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Maha Shivaratri 2026: महाशिवरात्रि पूजा का मुहूर्त, विधि, कथा और महत्व

Maha Shivaratri 2026 Date Live Updates: हिंदू पंचांग अनुसार महा शिवरात्रि का पावन पर्व फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। ये भगवान भोलेनाथ की अराधना का सबसे बड़ा दिन होता है। चलिए आपको बताते हैं इस साल महाशिवरात्रि कब है और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।

maha shivratri 2026- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV महा शिवरात्रि 2026

Maha Shivaratri 2026 Date Live Updates: भगवान भोलेनाथ की आराधना का सबसे बड़ा पर्व महाशिवरात्रि हर शिव भक्त के लिए खास होता है। इस दिन श्रद्धालु सच्चे मन से व्रत रखते हैं और भोलेनाथ की विधि विधान पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यताओं अनुसार ये शिवरात्रि इसलिए बेहद खास होती है क्योंकि इस दिन महादेव धरती के सभी शिवलिंग में वास करते हैं। यही कारण है कि इस दिन शिवलिंग का अभिषेक और पूजन जरूर किया जाता है जिससे भगवान की कृपा प्राप्त की जा सके। चलिए आपको बताते हैं इस साल महा शिवरात्रि किस तारीख को मनाई जाएगी और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।

महा शिवरात्रि 2026 तारीख (Maha Shivratri 2026 Date)

पंचांग अनुसार महा शिवरात्रि की पावन तिथि 15 फरवरी 2026 की शाम 05:04 बजे से शुरू होकर 16 फरवरी 2026 की शाम 05:34 बजे तक रहेगी। चूंकि 15 फरवरी 2026 की रात में चतुर्दशी तिथि मौजूद रहेगी इसलिए महा शिवरात्रि का पावन पर्व 15 फरवरी 2026, रविवार को मनाया जाएगा।

महा शिवरात्रि 2026 पूजा मुहूर्त (Maha Shivratri 2026 Puja Muhurat)

महा शिवरात्रि की पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त 15 फरवरी 2026 की देर रात 12 बजकर 9 मिनट से रात 1 बजकर 1 मिनट तक रहेगा। ये निशिता काल है जो शिवरात्रि पूजन के लिए सबसे शुभ समय माना जाता है। इसके अलावा कई लोग रात्रि के चारों प्रहर में शिव पूजा करते है इसलिए आगे हम आपको बताएंगे चार प्रहर की पूजा का सही समय।

Live updates : Maha Shivaratri 2026 Date Live Updates: महा शिवरात्रि किस तारीख को है 15 या 16 फरवरी? जानें सही डेट और पूजा का शुभ मुहूर्त

  • 11:14 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri Bhajan: महा शिवरात्रि भजन

    गंगा नाहया पर्वत को पाया तू है कहा
    ये दुनिया छोड़ी मैने मन सजाया तू है कहा
    तुम डरबदार की राहो में या हो कही शिवलो में
    मेरे साथ ही तुम हो कही फिर क्यू नही निगाहो में
    जब लाउ उठी इस दिल में तो एहसास हुआ
    तुझमे शिवा मुझमे शिवा तन में शिवा मन में शिवा
    ओम नमः शिवाय....

    मान की गहराई में तू था चाओं में तेरी मई चला
    तेरी राहो में ही खोके खुद से ही में आ मिला
    अब ना रही पल की खबर जो तू मिला है इस क़दर
    समा गया तुझमे कही भटका था जो ये बेसबर
    हर ओर से बस एक धुन मैं सुन रहा
    तुझमे शिवा मुझमे शिवा....
    भक्तिभारत लिरिक्स

    सत्या-असत्या में उलझी दुनिया अपने करमो से है परे
    समझे ना क्यू तेरी माया तूने ही हर रूप धरे
    है शोर में खामोशी तू खामोशी मेी एक नाद है
    संगीत है जीवन का तू अनसुना एक राग है
    आँख मूंडे भीतर ही वो है बसा
    तुझमे शिवा मुझमे शिवा....

  • 10:30 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri 2026: महाशिवरात्रि पर भगवान शिव को अक्षत अर्पित करते समय बरतें सावधानी

    शिवलिंग पर चढ़ाए जाने वाले अक्षत (चावल) साबुत और साफ होने चाहिए। टूटे हुए या खंडित चावल अर्पित करने से पूजा अधूरी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग पूजन में इन नियमों का पालन करते हुए की गई पूजा से मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर विधिपूर्वक पूजा करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

  • 10:17 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    महाशिवरात्रि व्रत विधि (Maha Shivratri Vrat Vidhi)

    • महाशिवरात्रि पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।  
    • फिर भगवान शिव की विधि विधान पूजा करें।
    • दिन भर व्रत रहें और अन्न का सेवन बिल्कुल भी न करें।
    • इस दिन फलाहारी भोजन का सेवन कर सकते हैं।
    • शाम में फिर से पूजा करें और महाशिवरात्रि की कथा पढ़ें या सुनें।
    • रात्रि में जागरण करें और ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करें।
    • इस दिन रुद्राभिषेक जरूर करें।
    • फिर अगले दिन सुबह 7 बजे के बाद अपना व्रत खोल लें।
  • 9:47 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri 2026: क्या महाशिवरात्रि के दिन मंदिर जाना चाहिए?

    जी हां, महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव के मंदिर जरूर जाना चाहिए और वहां जाकर शिवलिंग का अभिषेक करके उसके समक्ष दीपक भी जरूर जलाना चाहिए।

  • 9:18 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri 2026: बेलपत्र तोड़ते समय रखें इन बातों का ध्यान

    1. बेलपत्र तोड़ते समय पेड़ से कभी भी पूरी टहनी के साथ बेलपत्र न तोड़ें। एक-एक पत्ता तोड़ना शुभ माना जाता है। 
    2. बेलपत्र के पेड़ से पत्ते तोड़ने से पहले भगवान शिव का स्मरण जरूर करना चाहिए। 
    3. बेलपत्र लेने के बाद वृक्ष को नमस्कार जरूर अवश्य करें।
    4. शिवजी को कम से कम एक बेलपत्र अर्पित किया जा सकता है। यदि संभव हो तो 11 या 21 की संख्या में भी चढ़ाया जा सकता है।
  • 8:45 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri Vrat In Period: क्या पीरियड में महाशिवरात्रि व्रत रख सकते हैं?

