवि भारी ।
    करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥

    नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे ।
    सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥

    कार्तिक श्याम और गणराऊ ।
    या छवि को कहि जात न काऊ ॥

    देवन जबहीं जाय पुकारा ।
    तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥

    किया उपद्रव तारक भारी ।
    देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥

    तुरत षडानन आप पठायउ ।
    लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ॥

    आप जलंधर असुर संहारा ।
    सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥

    त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई ।
    सबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥

    किया तपहिं भागीरथ भारी ।
    पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥

    दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं ।
    सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥

    वेद नाम महिमा तव गाई।
    अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥

    प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला ।
    जरत सुरासुर भए विहाला ॥

    कीन्ही दया तहं करी सहाई ।
    नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥

    पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा ।
    जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥

    सहस कमल में हो रहे धारी ।
    कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥

    एक कमल प्रभु राखेउ जोई ।
    कमल नयन पूजन चहं सोई ॥

    कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर ।
    भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥

    जय जय जय अनन्त अविनाशी ।
    करत कृपा सब के घटवासी ॥

    दुष्ट सकल नित मोहि सतावै ।
    भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥

    त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो ।
    येहि अवसर मोहि आन उबारो ॥

    लै त्रिशूल शत्रुन को मारो ।
    संकट से मोहि आन उबारो ॥

    मात-पिता भ्राता सब होई ।
    संकट में पूछत नहिं कोई ॥

    स्वामी एक है आस तुम्हारी ।
    आय हरहु मम संकट भारी ॥

    धन निर्धन को देत सदा हीं ।
    जो कोई जांचे सो फल पाहीं ॥

    अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी ।
    क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥

    शंकर हो संकट के नाशन ।
    मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥

    योगी यति मुनि ध्यान लगावैं ।
    शारद नारद शीश नवावैं ॥

    नमो नमो जय नमः शिवाय ।
    सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥

    जो यह पाठ करे मन लाई ।
    ता पर होत है शम्भु सहाई ॥

    ॠनियां जो कोई हो अधिकारी ।
    पाठ करे सो पावन हारी ॥

    पुत्र हीन कर इच्छा जोई ।
    निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥

    पण्डित त्रयोदशी को लावे ।
    ध्यान पूर्वक होम करावे ॥

    त्रयोदशी व्रत करै हमेशा ।
    ताके तन नहीं रहै कलेशा ॥

    धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे ।
    शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥

    जन्म जन्म के पाप नसावे ।
    अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥

    कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी ।
    जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥

    ॥ दोहा ॥
    नित नेम कर प्रातः ही, पाठ करौ चालीसा।
    तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
    मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान ।
    अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण ॥

  • 5:51 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    गणेशोत्सव 10 दिनों तक क्यों मनाया जाता है?

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वेद व्यास जी के कहने पर गणेश जी ने बिना रुके 10 दिनों तक महाभारत की कथा लिखी थी। 10 दिनों में गणेश जी के शरीर पर धूल-मिट्टी जम गई थी जिसे साफ करने के लिए दसवें दिन उन्होंने सरस्वती नदी में स्नान किया था। इसीलिए आज भी 10 दिनों तक लोग भगवान गणेश को घर में स्थापित करते हैं और 10 वें दिन उनका विसर्जन किया जाता है। 

  • 5:02 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    भगवान गणेश के कितने अवतार हैं?

    भगवान गणेश के 64 अवतारों का वर्णन अवतार पुराण में किया गया है। इसमें अघोर गणपति, उग्र गणपति, गणेश जी के तांत्रिक स्वरूप आदि की चर्चा मिलती है। 

  • 4:39 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    गणेश चतुर्थी का व्रत का पारण क्या खाकर करना चाहिए?

