Masik Shivratri 2026 Puja Vidhi Live: साल की पहली मासिक शिवरात्रि आज, जान लें पूजा का मुहूर्त, विधि, मंत्र, कथा...समेत सारी जानकारी यहां
Masik Shivratri 2026 Live: हिंदू धर्म में मासिक शिवरात्रि का विशेष महत्व माना गया है। यह तिथि भगवान शिव और मां पार्वती की आराधना के लिए अत्यंत शुभ होती है। वैदिक पंचांग के अनुसार माघ माह की मासिक शिवरात्रि इस बार 16 जनवरी को मनाई जाएगी।

Masik Shivratri 2026 Live: हिंदू धर्म में मासिक शिवरात्रि का विशेष महत्व माना गया है। यह तिथि भगवान शिव और मां पार्वती की आराधना के लिए अत्यंत शुभ होती है। वैदिक पंचांग के अनुसार माघ माह की मासिक शिवरात्रि इस बार 16 जनवरी को मनाई जाएगी। इस दिन निशा काल में विधिपूर्वक पूजा करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। खास बात यह है कि इस बार माघ शिवरात्रि पर कई शुभ योग भी बन रहे हैं, जिससे इस दिन का महत्व और बढ़ गया है।
मासिक शिवरात्रि शुभ संयोग
पंचांग के अनुसार, 16 जनवरी को सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत होगी, जो 17 जनवरी की देर रात 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगी। इस दिन निशा काल में भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा का विशेष विधान है। 16 जनवरी को मासिक शिवरात्रि के लिए निशिता काल पूजा समय रात 11 बजकर 42 मिनट से देर रात 12 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। इस दिन ध्रुव योग और भद्रावास जैसे शुभ संयोग बन रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इन मंगलकारी योगों में शिव-पार्वती की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
मासिक शिवरात्रि की पूजा विधि
पूजा विधि की बात करें तो मासिक शिवरात्रि के दिन भक्तों को सूर्योदय से पहले उठकर भगवान शिव और मां पार्वती को प्रणाम करना चाहिए। इसके बाद घर की साफ-सफाई कर गंगाजल मिले जल से स्नान करें। आचमन के बाद सफेद रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें और सूर्य देव को जल अर्पित करें। फिर पंचोपचार विधि से भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करें। शिवलिंग पर फल, फूल और मिष्ठान अर्पित करें तथा शिव चालीसा का पाठ और शिव मंत्रों का जप करें। अंत में शिव आरती कर भगवान शिव से सुख, सौभाग्य और समृद्धि की कामना करें। मान्यता है कि इस विधि से की गई पूजा से जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
Live updates : Masik Shivratri 2026 Live: मासिक शिवरात्रि के दिन इस विधि से करें पूजा, जानें शुभ मुहूर्त, व्रत पारण विधि और महत्व
-
January 16, 2026 5:32 PM (IST) Posted by Arti Azad
मासिक शिवरात्रि पर रात में भद्रा
आज की मासिक शिवरात्रि पर भद्रा रात में लग रही है। भद्रा का प्रारंभ रात में 10 बजकर 21 मिनट से होगा और यह 17 जनवरी को सुबह 7 बजकर 15 मिनट तक रहेगी। इस भद्रा का वास पाताल लोक में है।
-
January 16, 2026 5:05 PM (IST) Posted by Arti Azad
Shiv Mrityunjay Stotra: शिव मृत्युंजय स्तोत्र
शिव मृत्युंजय स्तोत्र॥
रत्नसानुशरासनं रजताद्रिश्रृंगनिकेतनं
शिञ्जिनीकृतपन्नगेश्वरमच्युतानलसायकम्।
क्षिप्रदग्धपुरत्रयं त्रिदशालयैरभिवंदितंचन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥
पंचपादपपुष्पगन्धिपदाम्बुजद्वयशोभितं
भाललोचनजातपावकदग्धमन्मथविग्रहम्।भस्मदिग्धकलेवरं भवनाशिनं भवमव्ययं
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥
मत्तवारणमुख्यचर्मकृतोत्तरीयमनोहरंपंकजासनपद्मलोचनपूजितांगघ्रिसरोरुहम्।
देवसिद्धतरंगिणी करसिक्तशीतजटाधरं
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥कुण्डलीकृतकुण्डलीश्वरकुण्डलं वृषवाहनं
नारदादिमुनीश्वरस्तुतवैभवं भुवनेश्वरम्।
अंधकान्तकमाश्रितामरपादपं शमनान्तकंचन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥
यक्षराजसखं भगाक्षिहरं भुजंगविभूषणं
शैलराजसुतापरिष्कृतचारुवामकलेवरम्।क्ष्वेडनीलगलं परश्वधधारिणं मृगधारिणं
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥
भेषजं भवरोगिणामखिलापदामपहारिणंदक्षयज्ञविनाशिनं त्रिगुणात्मकं त्रिविलोचनम्।
भुक्तिमुक्तिफलप्रदं निखिलाघसंघनिबर्हणं
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥भक्तवत्सलमर्चतां निधिमक्षयं हरिदम्बरं
सर्वभूतपतिं परात्परमप्रमेयमनूपमम्।
भूमिवारिनभोहुताशनसोमपालितस्वाकृतिंचन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥
विश्वसृष्टिविधायिनं पुनरेव पालनतत्परं
संहरन्तमथ प्रपंचमशेषलोकनिवासिनम्। -
January 16, 2026 2:42 PM (IST) Posted by Laveena Sharma
मासिक शिवरात्रि की पूजा कब करनी चाहिए
मासिक शिवरात्रि की पूजा के लिए प्रदोष काल और निशिता काल का समय सबसे शुभ माना जाता है। आप अपनी सुविधानुसार दोनों में से किसी भी समय शिव पूजा कर सकते हैं।
-
January 16, 2026 2:08 PM (IST) Posted by Laveena Sharma
Maha Shivratri 2026: महा शिवरात्रि कब है
इस साल महा शिवरात्रि का पावन पर्व 15 फरवरी 2026 को मनाया जाएगा। ये शिवरात्रि साल की सबसे बड़ी शिवरात्रि होती है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार इसी शिवरात्रि पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था।
-
January 16, 2026 1:24 PM (IST) Posted by Laveena Sharma
Masik Shivratri: मासिक शिवरात्रि व्रत के फायदे
धार्मिक मान्यताओं अनुसार मासिक शिवरात्रि व्रत करने से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है, विवाह में आ रही बाधाएं दूर हो जाती हैं, मानसिक शांति मिलने के साथ-साथ और सुख-समृद्धि में भी बढ़ोतरी होती है। यह व्रत आत्मा को शुद्ध करता है और पापों का नाश करता है।
-
January 16, 2026 12:51 PM (IST) Posted by Laveena Sharma
Masik Shivratri 2026 List: मासिक शिवरात्रि 2026 लिस्ट
- शुक्रवार, 16 जनवरी मासिक शिवरात्रि
- रविवार, 15 फरवरी मासिक शिवरात्रि
- मंगलवार, 17 मार्च मासिक शिवरात्रि
- बुधवार, 15 अप्रैल मासिक शिवरात्रि
- शुक्रवार, 15 मई मासिक शिवरात्रि
- शनिवार, 13 जून मासिक शिवरात्रि
- रविवार, 12 जुलाई मासिक शिवरात्रि
- मंगलवार, 11 अगस्त मासिक शिवरात्रि
- बुधवार, 09 सितंबर मासिक शिवरात्रि
- गुरुवार, 08 अक्टूबर मासिक शिवरात्रि
- शनिवार, 07 नवंबर मासिक शिवरात्रि
- सोमवार, 07 दिसंबर मासिक शिवरात्रि
-
January 16, 2026 12:25 PM (IST) Posted by Laveena Sharma
Masik Shivratri Food: मासिक शिवरात्रि व्रत में क्या खा सकते हैं?