    पीरियड में महाशिवरात्रि व्रत नहीं रखना चाहिए। लेकिन अगर आपको व्रत वाले दिन पीरियड आ गए हैं तो आप इस व्रत को बीच में न छोड़ें। इसे बिना पूजा किए ही संपन्न करें। 

  • 8:23 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri 2026: महाशिवरात्रि के दिन न तोड़ें बेलपत्र

    शास्त्रों के अनुसार सोमवार और चतुर्दशी तिथि को बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए। महाशिवरात्रि स्वयं चतुर्दशी को पड़ती है, इसलिए इस दिन बेलपत्र तोड़ना वर्जित माना गया है। आवश्यकता होने पर बेलपत्र एक दिन पहले तोड़कर रख लेना चाहिए। मान्यता है कि इन दिनों बेलपत्र तोड़ने से भगवान शिव अप्रसन्न हो सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नियमों का पालन करते हुए बेलपत्र अर्पित करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

  • 7:47 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri 2026: क्या महाशिवरात्रि व्रत के दिन बाल धो सकते हैं?

    जी हां, महाशिवरात्रि व्रत के दिन बाल धो सकते हैं। लेकिन नाखून नहीं काट सकते हैं। इसके अलावा बाल कटवा नहीं सकते हैं।

  • 7:26 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri Vrat 2026: महाशिवरात्रि का व्रत कब से कब तक रखा जाएगा?

    महाशिवरात्रि व्रत की शुरुआत 15 फरवरी 2026 की सुबह 5 बजकर 17 मिनट से होगी और इसका समापन 16 फरवरी 2026 की सुबह 06:59 बजे के बाद किया जाएगा। व्रत वाले दिन अन्न का सेवन नहीं करना है। सिर्फ फलाहारी भोजन करना है। संंभव हो तो इस दिन रात्रि जागरण जरूर करें।

  • 6:29 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri 2026: महाशिवरात्रि की पूजा में न करें ये गलती

    शिवलिंग की पूजा में शंख बजाना या शंख से जल अर्पित करना वर्जित माना गया है। पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव ने शंखचूड़ नामक दैत्य का वध किया था, जिससे शंख की उत्पत्ति जुड़ी मानी जाती है। इसलिए शिवलिंग पर जल या दूध सीधे पात्र से ही अर्पित करना चाहिए।

  • 11:57 PM (IST) Posted by Arti Azad

    शिवलिंग पूजा का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका

    • पूजा शुरू करने से पहले अपनी आंखें दोनों आंखों को बंद करके शांत चित्त होकर बैठ जाए। अब जीवन में शांति, बाधाओं की निवारण और आध्यात्मिक विकास के लिए भगवान शिव से प्रार्थना करें।
    • इसके बाद आंखें खोलें और "ओम नमः शिवाय" का जाप करते हुए शिवलिंग पर शुद्ध जल डालें।  सबसे पहले शिवलिंग के दाहिने और बाएं स्थान पर स्थित गणेश जी और कार्तिकेय पर जल अर्पित करना चाहिए। फिर शिवलिंग का गोल घेरा जिसमें शिवलिंग स्थित है और जो मां पार्वती को समर्पित है, वहां जल चढ़ाएं। फिर मध्य भाग जो शिव और पार्वती की पुत्री अशोक सुंदरी का स्थान है, वहां जल अर्पित करें और फिर शिवलिंग पर जल चढ़ाना चाहिए।
    • अब दूध, दही, शहद, घी और चीनी को एक -एक करके शिव मंत्रों का जाप करते हुए धीरे-धीरे शिवलिंग पर अर्पित करें।
    • सभी अर्पित वस्तुओं को अर्पित करने के बाद दोबारा शिवलिंग को शुद्ध जल से स्नान कराएं।
    • इसके बाद मंत्रों का जाप करते हुए शिव जी को बिल्वपत्र अर्पित करें, जो उन्हें अत्यंत प्रिय माने जाते हैं। बेलपत्र साफ और साबुत होने चाहिए।  
    • अब शिवलिंग को गीले चंदन का तिलक लगाएं और सफेद फूल अर्पित करें।
    • इसके बाद मंगल की कामना करते हुए शिव जी से प्रार्थना करें और धूप-दीप से आरती के साथ अपना अनुष्ठान पूर्ण करें। 
  • 11:53 PM (IST) Posted by Arti Azad

    महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पूजन

     

    महाशिवरात्रि पर शिवलिंग की पूजा से पहले उसका अभिषेक किया जाता है। शिवलिंग अभिषेक वह विधि होती है, जिसमें मंत्रोच्चार करते हुए शिवलिंग पर जल, दूध, शहद, दही से स्नान कराया जाता है। मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दौरान ब्रह्मांडीय ऊर्जाएं अत्यधिक सक्रिय हो जाती है, ऐसे में यह अनुष्ठान और भी अधिक शक्तिशाली हो जाता है।  महाशिवरात्रि पर शिवलिंग अभिषेक एक रस्म से कहीं ज्यादा है, यह आत्म शुद्धि, समर्पण और रूपांतरण की आध्यात्मिक प्रक्रिया है। इसके जरिए आप स्वयं को शिव की शक्तिशाली ऊर्जा से जोड़ते हैं।

  • 11:52 PM (IST) Posted by Arti Azad

    शिव पूजन में शंख का प्रयोग वर्जित

    शिवलिंग की पूजा में शंख बजाना या शंख से जल अर्पित करना पूर्णतः वर्जित है। इसके पीछे पौराणिक मान्यता है कि भगवान शिव ने शंखचूड़ नामक दैत्य का वध किया था और उसके शरीर की अस्थियों से शंख उत्पन्न हुआ। इसी कारण से शिवलिंग पूजा में शंख का प्रयोग नहीं किया जाता। शिवलिंग पर जल, दूध, दही या अन्य पवित्र द्रव सीधे पात्र से अर्पित करना ही शास्त्रानुसार सही माना गया है।

     

  • 11:46 PM (IST) Posted by Arti Azad

    धतूरे और मदार के फूल क्यों है पसंद

    धतूरे और आक यानी मदार के फूलों की माला महादेव को बहुत प्रिय है. विष को देवताओं और राक्षसों ने जब ग्रहण नहीं किया तो संसार को विनाश से बचाने के लिए शिवजी ने उस विष को पीकर अपने गले में रोक लिया. संसार जिसे जहर मानकर नहीं अपनाता है, शिव उसे औषधि के रूप में स्वीकार करते हैं. वह बताते हैं कि कोई भी वस्तु जहर तब है जब उसका प्रयोग गलत तरीके से किया जाए. 