    गणेश चतुर्थी के व्रत का पारण आपको मोदक, फल, लड्डू और सात्विक भोजन खाकर करना चाहिए। आप व्रत खीर, साबूदाना खाकर भी तोड़ सकते हैं। सबसे शुभ यह होता है कि जो प्रसाद आप भगवान गणेश को चढ़ाएं उसे खाकर ही व्रत का पारण करें। 

  • 3:33 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्थी तक करें संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ, मिलेंगे शुभ फल

     संकटनाशन गणेश स्तोत्र

    प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम् ।।
    भक्तावासं स्मरेन्नित्यमायु:कामार्थसिद्धये ।।१ ।।
    प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम् ।।
    तृतीयं कृष्णपिङ्गगाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम् ।।२।।
    लम्बोदरं पञ्चमं च षष्ठं विकटमेव च ।।
    सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्णं तथाष्टमम् ।।३ ।।
    नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम् ।
    एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम् ।।४ ।।
    द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्यं य: पठेन्नर: ।
    न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं प्रभो ।।५ ।।
    विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् ।
    पुत्रार्थी लभते पुत्रान् मोक्षार्थी लभते गतिम् ।।६ ।।
    जपेत् गणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासै: फलं लभेत् ।
    संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशय: ।।७ ।।
    अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वा य: समर्पयेत् ।
    तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादत: ।।८ ।।
    इति श्री नारदपुराणे संकटविनाशनं श्रीगणपतिस्तोत्रं संपूर्णम्।

  • 3:15 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    गणेश चतुर्थी पर गलती से चांद देख लिया तो करें इस मंत्र का जप

    गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन करना शुभ नहीं माना जाता। ऐसा होने पर झूठा आरोप या कलंक आप पर लग सकता है। कलंक से बचने के लिए आपको नीचे दिए गए मंत्र का जप करना चाहिए। 

    मंत्र- सिंहः प्रसेन मण्वधीत्सिंहो जाम्बवता हतः। सुकुमार मा रोदीस्तव ह्मेषः स्यमन्तकः।।

  • 2:26 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय

    गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन करना अच्छा नहीं माना जाता। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन होने से झूठा आरोप लग सकता है। आपको बता दें कि गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रोदय सुबह 9 बजकर 28 मिनट पर होगा और चंद्रास्त 8 बजकर 57 मिनट पर होगा। 

  • 2:06 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    गणेश जी के भजन

  • 1:46 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    गणेश चतुर्थी पर अगर गलती से चांद दिख जाए तो क्या करें (Ganesh Chaturthi Par Chand Dikh Jaye To Kya Kare)

    गणेश चतुर्थी पर अगर गलती से चांद दिख जाए तो मिथ्या दोष से बचाव के लिये निम्नलिखित मन्त्र का जाप करना चाहिये -

    सिंहः प्रसेनमवधीत्सिंहो जाम्बवता हतः।

    सुकुमारक मारोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः॥

  • 1:34 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    गणेश जी को 10 दिन तक लगाएं इन अलग-अलग चीजों का भोग

    • पहले दिन- लड्डू और केले
    • दूसरे दिन-  किशमिश, बादाम, छुहारा
    • तीसरे दिन-  सूजी का हलवा 
    • चौथे दिन- मोदक का भोग
    • पांचवें दिन- खीर का भोग
    • छठे दिन- पंजीरी का भोग 
    • सातवें दिन- नारियल का भोग
    • आठवें दिन- आटे के हलवे का भोग 
    • नौवें दिन- सब्जी-पूड़ी का भोग
    • दसवें दिन- लड्डू, मोदक, खीर, पंजीरी, नारियल का भोग

     

  • 1:10 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    भगवान गणेश को गलती से भी अर्पित न करें ये चीजें

    भगवान गणेश पर कभी भी आपको तुलसी अर्पित नहीं करनी चाहिए। इसके साथ ही केतकी का फूल भी गणेश जी को अर्पित करना शुभ नहीं माना जाता है। अगर गलती से आप गणेश पूजन में इन चीजों को अर्पित कर देते हैं तो इसके दुष्परिणाम आपको भुगतने पड़ सकते हैं। 

  • 12:33 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Ganesh Ji 108 Names In Sanskrit: गणेश जी के 108 नाम

