A
Hindi News धर्म Hanuman Chalisa, Aarti Live: मंगलवार के दिन भगवान हनुमान के मंत्रों और चालीसा का जरूर करें पाठ, हर कष्ट से मिल जाएगी मुक्ति
Live now

Hanuman Chalisa, Aarti Live: मंगलवार के दिन भगवान हनुमान के मंत्रों और चालीसा का जरूर करें पाठ, हर कष्ट से मिल जाएगी मुक्ति

Hanuman Chalisa, Aarti Live: सप्ताह में मंगलवार और शनिवार का दिन भगवान हनुमान को समर्पित है। कहते हैं हनुमान जी की अराधना से जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। अगर आप बजरंगबली की विशेष कृपा पाना चाहते हैं तो उनके मंत्रों और चालीसा का पाठ अवश्य करें।

हनुमान चालीसा और आरती- India TV Hindi Image Source : CANVA हनुमान चालीसा और आरती

Hanuman Chalisa, Aarti Live: प्रभु श्री राम के अनन्य भक्त हनुमान जी को साहस, शक्ति, भक्ति और अनुशासन के सबसे बड़े प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार हनुमान जी भगवान शिव के 11वें रुद्र अवतार हैं। उनकी माता का नाम अंजना हैं और पिता का नाम केसरी है। भगवान हनुमान को बजरंगली, पवनपुत्र, मारुति, केसरीनन्दन, अंजनी सुत...इत्यादि कई नामों से जाना जाता है। लेकिन उनका सबसे पहला नाम मारुति माना जाता है। कहते हैं जो कोई भी सच्चे मन से बजरंगबली हनुमान की भक्ति करता है उसके जीवन के सारे दुखों का अंत हो जाता है। आज मंगलवार है तो ऐसे में आज के दिन हनुमान जी की विशेष कृपा पाने के लिए उनके मंत्रों, चालीसा का पाठ जरूर करें। 

भगवान हनुमान का असली नाम क्या है? (Hanman Ji Ka Asli Naam Kya Hai)

पौराणिक कथाओं अनुसार हनुमान जी का असली नाम यानी जन्म का नाम मारुति है। मारुत वायु का एक नाम है, इसलिए मारुति का अर्थ हुआ वायु का पुत्र। बजरंगली भगवान को हनुमान नाम मिलने के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है। पौराणिक कथा के अनुसार जब मारुति बचपन में सूर्य को फल समझकर निगलने वाले थे, तब देवराज इंद्र ने उन पर अस्त्र से प्रहार किया। इस प्रहार में उनकी हनु (ठुड्डी या जबड़े) टूट गई। संस्कृत में हनु का अर्थ ठुड्डी और मान का अर्थ विशिष्ट होता है। कहते हैं इसी घटना के बाद उनका नाम हनुमान पड़ा।

हनुमान चालीसा इन हिंदी pdf (Hanuman Chalisa Lyrics, Jai Hanuman Gyan Gun Sagar)

श्रीगुरु चरन सरोज रज , निजमन मुकुरु सुधारि।
बरनउं रघुबर बिमल जसु, जो दायक फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