- फल, दूध, दही, पनीर, मखाना
- सिंघाड़े और कुट्टू के आटे से बने व्यंजन
- साबूदाना, आलू और सूखे मेवे
- सेंधा नमक और पानी का सेवन
- गेहूं, चावल और साधारण नमक
-
January 16, 2026 11:59 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Masik Shivratri Puja Muhurat: मासिक शिवरात्रि पूजा मुहूर्त
16 जनवरी को मासिक शिवरात्रि की पूजा का मुहूर्त रात 11 बजकर 42 मिनट से देर रात 12 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। इस दिन ध्रुव योग और भद्रावास जैसे शुभ संयोग बन रहे हैं।
-
January 16, 2026 11:12 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Masik Shivratri 2026: साल में कितनी मासिक शिवरात्रि आती हैं
एक साल में कुल 12 या 13 मासिक शिवरात्रि आती हैं। 16 जनवरी को माघ कृष्ण पक्ष की मासिक शिवरात्रि है।
-
January 16, 2026 10:44 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Masik Shivratri 2026: मासिक शिवरात्रि व्रत में क्या खाना चाहिए
मासिक शिवरात्रि व्रत में फलाहारी भोजन का सेवन कर सकते हैं। इस दिन अन्न का सेवन भूलकर भी न करें।
-
January 16, 2026 10:08 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Shivratri: गणेश संकटनाशन स्तोत्र
- प्रणम्य शिरसा देवं गौरी विनायकम् ।
- भक्तावासं स्मेर नित्यमाय्ः कामार्थसिद्धये ।।
- प्रथमं वक्रतुडं च एकदंत द्वितीयकम् ।
- तृतियं कृष्णपिंगात्क्षं गजववत्रं चतुर्थकम् ।।
- लंबोदरं पंचम च पष्ठं विकटमेव च ।
- सप्तमं विघ्नराजेंद्रं धूम्रवर्ण तथाष्टमम् ।।
- नवमं भाल चंद्रं च दशमं तु विनायकम् ।
- एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजानन् ।।
- द्वादशैतानि नामानि त्रिसंघ्यंयः पठेन्नरः ।
- न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं प्रभो ।।
- विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् ।
- पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मो क्षार्थी लभते गतिम् ।।
- जपेद्णपतिस्तोत्रं षडिभर्मासैः फलं लभते ।
- संवत्सरेण सिद्धिंच लभते नात्र संशयः ।।
- अष्टभ्यो ब्राह्मणे भ्यश्र्च लिखित्वा फलं लभते ।
- तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादतः ।।
-
January 16, 2026 9:41 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Masik Shivratri 2026: मासिक शिवरात्रि के उपाय
अगर आप चाहते हैं कि आपकी संतान आपके सभी कामों में मदद करें और उनसे आपके रिश्ते बेहतर बना रहे, तो मासिक शिवरात्रि के दिन शिव जी को नारियल अर्पित करें। साथ ही भगवान को सूखे मेवे का भोग लगाएं।
-
January 16, 2026 8:48 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Masik Shivratri 2026: शिव की पूजा में क्या नहीं चढ़ाते हैं
शिव की पूजा में तुलसी के अलावा शंख, नारियल का पानी, हल्दी, रोलीस कनेर, कमल, लाल रंग के फूल, केतकी और केवड़े के फूल को भी नहीं चढ़ाए जाते हैं।
-
January 16, 2026 8:07 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Shiv Ji Ki Aarti: शिव जी की आरती
ॐ जय शिव ओंकारा,
स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव,
अर्द्धांगी धारा ॥
ॐ जय शिव ओंकारा...॥एकानन चतुरानन
पंचानन राजे ।
हंसासन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा...॥दो भुज चार चतुर्भुज
दसभुज अति सोहे ।
त्रिगुण रूप निरखते
त्रिभुवन जन मोहे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा...॥अक्षमाला वनमाला,
मुण्डमाला धारी ।
चंदन मृगमद सोहै,
भाले शशिधारी ॥
ॐ जय शिव ओंकारा...॥श्वेताम्बर पीताम्बर
बाघम्बर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक
भूतादिक संगे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा...॥कर के मध्य कमंडल
चक्र त्रिशूलधारी ।
सुखकारी दुखहारी
जगपालन कारी ॥
ॐ जय शिव ओंकारा...॥ब्रह्मा विष्णु सदाशिव
जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर में शोभित
ये तीनों एका ॥
ॐ जय शिव ओंकारा...॥त्रिगुणस्वामी जी की आरति
जो कोइ नर गावे ।
कहत शिवानंद स्वामी
सुख संपति पावे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा...॥लक्ष्मी व सावित्री
पार्वती संगा ।
पार्वती अर्द्धांगी,
शिवलहरी गंगा ॥
ॐ जय शिव ओंकारा...॥पर्वत सोहैं पार्वती,
शंकर कैलासा ।
भांग धतूर का भोजन,
भस्मी में वासा ॥
ॐ जय शिव ओंकारा...॥जटा में गंग बहत है,
गल मुण्डन माला ।
शेष नाग लिपटावत,
ओढ़त मृगछाला ॥
जय शिव ओंकारा...॥काशी में विराजे विश्वनाथ,
नंदी ब्रह्मचारी ।
नित उठ दर्शन पावत,
महिमा अति भारी ॥
ॐ जय शिव ओंकारा...॥ॐ जय शिव ओंकारा,
स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव,
अर्द्धांगी धारा ॥ -
