Purnima 2026 Dates: सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि को अत्यंत शुभ माना गया है। यह वह समय होता है जब चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ आकाश में दिखता है और इसका तेज मन को शांति और सकारात्मकता प्रदान करता है। चंद्रमा को मन का अधिष्ठाता देव कहा गया है। यही कारण है कि हर पूर्णिमा भावनाओं, मानसिक स्थिरता और आध्यात्मिक शक्ति को प्रभावित करती है। साल 2026 में कितनी पूर्णिमा तिथियां पड़ेंगी? आइए जानते हैं।
पूर्णिमा तिथियों का विशेष महत्व
साल 2026 में आने वाली हर पूर्णिमा तिथि का अपना धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। चंद्रमा को मन का अधिपति माना गया है, इसलिए पूर्णिमा के दिन मानसिक शांति, ऊर्जात्मक संतुलन और आध्यात्मिक शक्ति की वृद्धि स्वाभाविक रूप से होती है। इस दिन ध्यान, जप और पूजा करने से मन स्थिर होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है।
अधिक मास के कारण 13 पूर्णिमा तिथियां
साल 2026 में अधिक मास पड़ने के कारण कुल 13 पूर्णिमा तिथियां रहेंगी, जो पूजा, व्रत, ध्यान और दान-पुण्य के लिए विशेष फलदायी मानी जाती हैं। पूर्णिमा का उजास मन की अशांति दूर करता है। साथ ही साधक की मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और भावनात्मक शक्ति को बढ़ाता है।
साल 2026 में पूर्णिमा
| पूर्णिमा का नाम | तिथि | दिन |
|---|
| पौष पूर्णिमा | 3 जनवरी 2026 | शनिवार |
| माघ पूर्णिमा | 1 फरवरी 2026 | रविवार |
| फाल्गुन पूर्णिमा | 3 मार्च 2026 | मंगलवार |
| चैत्र पूर्णिमा | 2 अप्रैल 2026 | गुरुवार |
| वैशाख पूर्णिमा (बुद्ध पूर्णिमा) | 1 मई 2026 | शुक्रवार |
| प्रथम ज्येष्ठ पूर्णिमा | 31 मई 2026 | रविवार |
| द्वितीय ज्येष्ठ पूर्णिमा | 29 जून 2026 | सोमवार |
| आषाढ़ पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा) | 29 जुलाई 2026 | बुधवार |
| श्रावण पूर्णिमा (रक्षाबंधन) | 28 अगस्त 2026 | शुक्रवार |
| भाद्रपद पूर्णिमा | 26 सितंबर 2026 | शनिवार |
| आश्विन पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) | 26 अक्टूबर 2026 | सोमवार |
| कार्तिक पूर्णिमा | 24 नवंबर 2026 | मंगलवार |
| मार्गशीर्ष पूर्णिमा | 23 दिसंबर 2026 | बुधवार |
पूर्णिमा पर स्नान और दान का महत्व
पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों विशेषकर गंगा जी में स्नान करना पुण्यदायी होता है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन जल में दिव्य ऊर्जा अधिक सक्रिय होती है, जो मन, शरीर और आत्मा के दोषों का निवारण करती है। इस दिन किया गया दान-पुण्य भी अत्यंत फलदायी माना गया है। कहते हैं कि इस तिथि पर विधिवत पूजा-अर्चना करने से देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है। यह दिन आध्यात्मिक साधना और आंतरिक शांति प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम माना गया है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)