  • 11:38 PM (IST) Posted by Arti Azad

    शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करते समय याद रखें ये बातें

    शिवलिंग पर हमेशा तीन पत्तियों वाला बेलपत्र ही अर्पित करना चाहिए। अगर 5 पत्तियों वाला बेलपत्र मिल जाए तो सोने पर सुहागा होगा। शिवलिंग पर साफ सुथरे, बगैर कटे-फटे और बगैर दाग धब्बों वाले बेलपत्र ही चढ़ाएं। बेलपत्र अर्पित करने से पहले अच्छी तरह से धोकर साफ कर लें। कोशिश करें की हमेशा ताजे तोड़े हुए बेलपत्र ही पूजा में उपयोग करें। भूलकर भी मुरझाए और सूखे हुए बेलपत्र का उपयोग नहीं करना चाहिए। शिवलिंग पर चढ़ाने से पहले बेलपत्र पर चंदन से ओम या श्रीराम लिखें। बेलपत्र शिवलिंग पर इस तरह चढ़ाएं कि उसका चिकना हिस्सा शिवलिंग को स्पर्श करें और शिवलिंग पर बिल्वपत्र चढ़ाते समय ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप 

  • 11:26 PM (IST) Posted by Arti Azad

    सोमवार को क्यों है बेलपत्र तोड़ने की मनाही?

     

    सोमवार भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित दिन है, लेकिन इसी दिन बेलपत्र तोड़ना निषिद्ध बताया गया है। मान्यता है कि सोमवार के दिन बेलपत्र में माता पार्वती का वास होता है। ऐसे में इस दिन पत्ते तोड़ना अनादर माना जाता है।

  • 11:09 PM (IST) Posted by Arti Azad

    महाशिवरात्रि के दिन न तोड़ें बेलपत्र

     

    शास्त्रों के अनुसार सोमवार और चतुर्दशी तिथि को बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए। महाशिवरात्रि स्वयं चतुर्दशी को पड़ती है, इसलिए इस दिन बेलपत्र तोड़ना वर्जित माना गया है। आवश्यकता होने पर बेलपत्र एक दिन पहले तोड़कर रख लेना चाहिए। मान्यता है कि इन दिनों बेलपत्र तोड़ने से भगवान शिव अप्रसन्न हो सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नियमों का पालन करते हुए बेलपत्र अर्पित करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

  • 10:28 PM (IST) Posted by Arti Azad

    पहली बार महाशिवरात्रि व्रत रखने वालों के लिए नियम

    महाशिवरात्रि में रात्रि जागरण का विशेष महत्व है। अगर किसी कारणवश आपके लिए पूरी रात जागना संभव न हो, तो कम से कम कुछ समय भजन, शिव चालीसा या मंत्र जाप अवश्य करें। इससे मन एकाग्र और शांत रहता है।

    व्रत केवल भोजन से परहेज नहीं है। इस दिन क्रोध, झूठ, कटु वचन और नकारात्मक सोच से दूर रहें। मन को शांत और सकारात्मक रखें। सच्ची भक्ति और अच्छा व्यवहार ही भगवान शिव को प्रिय है।

    अगर किसी को बीमारी, कमजोरी या डॉक्टर की सलाह हो, तो व्रत अपनी क्षमता के अनुसार रखें। भगवान शिव भावना देखते हैं, कठोर तप नहीं। व्रत खोलते समय अगले दिन स्नान कर पूजा करें और हल्का भोजन लें। अचानक भारी भोजन करने से बचें।

    नियमों से ज्यादा महत्वपूर्ण श्रद्धा और विश्वास है। सच्चे मन से किया गया छोटा सा व्रत भी भगवान शिव को प्रसन्न करता है और जीवन में सुख-शांति का मार्ग प्रशस्त करता है।

     

  • 9:53 PM (IST) Posted by Arti Azad

    हल्दी और श्रृंगार सामग्री से परहेज

    भगवान शिव वैराग्य और तप के प्रतीक हैं। इसी कारण शिवलिंग पर हल्दी, कुमकुम, सिंदूर और अन्य श्रृंगार सामग्री चढ़ाना उचित नहीं माना जाता। हालांकि, यदि माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित हो, तो वहां सुहाग सामग्री अर्पित की जा सकती है।

  • 8:57 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    शिवलिंग का अभिषेक करते समय सबसे पहले क्या चढ़ाना चाहिए?

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग का अभिषेक सबसे पहले गंगाजल या फिर गंगाजल मिश्रित जल से करना चाहिए। इसके बाद दूध, दही, घी, बेलपत्र, भांग, धतूरा आदि से आप शिवलिंग का अभिषेक कर सकते हैं। 

  • 8:19 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि के दिन इन उपायों से वैवाहिक जीवन में आएंगी खुशियां

    • अगर आप अपने रिश्ते में मिठास बढ़ाना चाहते हैं, तो मां पार्वती को सुहाग की वस्तुएं अर्पित करें। लाल और हरे रंग की चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी और लाल चुनरी चढ़ाना शुभ माना गया है। लाल रंग प्रेम और सौभाग्य का प्रतीक है, जबकि हरा रंग नई शुरुआत और समृद्धि का संकेत देता है।
    • अगर आप अपने रिश्ते में प्रेम और समझ बढ़ाना चाहते हैं, तो मां पार्वती को लाल, पीले या हरे रंग की साड़ी अर्पित करना भी शुभ फलदायी माना गया है।
    • महाशिवरात्रि पर 21 बेलपत्र शिवलिंग पर अर्पित करें। भांग, धतूरा और सफेद पुष्प भी चढ़ाएं। मान्यता है कि इससे प्रेम विवाह की कामना पूरी होती है और दांपत्य जीवन की रुकावटें दूर होती हैं।
  • 7:36 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    महाशिवरात्रि पर इन चीजों को घर लाना बेहद शुभ

    • शिव परिवार की मूर्ति या तस्वीर
    • पारद शिवलिंग
    • बेल का पौधा 
    • तांबे का कलश
    • रुद्राक्ष
  • 6:00 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    Mahashivratri 2026: शिवलिंग पर गलती से भी अर्पित न करें ये चीजें

    • केतकी के फूल शिवलिंग पर अर्पित करना वर्जित।
    • शिवलिंग पर कुमकुम या सिंदूर अर्पित करने से भी बचें। 
    • तुलसी की पत्तियां भी शिवलिंग पर नहीं चढ़ानी चाहिए। 
    • हल्दी को शिवलिंग पर अर्पित करने से भी बचें। 
    • शंख से शिवलिंग से जल न चढ़ाएं। 
  • 5:26 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    Mahashivratri 2026: शिव गायत्री मंत्र, इसका जप करने से पूरी होंगी मनोकामनाएं

    'ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्' यह शिव गायत्री मंत्र है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि पर इसका जप करने से आपकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। कम से कम 108 बार आपको इस मंत्र का जप करना चाहिए। 

  • 4:33 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर शिववास कहां रहेगा?