January 16, 2026 7:31 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Shiv Stuti (शिव स्तुति)
आशुतोष शशांक शेखर,
चन्द्र मौली चिदंबरा,
कोटि कोटि प्रणाम शम्भू,
कोटि नमन दिगम्बरा ॥निर्विकार ओमकार अविनाशी,
तुम्ही देवाधि देव,
जगत सर्जक प्रलय करता,
शिवम सत्यम सुंदरा ॥निरंकार स्वरूप कालेश्वर,
महा योगीश्वरा,
दयानिधि दानिश्वर जय,
जटाधार अभयंकरा ॥शूल पानी त्रिशूल धारी,
औगड़ी बाघम्बरी,
जय महेश त्रिलोचनाय,
विश्वनाथ विशम्भरा ॥नाथ नागेश्वर हरो हर,
पाप साप अभिशाप तम,
महादेव महान भोले,
सदा शिव शिव संकरा ॥जगत पति अनुरकती भक्ति,
सदैव तेरे चरण हो,
क्षमा हो अपराध सब,
जय जयति जगदीश्वरा ॥जनम जीवन जगत का,
संताप ताप मिटे सभी,
ओम नमः शिवाय मन,
जपता रहे पञ्चाक्षरा ॥आशुतोष शशांक शेखर,
चन्द्र मौली चिदंबरा,
कोटि कोटि प्रणाम शम्भू,
कोटि नमन दिगम्बरा ॥
कोटि नमन दिगम्बरा.. -
January 16, 2026 7:05 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Masik Shivratri Mantra: मासिक शिवरात्रि मंत्र
सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
उज्जयिन्यां महाकालं ओम्कारम् अमलेश्वरम्॥
परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशङ्करम्।
सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥
वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे।
हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये॥
एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः।।
-
January 16, 2026 6:50 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
मासिक शिवरात्रि व्रत कथा (Masik Shivratri Vrat Katha)
मासिक शिवरात्रि की व्रत कथा का वर्णन पौराणिक ग्रंथों में मिलता है। कथा के अनुसार, प्राचीन समय में चित्रभानु नाम का एक शिकारी था जो जंगल में शिकार करके ही अपना परिवार का भरण-पोषण करता था। हालांकि, चित्रभानु नगर के एक साहुकार का कर्जदार था और आर्थिक परेशानियां उसके जीवन में चलती रहती थीं। जब लंबे समय तक चित्रभानु साहुकार का कर्ज नहीं चुका पाया तो एक दिन साहुकार ने उसे शिवमठ में बंदी बना दिया। जिस दिन उसे बंदी बनाया गया उसी दिन संयोगवश मासिक शिवरात्रि भी थी। मासिक शिवरात्रि के कारण शिवमठ में भजन कीर्तन और शिव उपासना हो रही थी, चूंकि शिकारी बंदी था तो उसने दिन भर शिव भजन और कथा सुनी। इसके बाद साहुकार ने शिकारी को कुछ समय बंदी बनाने के बाद उसे खोलकर अपने पास बुलाया और उधार चुकाने को कहा। इस पर चित्रभानु ने अगले दिन तक ऋण चुकाने की बात कही और यह वादा करके वो चला गया।
चित्रभानु निकला शिकार की तलाश में
सेठ की कैद से छूटकर शिकारी सीधे शिकार पर जंगल की ओर निकल गया। लेकिन लंबे समय तक वो बंदी था इसलिए भूखा प्यास से वो तड़प रहा था। शिकार की तलाश में वो भटकता रहा लेकिन सफलता उसके हाथ न लगी और सूर्यास्त का समय भी नजदीक आ गया। सूर्यास्त के समय वो एक तालाब के पास पहुंचा जहां उसने जल पिया और सुस्ताने के लिए एक बेल के पेड़ पर चढ़ गया। उस पेड़ के नीचे एक शिवलिंग स्थित था जो बेलपत्र से ढका हुआ था। पेड़ पर बैठे-बैठे शिकारी बेलपत्र तोड़ता रहा और संयोगवश वो बेलपत्र नीचे शिवलिंग पर गिरते रहे। पूरे दिन भर खाना न खाने के कारण शिकारी का व्रत भी हो गया था और रात्रि के पहले पहर में शिवलिंग पर वो बेलपत्र डाल रहा था इसलिए उसके रात्रि के पहले पहर की पूजा भी हो गई।
अनजाने में शुरू हुई शिव भगवान की पूजा
कुछ वक्त बाद तालाब के किनारे एक हिरणी आई जिसे देखकर चित्रभानु प्रसन्न हुआ और उसका शिकार करने के लिए चित्रभानु ने धनुष पर तीर चढ़ा दिया। यह देखकर हिरणी ने कहा कि वो गर्भवती है इसलिए उसका शिकार न करे। हिरणी ने शिकारी से वादा किया कि प्रसव करने के बाद वो शिकारी के पास लौटेगी। शिकारी के मन में दया का भाव जाग गया और उसने धनुष नीचे कर दिया। कुछ समय के बाद एक दूसरी हिरणी झाड़ियों से निकली तो चित्रभानु प्रसन्न हो गया और उसने फिर से धनुष में बाण चढ़ा दिया, यह देखकर उस हिरणी ने कहा कि वो अपने पति की तलाश में वो उसे न मारे। हिरणी ने कहा कि एक बार मैं अपने पति से मिल लूं फिर स्वयं तुम्हारे पास आ जाऊंगी, चित्रभानु का दिल पिघल गया और उसने हिरणी को जाने दिया। जब उसने धनुष पर बाण चढ़ाया और बाद में वापस उसे खींच लिया, इस दौरान कुछ बेलपत्र शिवलिंग पर गिर गए और रात्रि के दूसरे पहर की पूजा भी संपन्न हो गई।
हिरणी पर की चित्रभानु ने दया
इसके बाद एक और हिरणी अपने बच्चों के साथ तालाब के निकट आई। चित्रभानु ने फिर धनुष में बाण चढ़ाया यह देखकर हिरणी बोली कि आप मुझे अभी मत मारो मैं अपने बच्चों को इनके पिता के पास छोड़कर आ जाऊं उसके बाद जब मैं वापस लौट जाऊंगी तो आप मेरा शिकार कर सकते हैं। इस पर चित्रभानु हंसने लगा और बोला कि मैं मूर्ख नहीं हूं, पहले भी दो बार शिकार छोड़ चुका हूं अबकी बार नहीं छोड़ूंगा। तब हिरणी बोली की जिस तरह आपको अपने बच्चों की चिंता है और उनके लिए आप रात्रि में भी कार्य कर रहे हैं उनसे तरह मुझे भी अपने बच्चों की चिंता है। यह बात सुनकर शिकारी का मन भावुक हो गया और उसने हिरणी को छोड़ दिया।