चौपाई

  • जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
  • जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।
  • राम दूत अतुलित बल धामा।
  • अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।
  • महाबीर बिक्रम बजरंगी।
  • कुमति निवार सुमति के संगी।।
  • कंचन बरन बिराज सुबेसा।
  • कानन कुण्डल कुँचित केसा।।
  • हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे।
  • कांधे मूंज जनेउ साजे।।
  • शंकर सुवन केसरी नंदन।
  • तेज प्रताप महा जग वंदन।।
  • बिद्यावान गुनी अति चातुर।
  • राम काज करिबे को आतुर।।
  • प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
  • राम लखन सीता मन बसिया।।
  • सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
  • बिकट रूप धरि लंक जरावा।।
  • भीम रूप धरि असुर संहारे।
  • रामचन्द्र के काज संवारे।।
  • लाय सजीवन लखन जियाये।
  • श्री रघुबीर हरषि उर लाये।।
  • रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
  • तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।
  • सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
  • अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं।।
  • सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
  • नारद सारद सहित अहीसा।।
  • जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
  • कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।
  • तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
  • राम मिलाय राज पद दीन्हा।।
  • तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
  • लंकेश्वर भए सब जग जाना।।
  • जुग सहस्र जोजन पर भानु।
  • लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।
  • प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
  • जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।
  • दुर्गम काज जगत के जेते।
  • सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।
  • राम दुआरे तुम रखवारे।
  • होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।
  • सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
  • तुम रच्छक काहू को डर ना।।
  • आपन तेज सम्हारो आपै।
  • तीनों लोक हांक तें कांपै।।
  • भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
  • महाबीर जब नाम सुनावै।।
  • नासै रोग हरे सब पीरा।
  • जपत निरन्तर हनुमत बीरा।।
  • संकट तें हनुमान छुड़ावै।
  • मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।
  • सब पर राम तपस्वी राजा।
  • तिन के काज सकल तुम साजा।।
  • और मनोरथ जो कोई लावै।
  • सोई अमित जीवन फल पावै।।
  • चारों जुग परताप तुम्हारा।
  • है परसिद्ध जगत उजियारा।।
  • साधु संत के तुम रखवारे।।
  • असुर निकन्दन राम दुलारे।।
  • अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता।
  • अस बर दीन जानकी माता।।
  • राम रसायन तुम्हरे पासा।
  • सदा रहो रघुपति के दासा।।
  • तुह्मरे भजन राम को पावै।
  • जनम जनम के दुख बिसरावै।।
  • अंत काल रघुबर पुर जाई।
  • जहां जन्म हरिभक्त कहाई।।
  • और देवता चित्त न धरई।
  • हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।
  • सङ्कट कटै मिटै सब पीरा।
  • जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।
  • जय जय जय हनुमान गोसाईं।
  • कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।
  • जो सत बार पाठ कर कोई।
  • छूटहि बन्दि महा सुख होई।।
  • जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
  • होय सिद्धि साखी गौरीसा।।
  • तुलसीदास सदा हरि चेरा।
  • कीजै नाथ हृदय महं डेरा।।

दोहा

पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

Hanuman Chalisa PDF Download

Live updates : Hanuman Chalisa, Aarti Live: मंगलवार के दिन भगवान हनुमान के मंत्रों और चालीसा का जरूर करें पाठ, हर कष्ट से मिल जाएगी मुक्ति

  • 10:35 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Hanuman Ji Bhajan: हनुमान जी का भजन

    दुनिया चले ना श्री राम के बिना
    दुनिया चले ना श्री राम के बिना, राम जी चले ना हनुमान के बिना ।

    जब से रामायण पढ़ ली है, एक बात मैंने समझ ली है,
    रावण मरे ना श्री राम के बिना, लंका जले ना हनुमान के बिना ॥

    लक्ष्मण का बचना मुश्किल था, कौन बूटी लाने के काबिल था,
    लक्ष्मण बचे ना श्री राम के बिना, बूटी मिले ना हनुमान के बिना ॥

    सीता हरण की कहानी सुनो, ‘बनवारी’ मेरी जुबानी सुनो,
    वापिस मिले ना श्री राम के बिना, पता चले ना हनुमान के बिना ॥

    बैठे सिंघासन पे श्री राम जी, चरणों में बैठे हैं हनुमान जी,
    मुक्ति मिले ना श्री राम के बिना, भक्ति मिले ना हनुमान के बिना ॥

  • 9:33 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa Lyrics)

    • श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि।
    • बरनउं रघुबर विमल जसु, जो दायकु फल चारि॥
    • बुद्धिहीन तनु जानिकै, सुमिरौं पवन-कुमार।
    • बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार॥