    • गजानन- ॐ गजाननाय नमः ।
    • गणाध्यक्ष- ॐ गणाध्यक्षाय नमः ।
    • विघ्नराज- ॐ विघ्नराजाय नमः ।
    • विनायक- ॐ विनायकाय नमः ।
    • द्वैमातुर- ॐ द्वैमातुराय नमः ।
    • द्विमुख- ॐ द्विमुखाय नमः ।
    • प्रमुख- ॐ प्रमुखाय नमः ।
    • सुमुख-ॐ सुमुखाय नमः ।
    • कृति- ॐ कृतिने नमः ।
    • सुप्रदीप- ॐ सुप्रदीपाय नमः
    • सुखनिधी- ॐ सुखनिधये नमः ।
    • सुराध्यक्ष- ॐ सुराध्यक्षाय नमः ।
    • सुरारिघ्न- ॐ सुरारिघ्नाय नमः ।
    • महागणपति- ॐ महागणपतये नमः ।
    • मान्या- ॐ मान्याय नमः ।
    • महाकाल- ॐ महाकालाय नमः ।
    • महाबला- ॐ महाबलाय नमः ।
    • हेरम्ब- ॐ हेरम्बाय नमः ।
    • लम्बजठर- ॐ लम्बजठरायै नमः ।
    • ह्रस्वग्रीव- ॐ ह्रस्व ग्रीवाय नमः
    • महोदरा- ॐ महोदराय नमः ।
    • मदोत्कट- ॐ मदोत्कटाय नमः ।
    • महावीर- ॐ महावीराय नमः ।
    • मन्त्रिणे- ॐ मन्त्रिणे नमः ।
    • मङ्गल स्वरा- ॐ मङ्गल स्वराय नमः ।
    • प्रमधा- ॐ प्रमधाय नमः ।
    • प्रथम- ॐ प्रथमाय नमः ।
    • प्रज्ञा- ॐ प्राज्ञाय नमः ।
    • विघ्नकर्ता- ॐ विघ्नकर्त्रे नमः ।
    • विघ्नहर्ता- ॐ विघ्नहर्त्रे नमः
    • विश्वनेत्र- ॐ विश्वनेत्रे नमः ।
    • विराट्पति- ॐ विराट्पतये नमः ।
    • श्रीपति- ॐ श्रीपतये नमः ।
    • वाक्पति- ॐ वाक्पतये नमः ।
    • शृङ्गारिण- ॐ शृङ्गारिणे नमः ।
    • अश्रितवत्सल- ॐ अश्रितवत्सलाय नमः ।
    • शिवप्रिय- ॐ शिवप्रियाय नमः ।
    • शीघ्रकारिण- ॐ शीघ्रकारिणे नमः ।
    • शाश्वत - ॐ शाश्वताय नमः ।
    • बल- ॐ बल नमः
    • बलोत्थिताय- ॐ बलोत्थिताय नमः ।
    • भवात्मजाय- ॐ भवात्मजाय नमः ।
    • पुराण पुरुष- ॐ पुराण पुरुषाय नमः ।
    • पूष्णे- ॐ पूष्णे नमः ।
    • पुष्करोत्षिप्त वारिणे- ॐ पुष्करोत्षिप्त वारिणे नमः ।
    • अग्रगण्याय- ॐ अग्रगण्याय नमः ।
    • अग्रपूज्याय- ॐ अग्रपूज्याय नमः ।
    • अग्रगामिने- ॐ अग्रगामिने नमः ।
    • मन्त्रकृते- ॐ मन्त्रकृते नमः ।
    • चामीकरप्रभाय- ॐ चामीकरप्रभाय नमः
    • सर्वाय- ॐ सर्वाय नमः ।
    • सर्वोपास्याय- ॐ सर्वोपास्याय नमः ।
    • सर्व कर्त्रे- ॐ सर्व कर्त्रे नमः ।
    • सर्वनेत्रे- ॐ सर्वनेत्रे नमः ।
    • सर्वसिद्धिप्रदाय- ॐ सर्वसिद्धिप्रदाय नमः ।
    • सिद्धये- ॐ सिद्धये नमः ।
    • पञ्चहस्ताय- ॐ पञ्चहस्ताय नमः ।
    • पार्वतीनन्दनाय- ॐ पार्वतीनन्दनाय नमः ।
    • प्रभवे- ॐ प्रभवे नमः ।