इसके बाद एक मृग (हिरन) शिकारी को दिखा और इसे मारने के लिए शिकारी व्याकुल हो गया। तब हिरण बोला कि हे शिकारी अगर आपने मेरी तीनों पत्नियों और बच्चों को मार दिया है तो आप मुझे भी मार दें। लेकिन अगर आपने उन्हें नहीं मारा है तो एक बार आप मुझे उनसे मिलने दें नहीं तो वो सब वियोग में मर जाएंगे। हिरण ने वादा किया कि अपने परिवार से मिलने के बाद वो वापस शिकारी के पास आ जाएगा। हिरन की बात सुनकर एक बार फिर शिकारी ने धनुष पर चढ़ाए बाण को वापस खींच लिया और इस दौरान कुछ बेलपत्र फिर से शिवलिंग पर गिर गए और रात्रि के अंतिम प्रहर की पूजा भी अनजाने में शिकारी ने पूरी कर दी।
चित्रभानु को हुई शिवलोक की प्राप्ति
कुछ वक्त बाद हिरन अपने पूरे परिवार के साथ शिकारी के पास जा पहुंचा। उसने और उसकी पत्नियों ने अपना वादा निभाया। जंगल के पशुओं की निष्ठा और वचनबद्धता देखकर चित्रभानु का मन बदल गया। अगले दिन वो नगर वापस लौटा और किसी व्यक्ति से कर्ज लेकर साहुकार का कर्ज चुका दिया। इसके बाद वो मेहनत करने लगा और शिव जी की कृपा से धीरे-धीरे उसका परिवार धन-धान्य से संपन्न हो गया। अंत समय में जब यमदूत उसे लेने आए तो शिवगणों ने उन्हें भगा दिया और चित्रभानु को शिवलोक ले गए। कथा का सार यह है कि अगर आप अनजाने में भी शिव भगवान की आराधना करते हैं और मासिक शिवरात्रि की कथा का पाठ करते हैं या सुनते हैं तो आपको संपन्नता के साथ ही अंत समय में शिवलोक की प्राप्ति होती है।
-
January 16, 2026 12:06 AM (IST) Posted by Arti Azad
शिवरात्रि पूजा विधि और व्रत पारण
मासिक शिवरात्रि का पूजा विधान एक दिन पहले से शुरू हो जाता है। त्रयोदशी के दिन प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा आराधना करें और मासिक शिवरात्रि व्रत का संकल्प लें। चतुर्दशी के दिन निराहार रहकर व्रत करें और भगवान शिव पर पवित्र नदी का जल चढ़ाएं। फिर पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करें और शिवपंचाक्षर मंत्र ओम नमः शिवाय का जाप करें। इसके बाद रात्रि के चारों पहर में शिव की पूजा करें और अगले दिन सुबह जरूरतमंद लोगों को भोजन या दान दक्षिण देकर अपने व्रत का पारण करें।
-
January 16, 2026 12:04 AM (IST) Posted by Arti Azad
भोलेनाथ भजन लिरिक्स (Bholenath Bhajan Lyrics)
चलो चलो ससुराल ओ भोले नाथ
मेरे पिता ने यज्ञ रचाया, तुम उनके दामाद ओ भोलेनाथसब देवों को निमंत्रण दिया है
हमें दिया ना कार्ड ओ भोलेनाथ, चलो चलो...ब्रह्मा भी जाए रहे विष्णु भी जाए
रहे मन मेरा उदास ओ भोलेनाथ, चलो चलो...विष्णु भी जाए रहे लक्ष्मी भी जाए
रही मन मेरा उदास ओ भोलेनाथ, चलो चलो...राधा भी जाए रही कृष्णा भी जाए
रहे मन मेरा उदास ओ भोलेनाथ , चलो चलो...राम भी जाए रहे सीता भी जाए
रही मन मेरा उदास ओ भोलेनाथ, चलो चलो... -
January 16, 2026 12:01 AM (IST) Posted by Arti Azad
शिव मृत्युंजय स्तोत्र (Shiv Mrityunjay Stotra)
शिव मृत्युंजय स्तोत्र॥
रत्नसानुशरासनं रजताद्रिश्रृंगनिकेतनं
शिञ्जिनीकृतपन्नगेश्वरमच्युतानलसायकम्।
क्षिप्रदग्धपुरत्रयं त्रिदशालयैरभिवंदितंचन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥
पंचपादपपुष्पगन्धिपदाम्बुजद्वयशोभितं
भाललोचनजातपावकदग्धमन्मथविग्रहम्।भस्मदिग्धकलेवरं भवनाशिनं भवमव्ययं
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥
मत्तवारणमुख्यचर्मकृतोत्तरीयमनोहरंपंकजासनपद्मलोचनपूजितांगघ्रिसरोरुहम्।
देवसिद्धतरंगिणी करसिक्तशीतजटाधरं
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥कुण्डलीकृतकुण्डलीश्वरकुण्डलं वृषवाहनं
नारदादिमुनीश्वरस्तुतवैभवं भुवनेश्वरम्।
अंधकान्तकमाश्रितामरपादपं शमनान्तकंचन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥
यक्षराजसखं भगाक्षिहरं भुजंगविभूषणं
शैलराजसुतापरिष्कृतचारुवामकलेवरम्।क्ष्वेडनीलगलं परश्वधधारिणं मृगधारिणं
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥
भेषजं भवरोगिणामखिलापदामपहारिणंदक्षयज्ञविनाशिनं त्रिगुणात्मकं त्रिविलोचनम्।
भुक्तिमुक्तिफलप्रदं निखिलाघसंघनिबर्हणं
चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥भक्तवत्सलमर्चतां निधिमक्षयं हरिदम्बरं
सर्वभूतपतिं परात्परमप्रमेयमनूपमम्।
भूमिवारिनभोहुताशनसोमपालितस्वाकृतिंचन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:॥
विश्वसृष्टिविधायिनं पुनरेव पालनतत्परं
संहरन्तमथ प्रपंचमशेषलोकनिवासिनम्। -