    महाशिवरात्रि के दिन पर भगवान शिव माता पार्वती के साथ कैलाश पर निवास करते हैं और अपने भक्तों की मनोकामनाओं को पूरा करते हैं। हालांकि महाशिवरात्रि उन दिनों में से एक है जब शिववास देखे बिना भी आप शिव पूजन कर सकते हैं। महाशिवरात्रि को निष्काम पूजा का दिन माना जाता है इसलिए इस दिन शिव पूजन आप बिना शिववास देखे कर सकते हैं। 

  • 3:41 PM (IST) Posted by Naveen Khantwal

    Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि के दिन करें शिव चालीसा का पाठ

    दोहा 

    जय गणेश गिरिजा सुवन,
    मंगल मूल सुजान।
    कहत अयोध्यादास तुम,
    देहु अभय वरदान॥

    चौपाई 

    जय गिरिजा पति दीन दयाला।
    सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥

    भाल चन्द्रमा सोहत नीके।
    कानन कुण्डल नागफनी के॥

    अंग गौर शिर गंग बहाये।
    मुण्डमाल तन क्षार लगाए॥

    वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे।
    छवि को देखि नाग मन मोहे॥

    मैना मातु की हवे दुलारी।
    बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥

    कर त्रिशूल सोहत छवि भारी।
    करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥

    नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे।
    सागर मध्य कमल हैं जैसे॥

    कार्तिक श्याम और गणराऊ।
    या छवि को कहि जात न काऊ॥

    देवन जबहीं जाय पुकारा।
    तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥

    किया उपद्रव तारक भारी।
    देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥

    तुरत षडानन आप पठायउ।
    लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥

    आप जलंधर असुर संहारा।
    सुयश तुम्हार विदित संसारा॥

    त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई।
    सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥

    किया तपहिं भागीरथ भारी।
    पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥

    दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं।
    सेवक स्तुति करत सदाहीं॥

    वेद नाम महिमा तव गाई।
    अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥

    प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला।
    जरत सुरासुर भए विहाला॥

    कीन्ही दया तहं करी सहाई।
    नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥

    पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा।
    जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥

    सहस कमल में हो रहे धारी।
    कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥

    एक कमल प्रभु राखेउ जोई।
    कमल नयन पूजन चहं सोई॥

    कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर।
    भए प्रसन्न दिए इच्छित वर॥

    जय जय जय अनन्त अविनाशी।
    करत कृपा सब के घटवासी॥

    दुष्ट सकल नित मोहि सतावै।
    भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै॥

    त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो।
    येहि अवसर मोहि आन उबारो॥

    लै त्रिशूल शत्रुन को मारो।
    संकट से मोहि आन उबारो॥

    मात-पिता भ्राता सब होई।
    संकट में पूछत नहिं कोई॥

    स्वामी एक है आस तुम्हारी।
    आय हरहु मम संकट भारी॥

    धन निर्धन को देत सदा हीं।
    जो कोई जांचे सो फल पाहीं॥

    अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी।
    क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥

    शंकर हो संकट के नाशन।
    मंगल कारण विघ्न विनाशन॥

    योगी यति मुनि ध्यान लगावैं।
    शारद नारद शीश नवावैं॥

    नमो नमो जय नमः शिवाय।
    सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥

    जो यह पाठ करे मन लाई।
    ता पर होत है शम्भु सहाई॥

    ॠनियां जो कोई हो अधिकारी।
    पाठ करे सो पावन हारी॥

    पुत्र हीन कर इच्छा जोई।
    निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥

    पण्डित त्रयोदशी को लावे।
    ध्यान पूर्वक होम करावे॥

    त्रयोदशी व्रत करै हमेशा।
    ताके तन नहीं रहै कलेशा॥

    धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे।
    शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥

    जन्म जन्म के पाप नसावे।
    अन्त धाम शिवपुर में पावे॥

    कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी।
    जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥

    ॥ दोहा ॥
    नित्त नेम कर प्रातः ही,
    पाठ करौं चालीसा।
    तुम मेरी मनोकामना,
    पूर्ण करो जगदीश॥

    मगसर छठि हेमन्त ॠतु,
    संवत चौसठ जान।
    अस्तुति चालीसा शिवहि,
    पूर्ण कीन कल्याण॥

  • 2:12 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    महाशिवरात्रि के दिन निशिता काल में न सोएं (Maha Shivratri Par Nishita Kaal Mein Kya Kare)

    शास्त्रों में बताया गया है कि निशिता काल में की गई पूजा, मंत्र जाप और ध्यान कई गुना फल देता है। ऐसे में इस समय सोने से साधना का यह दुर्लभ अवसर छूट जाता है, इसलिए भक्तजन इस अवधि में जागरण कर शिव का स्मरण करते हैं। माना जाता है कि इस काल में शिव तत्व की ऊर्जा अधिक सक्रिय रहती है, जिससे मन को शांति, नकारात्मकता से मुक्ति और आत्मिक बल मिलता है।

  • 2:03 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    महा शिवरात्रि 2026 निशिता काल मुहूर्त (Maha Shivratri 2026 Nishita Kaal Time)

    महाशिवरात्रि पर निशिता काल पूजा समय 15 फरवरी 2026 की रात 12 बजकर 9 मिनट से लेकर देर रात 1 बजकर 1 मिनट तक रहेगा। ये शिवरात्रि पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त है। इस दौरान पूरी श्रद्धा से शिव की उपासना करें और उनके मंत्रों का जाप करें। इससे आपको भोलेनाथ की शीघ्र ही कृपा प्राप्त हो जाएगी।

  • 1:23 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri 2026: महाशिवरात्रि पर शिव गायत्री मंत्र के जाप के फायदे

    ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

    यह शिव गायत्री मंत्र है। इसके जाप से बुद्धि और एकाग्रता बेहतर होती है। ये चमत्कारी मंत्र व्यक्ति को सही निर्णय लेने की शक्ति देता है।

  • 12:57 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri 2026: महाशिवरात्रि के दिन क्या उठना जरूरी है?

    धर्म शास्त्रों अनुसार महाशिवरात्रि की पूरी रात भक्तों को भगवान शिव का जागरण और ध्यान करना चाहिए। लेकिन अगर ये संभव न हो तो कम से कम रात के 1 बजे तक जरूर जागना चाहिए और 12 से 1 के बीच भगवान शिव की पूजा भी जरूर करनी चाहिए। 

  • 12:14 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri 2026 Live: महाशिवरात्रि पर 12 शुभ योग

    महाशिवरात्रि पर प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, साध्य, शिव, शुक्ल, शोभन, सर्वार्थसिद्ध, चंद्रमंगल, त्रिग्रही, राज और ध्रुव योग का एक साथ निर्माण हो रहा है। 

  • 11:34 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri Vrat 2026 Date: महाशिवरात्रि व्रत कब से कब तक रखा जाएगा?