    • कुमारगुरवे- ॐ कुमारगुरवे नमः
    • अक्षोभ्याय- ॐ अक्षोभ्याय नमः ।
    • कुञ्जरासुर भञ्जनाय- ॐ कुञ्जरासुर भञ्जनाय नमः ।
    • प्रमोदाय- ॐ प्रमोदाय नमः ।
    • मोदकप्रियाय- ॐ मोदकप्रियाय नमः ।
    • कान्तिमते- ॐ कान्तिमते नमः ।
    • धृतिमते- ॐ धृतिमते नमः ।
    • कामिने- ॐ कामिने नमः ।
    • कपित्थपनसप्रियाय- ॐ कपित्थपनसप्रियाय नमः ।
    • ब्रह्मचारिणे- ॐ ब्रह्मचारिणे नमः ।
    • ब्रह्मरूपिणे- ॐ ब्रह्मरूपिणे नमः
    • ब्रह्मविद्यादि दानभुवे- ॐ ब्रह्मविद्यादि दानभुवे नमः ।
    • जिष्णवे- ॐ जिष्णवे नमः ।
    • विष्णुप्रियाय- ॐ विष्णुप्रियाय नमः ।
    • भक्त जीविताय- ॐ भक्त जीविताय नमः ।
    • जितमन्मधाय- ॐ जितमन्मधाय नमः ।
    • ऐश्वर्यकारणाय- ॐ ऐश्वर्यकारणाय नमः ।
    • ज्यायसे- ॐ ज्यायसे नमः ।
    • यक्षकिन्नेर सेविताय- ॐ यक्षकिन्नेर सेविताय नमः।
    • गङ्गा सुताय- ॐ गङ्गा सुताय नमः ।
    • गणाधीशाय- ॐ गणाधीशाय नमः
    • गम्भीर निनदाय- ॐ गम्भीर निनदाय नमः ।
    • वटवे- ॐ वटवे नमः ।
    • अभीष्टवरदाय- ॐ अभीष्टवरदाय नमः ।
    • ज्योतिषे- ॐ ज्योतिषे नमः ।
    • भक्तनिधये- ॐ भक्तनिधये नमः ।
    • भावगम्याय- ॐ भावगम्याय नमः ।
    • मङ्गलप्रदाय- ॐ मङ्गलप्रदाय नमः ।
    • अव्यक्ताय- ॐ अव्यक्ताय नमः ।
    • अप्राकृत पराक्रमाय- ॐ अप्राकृत पराक्रमाय नमः ।
    • सत्यधर्मिणे- ॐ सत्यधर्मिणे नमः
    • सखये- ॐ सखये नमः ।
    • सरसाम्बुनिधये- ॐ सरसाम्बुनिधये नमः ।
    • महेशाय- ॐ महेशाय नमः ।
    • दिव्याङ्गाय- ॐ दिव्याङ्गाय नमः ।
    • मणिकिङ्किणी मेखालाय- ॐ मणिकिङ्किणी मेखालाय नमः ।
    • समस्त देवता मूर्तये- ॐ समस्त देवता मूर्तये नमः ।
    • सहिष्णवे- ॐ सहिष्णवे नमः ।
    • सततोत्थिताय- ॐ सततोत्थिताय नमः ।
    • विघातकारिणे- ॐ विघातकारिणे नमः ।
    • विश्वग्दृशे- ॐ विश्वग्दृशे नमः
    • विश्वरक्षाकृते- ॐ विश्वरक्षाकृते नमः ।
    • कल्याणगुरवे- ॐ कल्याणगुरवे नमः ।
    • उन्मत्तवेषाय- ॐ उन्मत्तवेषाय नमः ।
    • अपराजिते- ॐ अपराजिते नमः ।
    • समस्त जगदाधाराय- ॐ समस्त जगदाधाराय नमः ।
    • सर्वैश्वर्यप्रदाय- ॐ सर्वैश्वर्यप्रदाय नमः ।
    • आक्रान्त चिद चित्प्रभवे- ॐ आक्रान्त चिद चित्प्रभवे नमः ।
    • श्री विघ्नेश्वराय- ॐ श्री विघ्नेश्वराय नमः
  • 12:21 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    गणेश चतुर्थी पर गणेश विसर्जन मुहूर्त 2025