January 15, 2026 11:57 PM (IST) Posted by Arti Azad
माघ माह की मासिक शिवरात्रि 2026 के शुभ संयोग
पंचांग के अनुसार, 16 जनवरी को सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत होगी, जो 18 जनवरी की रात 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगी। इस दिन निशा काल में भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा का विशेष विधान है। निशा काल में पूजा समय रात 11 बजकर 42 मिनट से 12 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। इस दिन ध्रुव योग और भद्रावास जैसे शुभ संयोग बन रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इन मंगलकारी योगों में शिव-पार्वती की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
-
January 15, 2026 11:56 PM (IST) Posted by Arti Azad
शिवरात्रि पूजा सामग्री
महादेव की पूजा में उपयोग आने वाली चीजें प्रभु की तरह की सामान्य और सरल हैं। पूजा के लिए सुगंधित पुष्प, बिल्वपत्र, भांग, धतूरा, गन्ने का रस, शुद्ध देशी घी, दही, शहद, पवित्र नदी का जल, बेर, जौ की बालें, तुलसी दल और गाय का दूध (कच्चा) होना चाहिएष इसके अलावा कपूर, धूप, दीप, रूई, मलयागिरी, चंदन, इत्र, पंच फल पंच मेवा, मौली जनेऊ, पंच रस, गंध रोली, वस्त्राभूषण रत्न, पंच मिष्ठान्न, शिव जी और मां पार्वती के लिए श्रृंगार की सामग्री, दक्षिणा आदि की जरूरत पड़ती है।
-
January 15, 2026 11:44 PM (IST) Posted by Arti Azad
मां पार्वती की आरती (Maa Parvati Ki Aarti)
जय पार्वती माता जय पार्वती माता
ब्रह्म सनातन देवी शुभ फल कदा दाता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता
जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुणगु गाता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
सिंह को वाहन साजे कुंडल है साथा
देव वधुजहं गावत नृत्य कर ताथा।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
सतयुग शील सुसुन्दर नाम सती कहलाता
हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
शुम्भ निशुम्भ विदारेहेमांचल स्याता
सहस भुजा तनुधरिके चक्र लियो हाथा।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
सृष्टि रूप तुही जननी शिव संग रंगराता
नंदी भृंगी बीन लाही सारा मदमाता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
देवन अरज करत हम चित को लाता
गावत दे दे ताली मन मेंरंगराता।
जय पार्वती माता जय पार्वती माता।
श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता
सदा सुखी रहता सुख संपति पाता।
जय पार्वती माता मैया जय पार्वती माता।
-
January 15, 2026 11:40 PM (IST) Posted by Arti Azad
ॐ जय गंगाधर जय हर जय गिरिजाधीशा (Shiv Ji ki Aarti)
ॐ जय गंगाधर जय हर जय गिरिजाधीशा।
त्वं मां पालय नित्यं कृपया जगदीशा॥ हर...॥
कैलासे गिरिशिखरे कल्पद्रमविपिने।
गुंजति मधुकरपुंजे कुंजवने गहने॥
कोकिलकूजित खेलत हंसावन ललिता।
रचयति कलाकलापं नृत्यति मुदसहिता ॥ हर...॥
तस्मिंल्ललितसुदेशे शाला मणिरचिता।
तन्मध्ये हरनिकटे गौरी मुदसहिता॥
क्रीडा रचयति भूषारंचित निजमीशम्।
इंद्रादिक सुर सेवत नामयते शीशम् ॥ हर...॥
बिबुधबधू बहु नृत्यत नामयते मुदसहिता।
किन्नर गायन कुरुते सप्त स्वर सहिता॥
धिनकत थै थै धिनकत मृदंग वादयते।
क्वण क्वण ललिता वेणुं मधुरं नाटयते ॥हर...॥
रुण रुण चरणे रचयति नूपुरमुज्ज्वलिता।
चक्रावर्ते भ्रमयति कुरुते तां धिक तां॥
तां तां लुप चुप तां तां डमरू वादयते।
अंगुष्ठांगुलिनादं लासकतां कुरुते ॥ हर...॥
कपूर्रद्युतिगौरं पंचाननसहितम्।
त्रिनयनशशिधरमौलिं विषधरकण्ठयुतम्॥
सुन्दरजटायकलापं पावकयुतभालम्।
डमरुत्रिशूलपिनाकं करधृतनृकपालम् ॥ हर...॥
मुण्डै रचयति माला पन्नगमुपवीतम्।
वामविभागे गिरिजारूपं अतिललितम्॥
सुन्दरसकलशरीरे कृतभस्माभरणम्।
इति वृषभध्वजरूपं तापत्रयहरणं ॥ हर...॥
शंखनिनादं कृत्वा झल्लरि नादयते।
नीराजयते ब्रह्मा वेदऋचां पठते॥
अतिमृदुचरणसरोजं हृत्कमले धृत्वा।
अवलोकयति महेशं ईशं अभिनत्वा॥ हर...॥
ध्यानं आरति समये हृदये अति कृत्वा।
रामस्त्रिजटानाथं ईशं अभिनत्वा॥
संगतिमेवं प्रतिदिन पठनं यः कुरुते।
शिवसायुज्यं गच्छति भक्त्या यः श्रृणुते ॥ हर...॥ -
January 15, 2026 11:35 PM (IST) Posted by Arti Azad
मासिक शिवरात्रि 2026
इस साल कब-कब मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाएगा, ये रही पूरी लिस्ट