    हनुमान चालीसा चौपाई

    • जय हनुमान ज्ञान गुण सागर।
    • जय कपीस तिहुं लोक उजागर॥
    • राम दूत अतुलित बल धामा।
    • अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥
    • महावीर विक्रम बजरंगी।
    • कुमति निवार सुमति के संगी॥
    • कंचन बरन बिराज सुबेसा।
    • कानन कुण्डल कुंचित केसा॥
    • हाथ वज्र औ ध्वजा बिराजै।
    • काँधे मूँज जनेऊ साजै॥
    • शंकर सुवन केसरीनन्दन।
    • तेज प्रताप महा जग वन्दन॥
    • विद्यावान गुणी अति चातुर।
    • राम काज करिबे को आतुर॥
    • प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
    • राम लखन सीता मन बसिया॥
    • सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
    • विकट रुप धरि लंक जरावा॥
    • भीम रूप धरि असुर संहारे।
    • रामचन्द्र के काज संवारे॥
    • लाय सजीवन लखन जियाये।
    • श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥
    • रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
    • तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥
    • सहस बदन तुम्हरो यश गावैं।
    • अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥
    • सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
    • नारद सारद सहित अहीसा॥
    • जम कुबेर दिकपाल जहाँ ते।
    • कवि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥
    • तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
    • राम मिलाय राज पद दीन्हा॥
    • तुम्हरो मन्त्र विभीषन माना।
    • लंकेश्वर भये सब जग जाना॥
    • जुग सहस्त्र जोजन पर भानू।
    • लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥
    • प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
    • जलधि लांघि गए अचरज नाहीं॥
    • दुर्गम काज जगत के जेते।
    • सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥
    • राम दुआरे तुम रखवारे।
    • होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥
    • सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
    • तुम रक्षक काहू को डरना॥
    • आपन तेज सम्हारो आपै।
    • तीनों लोक हांक ते कांपै॥
    • भूत पिशाच निकट नहिं आवै।
    • महावीर जब नाम सुनावै॥
    • नासै रोग हरै सब पीरा।
    • जपत निरंतर हनुमत बीरा॥
    • संकट ते हनुमान छुड़ावै।
    • मन क्रम वचन ध्यान जो लावै॥
    • सब पर राम तपस्वी राजा।
    • तिनके काज सकल तुम साजा॥
    • और मनोरथ जो कोई लावै।
    • सोइ अमित जीवन फल पावै॥
    • चारों जुग परताप तुम्हारा।
    • है परसिद्ध जगत उजियारा॥
    • साधु सन्त के तुम रखवारे।
    • असुर निकन्दन राम दुलारे॥
    • अष्ट सिद्धि नवनिधि के दाता।
    • अस बर दीन जानकी माता॥
    • राम रसायन तुम्हरे पासा।
    • सदा रहो रघुपति के दासा॥
    • तुम्हरे भजन राम को पावै।
    • जनम जनम के दुख बिसरावै॥
    • अंतकाल रघुबर पुर जाई।
    • जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥
    • और देवता चित्त न धरई।
    • हनुमत सेई सर्व सुख करई॥
    • संकट कटै मिटै सब पीरा।
    • जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥
    • जय जय जय हनुमान गोसाई।
    • कृपा करहु गुरुदेव की नाई॥
    • जो शत बार पाठ कर कोई।
    • छूटहि बंदि महा सुख होई॥
    • जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
    • होय सिद्धि साखी गौरीसा॥
    • तुलसीदास सदा हरि चेरा।
    • कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥

    हनुमान चालीसा दोहा

    • पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
    • राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥
  • 8:50 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    भगवान हनुमान को प्रिय है सिंदूर और चमेली का तेल

    मंगलवार के दिन मंदिर जाकर हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएं। सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाने से बजरंगबली अत्यंत प्रसन्न होते हैं। सिंदूर अर्पित करने से हनुमान जी के साथ प्रभु राम की भी अपार कृपा प्राप्त होती है।

  • 8:27 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Hanuman Ji Ke Mantra: हनुमान जी के मंत्र

    1. अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहम्

    दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम् ।

    सकलगुणनिधानं वानराणामधीशम्

    रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि।।

    2. ॐ ऐं ह्रीं हनुमते श्री रामदूताय नमः

    3. ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय विश्वरूपाय अमितविक्रमाय

    प्रकट-पराक्रमाय महाबलाय सूर्यकोटिसमप्रभाय रामदूताय स्वाहा।

  • 7:58 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Hanuman Ji Ke 12 Naam: श्री हनुमान जी के द्वादश नाम