    • गणेश चतुर्थी पर गणेश विसर्जन बुधवार, अगस्त 27, 2025 को
    • अपराह्न मुहूर्त (चर, लाभ) - 03:35 पी एम से 06:48 पी एम
    • सायाह्न मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर) - 08:12 पी एम से 12:23 ए एम, अगस्त 28
    • उषाकाल मुहूर्त (लाभ) - 03:10 ए एम से 04:33 ए एम, अगस्त 28
  • 11:56 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    गणेश जी की मूर्ति किस दिशा में स्थापित करें?

    बप्पा की मूर्ति उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके रखें। यह शुभ और सकारात्मक ऊर्जा देने वाला होता है।

  • 11:45 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Ganesh Chaturthi Katha (गणेश चतुर्थी कथा)

     

     

     

    गणेश चतुर्थी की पावन कथा अनुसार, प्राचीन समय की बात है। एक दिन देवी पार्वती ने स्नान करते समय अपने शरीर की मैल से एक बालक की मूर्ति बनाई और उसमें प्राण डाल दिए। पार्वती जी ने उसे आदेश दिया कि जब तक वह स्नान कर रही हैं, तब तक वो किसी को भी अंदर न आने दें। उसी समय अचानक से भगवान शिव वहां पहुंचे। लेकिन बालक ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। यह देख शिव जी को क्रोध आ गया और उन्होंने उस बालक को चेतावनी दी लेकिन इसके बाद भी बालक ने भगवान को अंदर नहीं जाने दिया। तब भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से उसका सिर काट दिया। जब माता पार्वती ने ये दृश्य देखा, तो उन्हें क्रोध आ गया जिसके बाद माता ने संपूर्ण ब्रह्मांड को नष्ट करने की धमकी दे दी। माता पार्वती के क्रोध को शांत करने के लिए भगवान शिव ने देवताओं से कहा कि जो भी जीव उत्तर दिशा की ओर सोया हो उसका सिर लेकर आओ। देवताओं को एक हाथी का बच्चा मिला तो वे उसका सिर लेकर आए और भगवान शिव ने उसे बालक के धड़ से जोड़ दिया जिससे बालक जीवित हो उठा। देवी पार्वती की प्रसन्नता के लिए भगवान शिव ने उस बालक का नाम गणेश रखा और उन्हें आशीर्वाद दिया कि अब से सबसे पहले पूजा गणेश जी की ही होगी। कहते हैं तभी से भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता का स्थान मिला। कहते हैं जिस दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था उस दिन भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी थी इसलिए तभी से इस दिन गणेश चतुर्थी का त्योहार मनाया जाने लगा।

  • 11:35 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    गणेश चतुर्थी पर चांद के दर्शन कब नहीं करते हैं?

    गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन वर्जित समय 09:28 ए एम से 08:57 पी एम तक है।

  • 11:21 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Ganesh Chaturthi Puja Mantra: गणेश चतुर्थी पूजा मंत्र

    वक्रतुण्ड महाकाय

    सूर्यकोटि समप्रभ ।

    निर्विघ्नं कुरु मे देव

    सर्वकार्येषु सर्वदा ॥

  • 11:03 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    गणेश चतुर्थी स्पेशल आरती

  • 10:49 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    गणेश चतुर्थी पर क्या ना करें

    • गणेश जी को तुलसी के पत्ते न चढ़ाएं क्योंकि यह वर्जित माना गया है।
    • पूजा करते समय मोबाइल, टीवी या शोरगुल से बचें।
    • मूर्ति की स्थापना के बाद उसे अकेला न छोड़ें। 
    • काली मिर्च, प्याज, लहसुन या मांसाहार इस दिन भोजन में न लें।
    • मूर्ति को हाथ लगाने से पहले हाथ धोएं या शुद्ध करें।
  • 10:37 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    गणेश स्थापना दिशा (Ganesh Sthapana Direction)

