Ekadashi Kab Hai 2026: आमलकी एकादशी पर भगवान विष्णु और आंवले के पेड़ की पूजा होती है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार आंवले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास होता है इसलिए इस पेड़ की पूजा से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। लेकिन अब सवाल ये आता है कि अगर घर में या घर के आस-पास आंवले का पेड़ नहीं है तो फिर आमलकी एकादशी की पूजा कैसे की जाएगी। यहां हम आपको इसी बारे में विस्तार से बताएंगे।
आमलकी एकादशी 2026 तिथि व मुहूर्त (Amalaki Ekadashi 2026 Date And Time)
- आमलकी एकादशी - 27 फरवरी 2026, शुक्रवार
- आमलकी एकादशी पारण समय - 06:47 AM से 09:06 AM
- एकादशी तिथि प्रारम्भ - 27 फरवरी 2026 को 12:33 AM बजे
- एकादशी तिथि समाप्त - 27 फरवरी 2026 को 10:32 PM बजे
अगर घर में नहीं है आंवले का पेड़ तो कैसे करें आमलकी एकादशी की पूजा (Amalaki Ekadashi Puja Vidhi)
बहुत से लोगों के घर में आंवले का पेड़ नहीं होता इसलिए चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। आप बिना आंवले के पेड़ के भी आमलकी एकादशी की पूजा संपन्न कर सकते हैं। इसके लिए आपको आंवले की जरूरत होगी। आपको पूजा स्थान पर आंवले का फल रखना है और उसी को वृक्ष का प्रतीक मानकर उसकी पूजा करनी है। आप भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने आंवले का फल अर्पित करें। सबसे पहले भगवान विष्णु की पूजा करें। उन्हें पीले फूल और तुलसी दल अर्पित करें। इसके बाद आंवले के फल की पूजा कर दीपक जलाएं। विष्णु सहस्रनाम या ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें। आमलकी एकादशी की कथा सुनें और भगवान विष्णु की आरती कर पूजा संपन्न करें। इस दिन किसी गरीब, जरुरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को भोजन जरूर कराएं। साथ ही कलश, वस्त्र और आंवला आदि दान करें।
आमलकी एकादशी व्रत का महत्व (Amalaki Ekadashi Ka Mahatva)
धार्मिक मान्यताओं अनुसार आमलकी एकादशी का व्रत करने से सैंकड़ों तीर्थ दर्शन के समान पुण्य प्राप्त होता है। इतना ही नहीं इस व्रत को करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। जो लोग आमलकी एकादशी का व्रत नहीं करते हैं उन्हें भी इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु को आंवला जरूर अर्पित करना चाहिए और स्वयं भी इसका सेवन जरूर करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार आमलकी एकादशी के दिन आंवले का सेवन करना बहुत लाभकारी माना जाता है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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