तिथि व दिन मास (हिंदू महीना) तिथि प्रारम्भ तिथि समाप्त 16 जनवरी, शुक्रवार माघ 10:31 PM, 16 जनवरी 11:53 PM, 17 जनवरी 15 फरवरी, रविवार फाल्गुन 05:14 PM, 15 फरवरी 05:24 PM, 16 फरवरी 17 मार्च, मंगलवार चैत्र 09:33 AM, 17 मार्च 08:15 AM, 18 मार्च 15 अप्रैल, बुधवार वैशाख 10:41 PM, 15 अप्रैल 08:01 PM, 16 अप्रैल 15 मई, शुक्रवार ज्येष्ठ 08:41 AM, 15 मई 05:01 AM, 16 मई 13 जून, शनिवार ज्येष्ठ 04:17 PM, 13 जून 12:09 PM, 14 जून 12 जुलाई, रविवार आषाढ़ 10:39 PM, 12 जुलाई 06:39 PM, 13 जुलाई 11 अगस्त, मंगलवार श्रावण 05:04 AM, 11 अगस्त 01:42 AM, 12 अगस्त 9 सितंबर, बुधवार भाद्रपद 12:40 PM, 9 सितंबर 10:23 AM, 10 सितंबर 8 अक्टूबर, गुरुवार आश्विन 10:25 PM, 8 अक्टूबर 09:25 PM, 9 अक्टूबर 7 नवंबर, शनिवार कार्तिक 11:00 AM, 7 नवंबर 11:17 AM, 8 नवंबर 7 दिसंबर, सोमवार मार्गशीर्ष 02:32 AM, 7 दिसंबर 04:02 AM, 8 दिसंबर -
January 15, 2026 11:33 PM (IST) Posted by Arti Azad
मासिक शिवरात्रि क्या है?
शिवरात्रि शिव की महान रात्रि को कहा जाता है, जो हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। कहा जाता है कि शिवरात्रि को ही शिव जी पहली बार शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे। ज्योतिषों और मुनियों के अनुसार, हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी भगवान शिव की आराधना और साधना के लिए सबसे उपयुक्त होता है।
-
January 15, 2026 11:27 PM (IST) Posted by Arti Azad
महाशिवरात्रि से मासिक शिवरात्रि का व्रत
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त महाशिवरात्रि से मासिक शिवरात्रि का व्रत प्रारंभ कर पूरे एक साल तक इसे श्रद्धा के साथ निभाते हैं, उन्हें भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह दिन केवल उपवास तक सीमित नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा को जीवन में उतारने का अवसर भी है। कहा जाता है कि सच्चे मन से की गई शिव आराधना से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं।
-
January 15, 2026 11:13 PM (IST) Posted by Arti Azad
मासिक शिवरात्रि के दिन क्या नहीं करना चाहिए
- मासिक शिवरात्रि के शुभ दिन पर प्याज, लहसुन, मांस और मछली का सेवन नहीं करना चाहिए।
- इस दिन क्रोध करने और अपशब्दों के प्रयोग से बचना चाहिए।
- दूसरों के प्रति मन में द्वेष और ईर्ष्या नहीं रखना चाहिए।
- मन में गलत विचारों को न लाएं और नकारात्मक चीजों पर ध्यान न दें। इससे व्रत का पुण्य नष्ट हो जाता है।
- अगर आप मासिक शिवरात्रि का व्रत करते हैं, तो ध्यान रखें कि व्रत को पूरा करें। इसे अधूरा छोड़ना अशुभ माना जाता है।
-
January 15, 2026 10:59 PM (IST) Posted by Arti Azad
मासिक शिवरात्रि के दिन क्या करें?
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- स्वच्छता का विशेष महत्व होता है, इसलिए घर और मंदिर को साफ रखें।
- शिव जी को अपराजिता का फूल अर्पित करें। मान्यता है कि शिवरात्रि के दिन भोलेनाथ को यह फूल चढ़ाने से बाधाएं दूर होती हैं और हर काम में सफलता मिलती है।
- शिव मंत्र का 108 बार जाप करें। ऐसा करने से नकारात्मक विचार दूर होते हैं और मन को शांति मिलती है।
-
January 15, 2026 10:45 PM (IST) Posted by Arti Azad
हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आती है शिवरात्रि
मासिक शिवरात्रि प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। यह पावन दिन भगवान शिव और मां पार्वती की आराधना को समर्पित है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं और विधि-विधान से महादेव की पूजा करते हैं। मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत करने से शिव कृपा प्राप्त होती है और जीवन की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। विवाहित महिलाओं के दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि आती है जबकि अविवाहितों के लिए शीघ्र विवाह के शुभ योग बनते हैं।
-
January 15, 2026 10:31 PM (IST) Posted by Arti Azad
मासिक शिवरात्रि की पूजा विधि
पूजा विधि की बात करें तो मासिक शिवरात्रि के दिन भक्तों को सूर्योदय से पहले उठकर भगवान शिव और मां पार्वती को प्रणाम करना चाहिए। इसके बाद घर की साफ-सफाई कर गंगाजल मिले जल से स्नान करें। आचमन के बाद सफेद रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें और सूर्य देव को जल अर्पित करें। फिर पंचोपचार विधि से भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करें। शिवलिंग पर फल, फूल और मिष्ठान अर्पित करें तथा शिव चालीसा का पाठ और शिव मंत्रों का जप करें। अंत में शिव आरती कर भगवान शिव से सुख, सौभाग्य और समृद्धि की कामना करें। मान्यता है कि इस विधि से की गई पूजा से जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
-
January 15, 2026 9:52 PM (IST) Posted by Arti Azad
इस दिशा में बैठकर करें शिव मंत्रों का जाप