    गणपति बप्पा की मूर्ति उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके रखें। 

  • 10:12 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    गणेश चालीसा वीडियो

  • 9:26 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    27 अगस्त 2025 शुभ मुहूर्त

    • ब्रह्म मुहूर्त 04:28 ए एम से 05:12 ए एम
    • प्रातः सन्ध्या 04:50 ए एम से 05:57 ए एम
    • विजय मुहूर्त 02:31 पी एम से 03:22 पी एम
    • गोधूलि मुहूर्त 06:48 पी एम से 07:10 पी एम
    • सायाह्न सन्ध्या 06:48 पी एम से 07:55 पी एम
    • सर्वार्थ सिद्धि योग 05:57 ए एम से 06:04 ए एम
    • रवि योग 05:57 ए एम से 06:04 ए एम
  • 8:55 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    गणेश चतुर्थी शुभ चौघड़िया मुहूर्त 2025

    • लाभ - उन्नति - 05:57 ए एम से 07:33 ए एम
    • अमृत - सर्वोत्तम - 07:33 ए एम से 09:09 ए एम
    • शुभ - उत्तम - 10:46 ए एम से 12:22 पी एम
    • लाभ - उन्नति - 05:12 पी एम से 06:48 पी एम
    • शुभ - उत्तम - 08:12 पी एम से 09:35 पी एम
    • अमृत - सर्वोत्तम - 09:35 पी एम से 10:59 पी एम
    • लाभ - उन्नति - 03:10 ए एम से 04:33 ए एम, अगस्त 28
  • 8:33 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    गणेश चतुर्थी 2025

    करें गणपति बप्पा के दर्शन

  • 8:20 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    गणेश स्थापना कितने दिन के लिए करें?

    आप अपनी सुविधा अनुसार 1.5 दिन, 3 दिन, 5 दिन, 7 दिन या 10 दिन (अनंत चतुर्दशी) तक गणपति की स्थापना कर सकते हैं।

  • 7:57 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    गणेश चतुर्थी स्थापना मुहूर्त 2025 (Shubh Muhurat For Ganesh Chaturthi 2025)

    • पुणे - 11:21 ए एम से 01:51 पी एम 
    • नई दिल्ली - 11:05 ए एम से 01:40 पी एम 
    • चेन्नई - 10:56 ए एम से 01:25 पी एम 
    • जयपुर - 11:11 ए एम से 01:45 पी एम 
    • हैदराबाद - 11:02 ए एम से 01:33 पी एम 
  • 7:25 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    गणेश चतुर्थी पर करें इस मंत्र का जाप

    मंत्र: ॐ गण गणपतये नमः ।

    लाभ: यह गणेश जी का मूल बीज मंत्र है। इसे प्रतिदिन जपने से सभी विघ्न, रुकावटें, और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है। यह मंत्र मन को शांति, और जीवन में स्थिरता देता है।

  • 7:01 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    गणेश जी की आरती सुखकर्ता दुखहर्ता (sukhkarta dukhharta lyrics)

    • सुख करता दुखहर्ता, वार्ता विघ्नाची
    • नूर्वी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची
    • सर्वांगी सुन्दर उटी शेंदु राची
    • कंठी झलके माल मुकताफळांची
    • जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
    • दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति
    • जय देव जय देव
    • रत्नखचित फरा तुझ गौरीकुमरा
    • चंदनाची उटी कुमकुम केशरा
    • हीरे जडित मुकुट शोभतो बरा
    • रुन्झुनती नूपुरे चरनी घागरिया
    • जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
    • दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति
    • जय देव जय देव
    • लम्बोदर पीताम्बर फनिवर वंदना
    • सरल सोंड वक्रतुंडा त्रिनयना
    • दास रामाचा वाट पाहे सदना
    • संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवर वंदना
    • जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
    • दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति
    • जय देव जय देव
    • शेंदुर लाल चढायो अच्छा गजमुख को
    • दोन्दिल लाल बिराजे सूत गौरिहर को
    • हाथ लिए गुड लड्डू साई सुरवर को
    • महिमा कहे ना जाय लागत हूँ पद को
    • जय जय जय जय जय
    • जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता
    • धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता
    • जय देव जय देव
  • 6:23 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    गणेश चतुर्थी पर क्या करें?