    महाशिवरात्रि व्रत 15 फरवरी 2026 को रखा जाएगा और इसका पारण अगले दिन यानी 16 फरवरी 2026 को किया जाएगा। इस व्रत को निर्जला या फलाहारी भोजन का सेवन करके कैसे भी रख सकते हैं।

  • 11:01 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    12 ज्योतिर्लिंग मंत्र (12 Jyotirlinga Mantra)

    1. सोमनाथ - ॐ सोमनाथाय नमः।
    2. मल्लिकार्जुन - ॐ मल्लिकार्जुनाय नमः।
    3. महाकालेश्वर - ॐ महाकालेश्वराय नमः।
    4. ओम्कारेश्वर - ॐ ओम्कारेश्वराय नमः।
    5. वैद्यनाथ - ॐ वैद्यनाथाय नमः।
    6. भीमाशङ्कर - ॐ भीमाशङ्कराय नमः।
    7. रामेश्वर - ॐ रामेश्वराय नमः।
    8. नागेश्वर - ॐ नागेश्वराय नमः।
    9. विश्वनाथ - ॐ विश्वनाथाय नमः।
    10. त्र्यम्बकेश्वर - ॐ त्र्यम्बकेश्वराय नमः।
    11. केदारनाथ - ॐ केदारनाथाय नमः।
    12. घृष्णेश्वर - ॐ घृष्णेश्वराय नमः।
  • 10:40 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri 2026: 12 ज्योतिर्लिंग स्तुति

    सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
    उज्जयिन्यां महाकालमोंकारं ममलेश्वरम् ॥1॥
    परल्यां वैजनाथं च डाकियन्यां भीमशंकरम्।
    सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने ॥2॥
    वारणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमी तटे।
    हिमालये तु केदारं ध्रुष्णेशं च शिवालये ॥3॥
    एतानि ज्योतिर्लिंगानि सायं प्रातः पठेन्नरः।
    सप्तजन्मकृतं पापं स्मरेण विनश्यति ॥4॥

  • 10:06 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri 2026: महाशिवरात्रि की पूजा में धतूरा जरूर करें शामिल

    धतूरे का फूल और फल भगवान शंकर का बेहद प्रिय माना जाता है। ऐसे में महाशिवरात्रि पर शिव पूजन करते समय भोलेनाथ को धतूरा अवश्य अर्पित करें। इस पावन दिन के लिए पूजन सामग्री में धतूरे का फूल और फल अर्पित करने से महादेव आपकी सभी मनोकामनाएं वश्य ही पूरी करेंगे।

     

  • 9:19 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri 2026 Live: महाशिवरात्रि पर मिट्टी के शिवलिंग की पूजा करने के लाभ

    मिट्टी के शिवलिंग का अभिषेक करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। महाशिवरात्रि में अलग-अलग तरह के पूजे जाने वाले शिवलिंग में पार्थिव शिवलिंग की पूजा सबसे उत्तम मानी गई है। इस दिन अपने हाथों से पार्थिव शिवलिंग बनाकर पूजा करने से व्यक्ति को सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन में आने वाले बड़े कष्टों से भी मुक्ति मिलती है। 

  • 8:38 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri 2026 Rudrabhishek Samagri: रुद्राभिषेक की संपूर्ण विधि

    • स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
    • फिर पूजा स्थान पर एक चौकी रखें और उस पर एक परांत में शिवलिंग स्थापित करें।
    • हाथ में जल लेकर संकल्प करें कि आप  श्रद्धा से रुद्राभिषेक करने जा रहे हैं।
    • सबसे पहले शिवलिंग पर गंगाजल या शुद्ध जल अर्पित करें।
    • इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर चढ़ाएं। 
    • हर द्रव्य चढ़ाते समय ॐ नमः शिवाय या रुद्र मंत्र का जप अवश्य करें।
    • इसके बाद तिलक, पुष्प और बेलपत्र चढ़ाएं।
    • फिर शिवलिंग पर चंदन या भस्म से तिलक करें।
    • धतूरा और भांग चढ़ाएं। साथ ही पुष्पमाला अर्पित करें।
    • फिर ॐ नमः शिवाय मंत्र का 108 बार जप करें।
    • संभव हो तो रुद्राष्टाध्यायी या महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करें।
    • इसके बाद कपूर से भगवान की आरती करें।
    • भगवान शिव को फल और मिठाई का भोग लगाएं।
    • अंत में क्षमा प्रार्थना करें।
    • फिर प्रसाद ग्रहण कर पूजा संपन्न करें।
  • 7:59 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri 2026: महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर बेलपत्र कैसे चढ़ाएं?

    • शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते समय ध्यान रखें कि पत्ता कहीं से भी कटा-फटा न हो।
    • इसके अलावा धारियों वाला बेलपत्र कभी नहीं चढ़ाना चाहिए।
    • बेलपत्र का चिकना भाग शिवलिंग पर रखना चाहिए।
    • बेलपत्र सोमवार, चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी, अमावस्या और संक्रांति के दिन तोड़ना वर्जित होता है।
    • पूजा के लिए एक दिन पहले ही बेलपत्र तोड़कर रख लें।
    • शिवलिंग पर 3 से लेकर 11 बेलपत्र चढ़ाना शुभ माना जाता है। लेकिन इससे अधिक बेल पत्र भी चढ़ा सकते हैं।
    • एक ही बेलपत्र को पानी से धोकर बार-बार चढ़ा सकते हैं।
    • गलती से भी कभी शिवलिंग पर खंडित बेल पत्र न चढ़ाएं। 
  • 7:37 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Rudra Abhishek Pooja Ki Samagri: रुद्राभिषेक पूजन सामग्री

    जिस द्रव्य से रुद्राभिषेक कराना है वो पर्याप्त मात्रा में आपके पास होना चाहिए। जैसे अगर दूध से करा रहे हैं तो कम से कम 3-4 लीटर दूध आपके पास होना चाहिए। अगर गन्ने के रस से रुद्राभिषेक करा रहे हैं तो भी इतना ही गन्ने का रस आपके पास होना चाहिए। इसके अलावा बेलपत्र, शुद्ध जल, घी, पान, सुपारी, कच्चा दूध, दही, शहद, गुलाब जल, नारियल, दीपक, बत्ती, अगर बत्ती, कपूर, शृंगी, धूप, मौली, भांग, मेवा, मिठाई और धतूरा इत्यादि सामान की जरूरत पड़ेगी।

  • 7:12 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri 2026 Live: महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर कहां-कहां तिलक लगाएं