मासिक शिवरात्रि व्रत में शिव मंत्रों का जाप करना विशेष तौर पर लाभप्रद बताया गया है। सनातन धर्म में किसी भी शुभ काम को करने के लिए दिशाओं का बहुत महत्व बताया गया है। ऐसा कहा जाता है कि शिव मंत्रों का जाप शिवालय या घर के पूर्व भाग में बैठकर करने से अधिक फल प्राप्त होता है।
-
January 15, 2026 9:43 PM (IST) Posted by Arti Azad
बिल्वाष्टकम् स्तोत्र (Bilvashtakam Stotra)
प्रसिद्ध बिल्वाष्टकम् में बेल-पत्र या बिल्व पत्ते के बारे में बताया गया है। इस मन्त्र में बेल-पत्र के गुणों और उसके प्रति शिव के प्रेम का वर्णन किया गया है।
त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधम्
त्रिजन्मपाप संहारं एक बिल्वं शिवार्पणम् ॥अखण्ड बिल्व पात्रेण पूजिते नन्दिकेश्र्वरे
शुद्ध्यन्ति सर्वपापेभ्यो एक बिल्वं शिवार्पणम् ॥शालिग्राम शिलामेकां विप्राणां जातु चार्पयेत्
सोमयज्ञ महापुण्यं एक बिल्वं शिवार्पणम् ॥दन्तिकोटि सहस्राणि वाजपेय शतानि च
कोटि कन्या महादानं एक बिल्वं शिवार्पणम् ॥लक्ष्म्या स्तनुत उत्पन्नं महादेवस्य च प्रियम्
बिल्ववृक्षं प्रयच्छामि एक बिल्वं शिवार्पणम् ॥दर्शनं बिल्ववृक्षस्य स्पर्शनं पापनाशनम्
अघोरपापसंहारं एक बिल्वं शिवार्पणम् ॥काशीक्षेत्र निवासं च कालभैरव दर्शनम्
प्रयागमाधवं दृष्ट्वा एक बिल्वं शिवार्पणम् ॥मूलतो ब्रह्मरूपाय मध्यतो विष्णुरूपिणे
अग्रतः शिवरूपाय एक बिल्वं शिवार्पणम् ॥ -
January 15, 2026 9:17 PM (IST) Posted by Arti Azad
भोलेनाथ के 15 चमत्कारिक मंत्र
मासिक शिवरात्रि के शुभ अवसर पर साधक को भोलेनाथ के इन 15 चमत्कारिक मंत्रों का जाप करना चाहिए। शिव जी के इन मंत्रों का जाप जीवन में शुभता, अनुकूलता और प्रगति लाता है।
ॐ शिवाय नमः
ॐ सर्वात्मने नमः
ॐ त्रिनेत्राय नमः
ॐ हराय नमः
ॐ इन्द्रमुखाय नमः
ॐ श्रीकंठाय नमः
ॐ वामदेवाय नमः
ॐ तत्पुरुषाय नमः
ॐ ईशानाय नमः
ॐ अनंतधर्माय नमः
ॐ ज्ञानभूताय नमः
ॐ अनंतवैराग्यसिंघाय नमः
ॐ प्रधानाय नमः
ॐ व्योमात्मने नमः
ॐ युक्तकेशात्मरूपाय नमः -
January 15, 2026 8:58 PM (IST) Posted by Arti Azad
मासिक शिवरात्रि व्रत के लाभ (Monthly Shivratri Benefits)
मासिक शिवरात्रि की पूजा के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराकर स्वयं भोजन करना चाहिए, जो भी भक्त इस व्रत को पूरे श्रद्धाभाव से करता है, उसके माता-पिता और स्वयं के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। इस व्रत की महिमा से व्यक्ति दीर्घायु, ऐश्वर्य, आरोग्य और संतान आदि प्राप्त करता है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने वाले व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।
-
January 15, 2026 8:46 PM (IST) Posted by Arti Azad
मासिक शिवरात्रि 2026 के शुभ संयोग (Masik Shivratri 2026 Shubh Sanyog)
पंचांग के अनुसार, 16 जनवरी को सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत होगी, जो 18 जनवरी की रात 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगी। इस दिन निशा काल में भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा का विशेष विधान है। निशा काल में पूजा समय रात 11 बजकर 42 मिनट से 12 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। इस दिन ध्रुव योग और भद्रावास जैसे शुभ संयोग बन रहे हैं। इन शभ योगों में शिव जी की आराधना करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है।
-
January 15, 2026 8:25 PM (IST) Posted by Arti Azad
मासिक शिवरात्रि का महत्व (Monthly Shivratri Significance)
सनातन धर्म में मासिक शिवरात्रि का बहुत अधिक महत्व माना जाता है। यह शिव जी की आराधना का विशेष अवसर होता है। यह व्रत केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि संयम, श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से शिव भक्ति करने से मन शांत होता है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। यही कारण है कि शिव भक्त हर महीने इस दिन का श्रद्धा और विश्वास के साथ इंतजार करते हैं।
-
January 15, 2026 8:13 PM (IST) Posted by Arti Azad
घर पर इस विधि से करें मासिक शिवरात्रि की पूजा
- पूजा स्थान को साफ करें और भगवान शिव-पार्वती की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
- शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही और शहद से अभिषेक करें।
- बेलपत्र, सफेद फूल और चंदन अर्पित करें।
- फल और सफेद मिठाई का भोग लगाएं।
- घी का दीपक जलाकर मंत्र जाप करें।
- अंत में शिव आरती करें।
- पूजा के बाद जरूरतमंद को अन्न या दान दें।
-
January 15, 2026 7:58 PM (IST) Posted by Arti Azad
मासिक शिवरात्रि पर इन मंत्रों का करें जाप (Masik Shivratri Mantra Jaap)
मासिक शिवरात्रि के शुभ अवसर पर साधक के लिए इन शिव मंत्रों का जाप विशेष फलदायी माना जाता है।
ॐ नमः शिवाय