    • घर की सफाई करें, विशेष रूप से पूजा स्थल को शुद्ध और साफ रखें।
    • गणेश जी की मूर्ति उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके स्थापित करें।
    • लाल या पीले कपड़े पर मूर्ति रखें, ये रंग बप्पा को प्रिय हैं।
    • 21 दूर्वा जरूर अर्पित करें, यह गणेश जी को अत्यंत प्रिय है।
    • मोदक या लड्डू का भोग जरूर लगाएं, विशेषकर घर में बना हुआ।
    • शुद्ध देसी घी का दीपक और धूप जलाएं। साथ ही, “ॐ गं गणपतये नमः” या “जय गणेश देवा” जैसे मंत्रों का जाप करें।
  • 10:22 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    गणेश चतुर्थी पर चांद देखने की क्यों होती है मनाही?

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्रमा ने एक बार भगवान गणेश का उपहास किया था, इस कारण भगवान गणेश ने चंद्रमा को कलंकित होने का श्राप दिया था। इसलिए गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखने की मनाही होती है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन जो व्यक्ति चंद्रमा को देख ले उस पर झूठा कलंक लग सकता है। 

  • 9:32 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    गणेश चतुर्थी पर जरूर करें गणपति के मूल मंत्र का जप

    भगवान गणेश का मूल मंत्र 'ॐ गं गणपतये नमः' है। इस मंत्र का जप करने से भक्तों के जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं। इसके साथ ही सौभाग्य, बुद्धि और आर्थिक स्थिति में भी बेहद अच्छे बदलाव इस मंत्र का जप करने से आते हैं। 

  • 9:02 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    श्रीगणेश अथर्वशीर्ष