    1. श्री हनुमते नमः 

    2. श्री अंजनिसुताय नमः 

    3. श्री वायुपुत्राय नमः 

    4. श्री महाबलाय नमः 

    5. श्री रामेष्टाय नमः 

    6. श्री फाल्गुण सखाये नमः 

    7. श्री पिंगाक्षे नमः 

    8. श्री अमितविक्रमे नमः 

    9. श्री उदधि क्रमणे नमः 

    10. श्री सीता शोक विनाशने नमः 

    11. श्री लक्ष्मण प्राणदात्रे नमः 

    12. श्री दशग्रीव दर्पहा नमः

  • 7:43 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Hanuman Ji Ki Aarti: आरती श्री हनुमानजी

    आरती कीजै हनुमान लला की।दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

    जाके बल से गिरिवर कांपे।रोग दोष जाके निकट न झांके॥

    अंजनि पुत्र महा बलदाई।सन्तन के प्रभु सदा सहाई॥

    दे बीरा रघुनाथ पठाए।लंका जारि सिया सुधि लाए॥

    लंका सो कोट समुद्र-सी खाई।जात पवनसुत बार न लाई॥

    लंका जारि असुर संहारे।सियारामजी के काज सवारे॥

    लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।आनि संजीवन प्राण उबारे॥

    पैठि पाताल तोरि जम-कारे।अहिरावण की भुजा उखारे॥

    बाएं भुजा असुरदल मारे।दाहिने भुजा संतजन तारे॥

    सुर नर मुनि आरती उतारें।जय जय जय हनुमान उचारें॥

    कंचन थार कपूर लौ छाई।आरती करत अंजना माई॥

    जो हनुमानजी की आरती गावे।बसि बैकुण्ठ परम पद पावे॥

  • 7:23 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Shri Bajrang Baan: श्री बजरंग बाण

    ॥ दोहा ॥

    निश्चय प्रेम प्रतीति ते,बिनय करै सनमान।

    तेहि के कारज सकल शुभ,सिद्ध करै हनुमान॥

    ॥ चौपाई ॥
    जय हनुमन्त सन्त हितकारी।सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी॥

    जन के काज विलम्ब न कीजै।आतुर दौरि महा सुख दीजै॥

    जैसे कूदि सिन्धु वहि पारा।सुरसा बदन पैठि बिस्तारा॥

    आगे जाय लंकिनी रोका।मारेहु लात गई सुर लोका॥

    जाय विभीषण को सुख दीन्हा।सीता निरखि परम पद लीन्हा॥

    बाग उजारि सिन्धु महं बोरा।अति आतुर यम कातर तोरा॥

    अक्षय कुमार मारि संहारा।लूम लपेटि लंक को जारा॥

    लाह समान लंक जरि गई।जय जय धुनि सुर पुर महं भई॥

    अब विलम्ब केहि कारण स्वामी।कृपा करहुं उर अन्तर्यामी॥

    जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता।आतुर होइ दुःख करहुं निपाता॥

    जय गिरिधर जय जय सुख सागर।सुर समूह समरथ भटनागर॥

    ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमन्त हठीले।बैरिहिं मारू बज्र की कीले॥

    गदा बज्र लै बैरिहिं मारो।महाराज प्रभु दास उबारो॥

    ॐकार हुंकार महाप्रभु धावो।बज्र गदा हनु विलम्ब न लावो॥

    ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमन्त कपीसा।ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर शीशा॥

    सत्य होउ हरि शपथ पायके।रामदूत धरु मारु धाय के॥

    जय जय जय हनुमन्त अगाधा।दुःख पावत जन केहि अपराधा॥

    पूजा जप तप नेम अचारा।नहिं जानत कछु दास तुम्हारा॥

    वन उपवन मग गिरि गृह माहीं।तुमरे बल हम डरपत नाहीं॥

    पाय परौं कर जोरि मनावों।यह अवसर अब केहि गोहरावों॥

    जय अंजनि कुमार बलवन्ता।शंकर सुवन धीर हनुमन्ता॥

    बदन कराल काल कुल घालक।राम सहाय सदा प्रतिपालक॥

    भूत प्रेत पिशाच निशाचर।अग्नि बैताल काल मारीमर॥

    इन्हें मारु तोहि शपथ राम की।राखु नाथ मरजाद नाम की॥

    जनकसुता हरि दास कहावो।ताकी शपथ विलम्ब न लावो॥

    जय जय जय धुनि होत अकाशा।सुमिरत होत दुसह दुःख नाशा॥

    चरण शरण करि जोरि मनावों।यहि अवसर अब केहि गोहरावों॥

    उठु उठु चलु तोहिं राम दुहाई।पांय परौं कर जोरि मनाई॥

    ॐ चं चं चं चं चपल चलन्ता।ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमन्ता॥