    • ललाट (ऊपरी भाग) - चंदन/भस्म का तिलक
    • त्रिपुंड स्थान - तीन रेखाओं के रूप में भस्म
    • अग्र भाग (सामने का हिस्सा) - कुमकुम या चंदन की बिंदी
    • जलधारा वाले भाग के पास - चंदन का छोटा तिलक 
  • 6:37 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri 2026: महाशिवरात्रि पर जल चढ़ाने का समय

    पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का आरंभ 15 फरवरी 2026 को शाम 5 बजकर 4 मिनट पर होगा। चतुर्दशी तिथि का समापन 16 फरवरी को शाम 5 बजकर 34 मिनट पर होगा। महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग जलाभिषेक का पहला मुहूर्त सुबह 8 बजकर 24 मिनट से सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। दूसरा मुहूर्त सुबह 9 बजकर 48 मिनट से सुबह 11 बजकर 11 मिनट तक रहेगा। तीसरा मुहूर्त सुबह 11 बजकर 11 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। ये तीनों मुहूर्त शिवलिंग जलाभिषेक के लिए अति उत्तम है। भगवान शिव की उपासना के लिए महाशिवरात्रि के दिन निशिता काल पूजा समय  12:28 ए एम से 01:17 ए एम (16 फरवरी) तक रहेगा।

  • 11:51 PM (IST) Posted by Arti Azad

    Maha Shivratri 2026 Live: महाशिवरात्रि पर सुबह क्या करें?

    महाशिवरात्रि पर सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और इसके बाद स्वच्छ कपड़े पहनें।
    संभव हो तो इस दिन सफेद या हल्के रंग के कपड़े पहनें।
    घर के मंदिर की सफाई करें। 
    इसके बाद मंदिर में घी का दीपक जलाएं और हाथ में जल लेकर व्रत और पूजा का संकल्प लें।
    फिर भगवान शिव का ध्यान करते हुए ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें।
    शिवलिंग का जल, दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करें। आप ये काम घर पर या मंदिर में कहीं भी कर सकते हैं। लेकिन इस मंदिर जरूर जाना है।
    इसके बाद शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक के फूल और सफेद पुष्प चढ़ाएं। अगर घर पर शिवलिंग नहीं है तो भगवान की प्रतिमा पर ये सब चीजें अर्पित करें।
    संभव हो तो शिव चालीसा का पाठ जरूर करें। साथ ही महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
    इस दिन शिव परिवार की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है इसलिए भगवान शिव के साथ माता पार्वती, गणेश जी, कार्तिकेय और नंदी की पूजा भी अवश्य करें।
    भगवान को भोग लगाएं और उनकी आरती करें।
    सुबह की पूजा के बाद आप चाहें तो फलाहारी चीजों का सेवन कर सकते हैं।

  • 11:42 PM (IST) Posted by Arti Azad

    Maha Shivratri 2026 Live: महाशिवरात्रि की शाम में क्या करें?

    कई भक्त महाशिवरात्रि की शाम में भगवान शिव की पूजा और अभिषेक करते हैं। 
    तो शाम की पूजा से पहले एक बार फिर से स्नान कर लें।
    फिर घर के मंदिर में दीपक जलाएं और महाशिवरात्रि की कथा सुनें।
    भगवान को फूल, बेलपत्र, भांग, धूतरा इत्यादि चीजें चढ़ाएं और मौसमी फल अर्पित करें।
    फिर शिव जी की आरती करें।
    इसके बाद परिवार के साथ बैठकर भजन या कीर्तन करें।

  • 11:19 PM (IST) Posted by Arti Azad

    Maha Shivratri 2026 Live: महाशिवरात्रि व्रत निर्जला रखते हैं या फलाहारी?

    महाशिवरात्रि व्रत आप निर्जला भी रख सकते हैं फलाहारी भी। वैसे ज्यादातर श्रद्धालु इस व्रत को फलाहारी ही रखते हैं। 

  • 10:56 PM (IST) Posted by Arti Azad

    Maha Shivratri 2026 Live: महाशिवरात्रि की मुख्य पूजा कब होती है?

     

    महा शिवरात्रि की मुख्य पूजा रात के समय निशिता काल में होती है। निशिता काल समय रात 12 बजे से 1 बजे तक रहा है। इसके अलावा कई लोग रात्रि के चारों प्रहर की पूजा भी करते हैं।

  • 10:33 PM (IST) Posted by Arti Azad

    Maha Shivratri 2026 Live: महाशिवरात्रि का भोग

    महाशिवरात्रि पर भगवान शिव को फल, साबूदाना खिचड़ी, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, चीनी), दूध, गुड़, और सफेद बर्फी का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। ठंडाई और मालपुआ भी भगवान शिव का प्रिय भोग हैं। 

  • 10:32 PM (IST) Posted by Arti Azad

    Maha Shivratri 2026 Live: भगवान शिव की पूजा में किन चीजों का इस्तेमाल न करें

    तुलसी के पत्ते
    केतकी के फूल
    सिंदूर
    नारियल का पानी
    शंख से जल 
    खंडित अक्षत 

  • 10:32 PM (IST) Posted by Arti Azad

    Maha Shivratri 2026 Live: महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है?

     

    महाशिवरात्रि मुख्य रूप से फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह, शिवलिंग के रूप में शिव के प्रथम प्राकट्य और समुद्र मंथन के दौरान विष पीने के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। यह रात आध्यात्मिक जागरण और नकारात्मकता को नष्ट कर मोक्ष पाने के लिए अत्यंत पवित्र मानी जाती है। 

  • 9:45 PM (IST) Posted by Arti Azad

    Maha Shivratri 2026 Live: महाशिवरात्रि पर क्या करें

     

    शिवलिंग पर एक-एक करके जल या दूध चढ़ाना चाहिए और कभी भी एक साथ दोनों चीजों को न चढ़ाएं।
    शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय मन ही मन ओम नम: शिवाय मंत्र का जाप करते रहें।
    अभिषेक के बाद शिवलिंग पर धतूरा, भांग, बेलपत्र, गंगाजल, दूध शहद और दही चढ़ानी चाहिए।

  • 8:30 PM (IST) Posted by Arti Azad

    Maha Shivratri 2026 Live: महाशिवरात्रि पर क्या न करें?

    • महाशिवरात्रि पर किसी भी तरह के विवाद से बचें। 
    • शिवलिंग पर कनेर, कमल और केतकी के फूलों को अर्पित करने से बचें। 
    • सिंदूर या श्रृंगार की सामग्री भी शिवलिंग पर नहीं चढ़ानी चाहिए।
    • ध्यान रखें कि शिवलिंग पर भूल से भी शंख से जल न चढ़ाएं।
    • व्रत करने वाले जातक इस दिन सोने से बचें।
    • महाशिवरात्रि के अवसर पर तामसिक भोजन बिल्कुल भी न करें।
  • 7:09 PM (IST) Posted by Arti Azad

    महाशिवरात्रि पर किन चीजों को देखना शुभ होता है?