    ॐ नमस्ते गणपतये।

    त्वमेव प्रत्यक्षं तत्वमसि।।

    त्वमेव केवलं कर्त्ताऽसि।

    त्वमेव केवलं धर्तासि।।

    त्वमेव केवलं हर्ताऽसि।

    त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि।।

    त्वं साक्षादत्मासि नित्यम्।

    ऋतं वच्मि।। सत्यं वच्मि।।

    अव त्वं मां।। अव वक्तारं।।

    अव श्रोतारं। अवदातारं।।

    अव धातारम अवानूचानमवशिष्यं।।

    अव पश्चातात्।। अवं पुरस्तात्।।

    अवोत्तरातात्।। अव दक्षिणात्तात्।।

    अव चोर्ध्वात्तात।। अवाधरात्तात।।

    सर्वतो मां पाहिपाहि समंतात्।।

    त्वं वाङग्मयचस्त्वं चिन्मय।

    त्वं वाङग्मयचस्त्वं ब्रह्ममय:।।

    त्वं सच्चिदानंदा द्वितियोऽसि।

    त्वं प्रत्यक्षं ब्रह्मासि।

    त्वं ज्ञानमयो विज्ञानमयोऽसि।।

    सर्व जगदि‍दं त्वत्तो जायते।

    सर्व जगदिदं त्वत्तस्तिष्ठति।

    सर्व जगदिदं त्वयि लयमेष्यति।।

    सर्व जगदिदं त्वयि प्रत्येति।।

    त्वं भूमिरापोनलोऽनिलो नभ:।।

    त्वं चत्वारिवाक्पदानी।।

    त्वं गुणयत्रयातीत: त्वमवस्थात्रयातीत:।

    त्वं देहत्रयातीत: त्वं कालत्रयातीत:।

    त्वं मूलाधार स्थितोऽसि नित्यं।

    त्वं शक्ति त्रयात्मक:।।

    त्वां योगिनो ध्यायंति नित्यम्।

    त्वं शक्तित्रयात्मक:।।

    त्वां योगिनो ध्यायंति नित्यं।

    त्वं ब्रह्मा त्वं विष्णुस्त्वं रुद्रस्त्वं इन्द्रस्त्वं अग्निस्त्वं।

    वायुस्त्वं सूर्यस्त्वं चंद्रमास्त्वं ब्रह्मभूर्भुव: स्वरोम्।।

    गणादिं पूर्वमुच्चार्य वर्णादिं तदनंतरं।।

    अनुस्वार: परतर:।। अर्धेन्दुलसितं।।

    तारेण ऋद्धं।। एतत्तव मनुस्वरूपं।।

    गकार: पूर्व रूपं अकारो मध्यरूपं।

    अनुस्वारश्चान्त्य रूपं।। बिन्दुरूत्तर रूपं।।

    नाद: संधानं।। संहिता संधि: सैषा गणेश विद्या।।

    गणक ऋषि: निचृद्रायत्रीछंद:।। ग‍णपति देवता।।

    ॐ गं गणपतये नम:।।

  • 8:09 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    गणेश चतुर्थी पर बनेंगे कई शुभ योग, पूजन से मिलेगा मनचाहा फल

    गणेश चतुर्थी 27 अगस्त के दिन कई शुभ संयोग भी बनने जा रहे हैं। इस दिन धन योग, लक्ष्मी नारायण राजयोग, आदित्य योग, उभयचरी योग रहेगा। इन शुभ योगों के चलते गणेश जी की पूजा से शुभ फलों की प्राप्ति भक्तों को होगी और उनकी मनोकामनाएं भी पूरी होंगी। 

  • 7:09 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    गणेश जी की मूर्ति स्थापित करने से पहले जरूर जान लें ये 3 बातें

    गणेश जी की ऐसी मूर्ति घर लाएं जिसमें उनकी सूंड बाई ओर हो। 
    ऐसी मूर्ति घर लाएं जिसमें गणेश जी का एक हाथ आशीर्वाद की मुद्रा में हो। 
    गलती से भी ऐसी मूर्ति घर न लाएं जो किसी भी तरह से खंडित हो। 

  • 6:42 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    गणेश पूजन में इस मंत्र का जरूर करें जप

    गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारु भक्षणमं।

    उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम।

  • 5:35 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    गणेश जी की मूर्ति घर में किस दिशा में स्थापित करनी चाहिए?

    गणेश चतुर्थी के दिन कई लोग घर में गणेश जी की मूर्ति को स्थापित करते हैं। वास्तु के अनुसार, गणेश जी की मूर्ति आपको ईशान कोण यानि उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित करनी चाहिए। यह दिशा ईश्वर का स्थान कही जाती है। गणेश जी की प्रतिमा यहां स्थापित करने से आपको उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। 

  • 5:20 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    गणेश जी की आरती

    जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
    माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

    एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
    माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥ 
    जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
    माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

    पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।
    लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥

    जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
    माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

    अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
    बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥

    जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
    माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

    'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
    माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

    जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
    माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

    दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
    कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी॥

    जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
    माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

  • 3:58 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    गणेश चतुर्थी के दिन पूजा में जरूर शामिल करें ये चीजें

    • गणेश जी की पूजा में आपको नीचे दी गई चीजें जरूर शामिल करनी चाहिए।  प्रतिमा या मूर्ति 
    • नारियल, अमरूद, मौसमी फल 
    • मोदक और बेसन के लड्डू, नैवेद्य (पकवान, पंचमेवा, पान)
    • पूजा के लिए घंटी, शंख, आरती की थाली, पूजा के लिए चौकी या पाट
    • लाल अथवा पीला आसन/कपड़ा
    • पंचामृत, कलश जल सहित, नारियल व आम के पत्ते, पान के पत्ते
    • सुपारी, लौंग, इलायची, अक्षत, दूर्वा, सिंदूर, हल्दी, कुंकुम, रोली
    • चंदन, धूप, दीपक, कपूर, अगरबत्ती, फूल 
    • फलों में केला, अनार
  • 3:44 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    गणेश चतुर्थी का शुभ मुहूर्त

    इस साल गणेश चतुर्थी का पावन पर्व 27 अगस्त 2025 को मनाया जा रहा है। इस दिन गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त 11:05 ए एम से 01:40 पी एम तक रहेगा।