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सावन महीने में भगवान शिव ही नहीं रामजी की भी होती है पूजा, जानें कैसे करना हैं प्रसन्न

सावन माह का आरंभ इसी माह से होने जा रहा है। ऐसे में यह जान लें कि इस दौरान भगवान शिव ही नहीं बल्कि श्रीराम की भी पूजा करने का विधान है।

ram- India TV Hindi Image Source : FILE PHOTO श्री राम

सावन माह में भगवान शिव को विशेष पूजा किए जाने का विधान है। मान्यता है कि इसी माह में मां पार्वती ने भगवान शिव को कड़ी तपस्या के बाद पति रूप में प्राप्त किया था। इस कारण सावन में मां पार्वती और भोलेनाथ की विशेष पूजा की जाती है। भगवान शिव के अलावा, सावन में भगवान राम की भी पूजा करने का विधान है। माना जाता है कि सावन में जितनी भगवान शिव की पूजा का महत्व है, उतना ही महत्व श्री राम के पूजा को लेकर भी है। सावन में अक्सर लोग आपको श्री रामचरितमानस का पाठ करते हुए मिल जाएंगे। मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

क्यों करना है श्री रामचरितमानस का पाठ

जानकार हैरान होंगे कि श्री रामचरितमानस से भगवान राम हीं नहीं भगवान शिव भी प्रसन्न होते हैं। मान्यता है कि भगवान राम की पूजा बिना शिव पूजा के अधूरी रहता है और ऐसे ही शिव पूजा भी श्री राम पूजा के बिना अधूरी मानी गई है। यही कारण है कि रामेश्वरम में शिवलिंग पर जल चढ़ाने मात्र जातक भगवान शिव का प्रिय बन जाता है। रामेश्वरम को 12 ज्योतिर्लिंगों में सर्वोपरि माना गया है कारण है कि इस शिवलिंग की स्थापना स्वयं भगवान राम ने की है। ऐसे में जो वक्ति निष्काम भाव से रामेश्वर प्रभु के दर्शन करता है या जल आदि अर्पित करता है तो उसे भगवान शिव समेत श्रीराम की कृपा भी प्राप्त होती है।

कैसे करना है प्रसन्न?

मान्यता है कि सावन में 30 दिनों तक श्रीरामचरितमानस या वाल्मिकी रामायण का पाठ करने वाले जातक पर भगवान की कृपा बरसती है। मुख्य रूप से दक्षिण भारत में लोग रामायण का पाठ करते हैं। ऐसे में अगर आपको किसी विशेष मनोकामना के साथ रामायण या श्रीरामचरितमानस का पाठ कर रहे हैं तो आपको पहले दिन संकल्प लेना चाहिए। साथ ही रोजाना 1 से 2 घंटे का पाठ करना शुभ माना गया है। माना जाता है कि इससे भगवान शिव और श्रीराम दोनों प्रसन्न होते हैं।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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