    ॐ हं हं हांक देत कपि चञ्चल।ॐ सं सं सहम पराने खल दल॥

    अपने जन को तुरत उबारो।सुमिरत होय आनन्द हमारो॥

    यहि बजरंग बाण जेहि मारो।ताहि कहो फिर कौन उबारो॥

    पाठ करै बजरंग बाण की।हनुमत रक्षा करै प्राण की॥

    यह बजरंग बाण जो जापै।तेहि ते भूत प्रेत सब कांपे॥

    धूप देय अरु जपै हमेशा।ताके तन नहिं रहे कलेशा॥

    ॥ दोहा ॥
    प्रेम प्रतीतिहिं कपि भजै,सदा धरै उर ध्यान।

    तेहि के कारज सकल शुभ,सिद्ध करै हनुमान॥

  • 7:11 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    hanuman ashtak lyrics: हनुमानाष्टक

    • बाल समय रवि भक्ष लियो तब,
    • तीनहुं लोक भयो अंधियारों।
    • ताहि सों त्रास भयो जग को,
    • यह संकट काहु सों जात न टारो।
    • देवन आनि करी बिनती तब,
    • छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो।
    • को नहीं जानत है जग में कपि,
    • संकटमोचन नाम तिहारो ॥ 1 ॥
    • बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि,
    • जात महाप्रभु पंथ निहारो।
    • चौंकि महामुनि साप दियो तब,
    • चाहिए कौन बिचार बिचारो।
    • कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु,
    • सो तुम दास के सोक निवारो ॥ 2 ॥ को नहीं जानत है ...
    • अंगद के संग लेन गए सिय,
    • खोज कपीस यह बैन उचारो।
    • जीवत ना बचिहौं हम सो जु,
    • बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो।
    • हेरी थके तट सिन्धु सबे तब,
    • लाए सिया-सुधि प्राण उबारो ॥ 3 ॥ को नहीं जानत है ...
    • रावण त्रास दई सिय को सब,
    • राक्षसी सों कही सोक निवारो।
    • ताहि समय हनुमान महाप्रभु,
    • जाए महा रजनीचर मारो।
    • चाहत सीय असोक सों आगि सु,
    • दै प्रभु मुद्रिका सोक निवारो ॥ 4 ॥ को नहीं जानत है ...
    • बान लग्यो उर लछिमन के तब,
    • प्राण तजे सुत रावन मारो।
    • लै गृह बैद्य सुषेन समेत,
    • तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो।
    • आनि सजीवन हाथ दिए तब,
    • लछिमन के तुम प्रान उबारो ॥ 5 ॥ को नहीं जानत है ...
    • रावन जुध अजान कियो तब,
    • नाग कि फाँस सबै सिर डारो।
    • श्रीरघुनाथ समेत सबै दल,
    • मोह भयो यह संकट भारो I
    • आनि खगेस तबै हनुमान जु,
    • बंधन काटि सुत्रास निवारो ॥ 6 ॥ को नहीं जानत है ...
    • बंधु समेत जबै अहिरावन,
    • लै रघुनाथ पताल सिधारो।
    • देवहीं पूजि भलि विधि सों बलि,
    • देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो।
    • जाये सहाए भयो तब ही,
    • अहिरावन सैन्य समेत संहारो ॥ 7 ॥ को नहीं जानत है ...
    • काज किये बड़ देवन के तुम,
    • बीर महाप्रभु देखि बिचारो।
    • कौन सो संकट मोर गरीब को,
    • जो तुमसे नहिं जात है टारो।
    • बेगि हरो हनुमान महाप्रभु,
    • जो कछु संकट होए हमारो ॥ 8 ॥ को नहीं जानत है ...
    • ॥ दोहा ॥
    • लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर।
    • वज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर ॥