    महाशिवरात्रि पर नीलकंठ पक्षी को देखना बेहद शुभ माना जाता है। कहते हैं इस दिन इस पक्षी का दिखना समृद्धि और किस्मत खुलने का संकेत देता है।

  • 6:08 PM (IST) Posted by Arti Azad

    Maha Shivratri 2026 Live: महाशिवरात्रि पर इस आरती को करना बिल्कुल भी न भूलें

    जय गणेश जय गणेश,
    जय गणेश देवा ।
    माता जाकी पार्वती
    पिता महादेवा ॥

    एक दंत दयावंत,
    चार भुजा धारी ।
    माथे सिंदूर सोहे
    मूसे की सवारी ॥

    जय गणेश जय गणेश,
    जय गणेश देवा ।
    माता जाकी पार्वती
    पिता महादेवा ॥

    पान चढ़े फल चढ़े,
    और चढ़े मेवा ।
    लड्डुअन का भोग लगे
    संत करें सेवा ॥

    जय गणेश जय गणेश,
    जय गणेश देवा ।
    माता जाकी पार्वती
    पिता महादेवा ॥

    अंधन को आंख देत,
    कोढ़िन को काया ।
    बांझन को पुत्र देत
    निर्धन को माया ॥

    जय गणेश जय गणेश,
    जय गणेश देवा ।
    माता जाकी पार्वती
    पिता महादेवा ॥

    'सूर' श्याम शरण आए,
    सफल कीजे सेवा ।
    माता जाकी पार्वती
    पिता महादेवा ॥

    जय गणेश जय गणेश,
    जय गणेश देवा ।
    माता जाकी पार्वती
    पिता महादेवा ॥

    दीनन की लाज रखो,
    शंभु सुतकारी ।
    कामना को पूर्ण करो
    जाऊं बलिहारी ॥

    जय गणेश जय गणेश,
    जय गणेश देवा ।
    माता जाकी पार्वती
    पिता महादेवा ॥

  • 5:31 PM (IST) Posted by Arti Azad

    Maha Shivratri 2026 Vrat Katha: महाशिवरात्रि व्रत कथा

    प्राचीन समय की बात है। एक शिकारी था जिसका नाम चित्रभानु था। वह जंगल में शिकार कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। एक बार वह एक साहूकार से लिया गया कर्ज नहीं चुका सका, जिससे नाराज होकर साहूकार ने उसे बंदी बना लिया। सहयोग से उसी दिन महाशिवरात्रि का पर्व था। बंदीगृह में रहते हुए चित्रभानु ने वहां शिवरात्रि व्रत और भगवान शिव की महिमा से जुड़ी बातें सुनीं। उसके मन में एक अजीब-सी शांति उतर आई। संध्या को साहूकार ने उससे फिर ऋण का हिसाब मांगा, तो शिकारी ने वचन दिया कि वह अगली सुबह चुका देगा। साहूकार ने उसे छोड़ दिया।

    रिहा होते ही चित्रभानु जंगल की ओर शिकार के लिए निकल पड़ा। दिनभर भूखा-प्यासा रहने के कारण वह थका हुआ था। सूर्यास्त के बाद वह एक जलाशय के पास पहुंचा और एक बेल वृक्ष पर चढ़ गया। उसे उम्मीद थी कि रात के समय कोई जानवर वहां पानी पीने जरूर आएगा। जिस पेड़ पर वह बैठा था, उसके नीचे एक शिवलिंग स्थापित था, जो बेलपत्रों से ढका हुआ था। शिकारी को इसकी जानकारी नहीं थी। जैसे ही उसने मचान बनाने के लिए शाखाएं तोड़ीं, कुछ बेलपत्र और पानी की बूंदें शिवलिंग पर गिर पड़ीं और अनजाने में ही उसके पहले प्रहर की पूजा हो गई।

    रात के पहले पहर एक गर्भवती मृगी जल पीने आई। शिकारी ने धनुष ताना, तभी मृगी बोली "मैं गर्भवती हूं, कृपया मुझे जाने दो। प्रसव के बाद लौटकर आऊंगी।" शिकारी ने उसे दया से जाने दिया। इस तरह उसका व्रत और रात्रि-जागरण चलता रहा। दूसरे प्रहर में एक और मृगी आई। शिकारी ने तीर साधा, तो वह बोली "मैं अपने साथी की खोज में हूं। मिलकर तुरंत लौट आऊंगी।" शिकारी ने उसे भी छोड़ दिया।

    तीसरे प्रहर में एक मृगी अपने बच्चों के साथ पहुंची। शिकारी फिर से तीर चलाने को हुआ, लेकिन मृगी ने आग्रह किया कि उसे बच्चों को उनके पिता के पास छोड़कर आने दिया जाए। शिकारी ने फिर से दया दिखाई और उसे जाने दिया। हर बार जब शिकारी तीर चलाने को होता, तब कुछ बेलपत्र और पानी की बूंदें शिवलिंग पर गिरते रहे — और इस तरह उसकी पूजा क्रमशः पूरी होती रही। रात के अंतिम प्रहर में एक मृग वहां आया। शिकारी ने सोचा "अब कोई बहाना नहीं मानूंगा।" लेकिन मृग बोला — "अगर तुमने मेरी तीनों पत्नियों को माफ कर दिया है, तो मुझे भी थोड़ी देर का जीवनदान दो। हम सब तुम्हारे सामने लौट आएंगे।" शिकारी ने मृग को भी जाने दिया।

    कुछ ही देर में मृग अपनी तीनों पत्नियों और बच्चों के साथ वापस आया। शिकारी यह देखकर बहुत भावुक हो गया। उसकी आंखों से आंसू बह निकले और वह समझ गया कि करुणा ही सबसे बड़ा धर्म है। उसने शिकार का जीवन छोड़ दिया और शिवभक्ति में लीन हो गया। भगवान शिव उसकी भक्ति और करुणा से प्रसन्न हो गए। उन्होंने शिकारी को दर्शन देकर उसे गुह नाम दिया और आशीर्वाद स्वरूप जीवन में सुख, समृद्धि व भक्ति का वरदान दिया। यही गुह, बाद में भगवान श्रीराम का घनिष्ठ मित्र बना।

  • 4:38 PM (IST) Posted by Arti Azad

    Maha Shivratri 2026 Bhajan: महाशिवरात्रि का भजन

    शिव शंकर को जिसने पूजा,

    उसका ही उद्धार हुआ ।

    अंत काल को भवसागर में,

    उसका बेडा पार हुआ ॥

    भोले शंकर की पूजा करो,

    ध्यान चरणों में इसके धरो ।

    हर हर महादेव शिव शम्भू,

    हर हर महादेव शिव शम्भू ।

    हर हर महादेव शिव शम्भू...