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि
ॐ नमो भगवते रुद्राय
ॐ शंभ सदाशिव नमो नमः
ॐ पशुपतये नमः -
January 15, 2026 7:47 PM (IST) Posted by Arti Azad
मासिक शिवरात्रि पूजा शुभ मुहूर्त (Masik Shivratri Shubh Muhurat)
मासिक शिवरात्रि पर पूजा का विशेष महत्व देर रात के समय माना गया है। 16 जनवरी को पूजा का शुभ मुहूर्त रात 12 बजकर 4 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक रहेगा।
-
January 15, 2026 7:11 PM (IST) Posted by Arti Azad
मासिक शिवरात्रि व्रत कथा (Masik Shivratri Vrat Katha)
मासिक शिवरात्रि व्रत कथा का वर्णन पौराणिक ग्रंथों में मिलता है। प्राचीन समय में चित्रभानु नामक व्यक्ति जंगल में शिकार करके ही अपना परिवार का भरण-पोषण करता था। चित्रभानु नगर के एक साहूकार का कर्जदार था। जब लंबे समय तक चित्रभानु साहूकार का कर्ज नहीं चुका पाया तो एक दिन साहूकार ने उसे शिवमठ में बंदी बना दिया। जिस दिन उसे बंदी बनाया गया उसी दिन संयोगवश मासिक शिवरात्रि भी थी। जिसके कारण शिवमठ में भजन कीर्तन और शिव उपासना हो रही थी, चूंकि शिकारी बंदी था तो उसने दिन भर शिव भजन और कथा सुनी। साहूकार ने शिकारी को कुछ समय बंदी बनाने के बाद उसे खोलकर अपने पास बुलाया और उधार चुकाने को कहा। इस पर चित्रभानु ने अगले दिन तक ऋण चुकाने की बात कही।
सेठ की कैद से छूटकर शिकारी सीधे शिकार पर जंगल की ओर निकल गया। लंबे समय तक वो बंदी था इसलिए भूखा प्यास से तड़प रहा था। वह शिकार की तलाश में भटकता रहा, लेकिन सफलता न मिली। सूर्यास्त के समय वो एक तालाब के पास पहुंचा जहां उसने जल पीया और सुस्ताने के लिए एक बेल के पेड़ पर चढ़ गया। उस पेड़ के नीचे एक शिवलिंग था जो बेलपत्र से ढका हुआ था। पेड़ पर बैठे-बैठे शिकारी बेलपत्र तोड़ता रहा और संयोगवश वो बेलपत्र नीचे शिवलिंग पर गिरते रहे। पूरे दिन भर खाना न खाने के कारण शिकारी का व्रत भी हो गया था और रात्रि के पहले पहर में शिवलिंग पर वो बेलपत्र डाल रहा था इसलिए उसके रात्रि के पहले पहर की पूजा भी हो गई।
अनजाने में शुरू हुई शिव भगवान की पूजा
कुछ वक्त बाद तालाब के किनारे एक हिरणी आई, जिसे देखकर चित्रभानु प्रसन्न हुआ और उसने धनुष पर तीर चढ़ा दिया। यह देख हिरणी ने कहा कि वो गर्भवती है। हिरणी ने वादा किया कि प्रसव करने के बाद वो शिकारी के पास लौटेगी। शिकारी के मन में दया का भाव जाग गया। कुछ समय के बाद एक दूसरी हिरणी झाड़ियों से निकली तो चित्रभानु प्रसन्न हो गया और उसने फिर से धनुष में बाण चढ़ा दिया, यह देखकर उस हिरणी ने कहा कि वो अपने पति की तलाश में वो उसे न मारे। हिरणी ने कहा कि एक बार मैं अपने पति से मिल लूं फिर स्वयं तुम्हारे पास आ जाऊंगी, चित्रभानु का दिल पिघल गया और उसने हिरणी को जाने दिया। जब उसने धनुष पर बाण चढ़ाया और बाद में वापस उसे खींच लिया, इस दौरान कुछ बेलपत्र शिवलिंग पर गिर गए और रात्रि के दूसरे पहर की पूजा भी संपन्न हो गई।
फिर एक और हिरणी बच्चों के साथ तालाब के निकट आई। चित्रभानु ने फिर धनुष में बाण चढ़ाया यह देख हिरणी बोली कि आप मुझे अभी मत मारो मैं अपने बच्चों को इनके पिता के पास छोड़कर आ जाऊं तो आप मेरा शिकार कर सकते हैं। इस पर चित्रभानु हंसने लगा और बोला कि मैं मूर्ख नहीं हूं, पहले भी दो बार शिकार छोड़ चुका हूं अबकी बार नहीं छोड़ूंगा। तब हिरणी बोली की जिस तरह आपको अपने बच्चों की चिंता है, उसी तरह मुझे भी अपने बच्चों की चिंता है। यह बात सुनकर शिकारी ने हिरणी को छोड़ दिया।
इसके बाद एक मृग (हिरन) शिकारी को दिखा और इसे मारने के लिए शिकारी व्याकुल हो गया। तब हिरण बोला कि हे शिकारी अगर आपने मेरी तीनों पत्नियों और बच्चों को मार दिया है तो आप मुझे भी मार दें। लेकिन अगर आपने उन्हें नहीं मारा है तो एक बार आप मुझे उनसे मिलने दें नहीं तो वो सब वियोग में मर जाएंगे। हिरण ने वादा किया कि अपने परिवार से मिलने के बाद वो वापस शिकारी के पास आ जाएगा। हिरन की बात सुनकर एक बार फिर शिकारी ने धनुष पर चढ़ाए बाण को वापस खींच लिया और इस दौरान कुछ बेलपत्र फिर से शिवलिंग पर गिर गए और रात्रि के अंतिम प्रहर की पूजा भी अनजाने में शिकारी ने पूरी कर दी।
चित्रभानु को हुई शिवलोक की प्राप्ति
कुछ वक्त बाद हिरन पूरे परिवार के साथ शिकारी के पास जा पहुंचा। उसने और उसकी पत्नियों ने अपना वादा निभाया। जंगल के पशुओं की निष्ठा और वचनबद्धता देखकर चित्रभानु का मन बदल गया। अगले दिन वह नगर वापस आया और किसी से उधार लेकर साहूकार का कर्ज चुकाया। इसके बाद वह मेहनत करने लगा और शिव जी की कृपा से धीरे-धीरे उसका परिवार धन-धान्य से संपन्न हो गया। अंत समय में जब यमदूत उसे लेने आए तो शिवगणों ने उन्हें भगा दिया और चित्रभानु को शिवलोक ले गए।