    डमरू वाला है जग में दयालु बड़ा

    दीन दुखियों का देता जगत का पिता ॥

    सब पे करता है ये भोला शंकर दया

    सबको देता है ये आसरा ॥

    इन पावन चरणों में अर्पण,

    आकर जो इक बार हुआ,

    अंतकाल को भवसागर में,

    उसका बेडा पार हुआ,

    हर हर महादेव शिव शम्भू,

    हर हर महादेव शिव शम्भू ।

    हर हर महादेव शिव शम्भू...

    नाम ऊँचा है सबसे महादेव का,

    वंदना इसकी करते है सब देवता ।

    इसकी पूजा से वरदान पातें हैं सब,

    शक्ति का दान पातें हैं सब।

    नाथ असुर प्राणी सब पर ही,

    भोले का उपकार हुआ ।

    अंत काल को भवसागर में,

    उसका बेडा पार हुआ॥

    शिव शंकर को जिसने पूजा,

    उसका ही उद्धार हुआ ।

    अंत काल को भवसागर में,

    उसका बेडा पार हुआ ॥

    भोले शंकर की पूजा करो,

    ध्यान चरणों में इसके धरो ।

    हर हर महादेव शिव शम्भू,

    हर हर महादेव शिव शम्भू ।

    हर हर महादेव शिव शम्भू...

  • 3:41 PM (IST) Posted by Arti Azad

    Maha Shivratri 2026 Shiv Stuti: शिव स्तुति आशुतोष शशाँक शेखर

    आशुतोष शशाँक शेखर,

    चन्द्र मौली चिदंबरा,

    कोटि कोटि प्रणाम शम्भू,

    कोटि नमन दिगम्बरा ॥

    निर्विकार ओमकार अविनाशी,

    तुम्ही देवाधि देव,

    जगत सर्जक प्रलय करता,

    शिवम सत्यम सुंदरा ॥

    निरंकार स्वरूप कालेश्वर,

    महा योगीश्वरा,

    दयानिधि दानिश्वर जय,

    जटाधार अभयंकरा ॥

    शूल पानी त्रिशूल धारी,

    औगड़ी बाघम्बरी,

    जय महेश त्रिलोचनाय,

    विश्वनाथ विशम्भरा ॥

    नाथ नागेश्वर हरो हर,

    पाप साप अभिशाप तम,

    महादेव महान भोले,

    सदा शिव शिव संकरा ॥

    जगत पति अनुरकती भक्ति,

    सदैव तेरे चरण हो,

    क्षमा हो अपराध सब,

    जय जयति जगदीश्वरा ॥

    जनम जीवन जगत का,

    संताप ताप मिटे सभी,

    ओम नमः शिवाय मन,

    जपता रहे पञ्चाक्षरा ॥

    आशुतोष शशाँक शेखर,

    चन्द्र मौली चिदंबरा,

    कोटि कोटि प्रणाम शम्भू,

    कोटि नमन दिगम्बरा ॥

    कोटि नमन दिगम्बरा..

    कोटि नमन दिगम्बरा..

    कोटि नमन दिगम्बरा..

  • 2:58 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri 2026: शिव अमृतवाणी

  • 2:41 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri Vrat Timing 2026: महाशिवरात्रि व्रत कब से कब तक रखा जाएगा?

    महाशिवरात्रि व्रत 15 फरवरी की सुबह सूर्योदय के साथ शुरू होगा और इसका समापन 16 फरवरी की सुबह सूर्योदय के बाद किया जाएगा।

  • 2:05 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri 2026: महाशिवरात्रि पर रुद्राभिषेक कब करें?

    महाशिवरात्रि के दिन आप किसी भी समय रुद्राभिषेक करा सकते हैं। लेकिन अगर रुद्राभिषेक के सबसे शुभ मुहूर्त की बात करें तो वो समय रात 12 बजकर 9 मिनट से रात 1 बजकर 1 मिनट तक रहेगा।

  • 1:18 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri 2026: महा शिवरात्रि व्रत में क्या-क्या खा सकते हैं?

    • फल
    • साबूदाना
    • सिंघाड़े का आटा
    • मखाना
    • मूंगफली
    • जीरा
    • घी
    • सेंधा नमक
    • दूध और दूध से बनी चीजें
    • ड्राई फ्रूट्स
    • कुट्टू का आटा
    • आलू
    • टमाटर
  • 12:05 PM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri 2026: महाशिवरात्रि की पूजा में शिवलिंग पर पहले क्या चढ़ाएं?

    शिवलिंग पर सबसे पहले जल या गंगाजल चढ़ाएं। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर अर्पित करें। इसके बाद बेलपत्र, धतूरे का फल-फूल, भांग और चंदन इत्यादि चीजें चढ़ाएं।

  • 10:56 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri 2026: साल में कितनी शिवरात्रि आती हैं?

    एक साल में 12 या 13 शिवरात्रि व्रत आते हैं। जिनमें से फाल्गुन और श्रावण महीने की शिवरात्रि सबसे खास मानी जाती है। फाल्गुन महीने की शिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी।

  • 10:34 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri 2026 Live: महाशिवरात्रि पर महामृत्युंजय मंत्र का जरूर करें जाप, जान लें इसका अर्थ

    ॐ त्र्यम्बकं यजामहे, सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् , उर्वारुकमिव बन्धनान्, मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् !!

    महामृत्युंजय मंत्र का हिंदी अर्थ - इस मंत्र का तात्पर्य ये है कि हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं। भगवान शंकर सुगंधित हैं और हमारा पोषण करते हैं। जैसे फल शाखा के बंधन से मुक्त हो जाता है वैसे ही हम भी मृत्यु और नश्वरता से मुक्त हो जाएं।

  • 10:02 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri 2026: भगवान शिव के प्रिय फूल

    • धतूरा: यशिवपुराण के अनुसार धतूरा का फूल भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इसे भगवान शिव को अर्पित करने से रोग, भय और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है।
    • आक: आक के फूल भी शिव जी की प्रिय माने जाते हैं। कहते हैं इसे भगवान शिव पूजा को अर्पित करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और साहस बढ़ता है।
    • शमी: महाशिवरात्रि पर भगवान शिव को शमी के फूल जरूर चढ़ाने चाहिए। कहते हैं इससे सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
    • कनेर: कनेर का फूल भी भगवान शिव का प्रिय माना जाता है। आप महाशिवरात्रि की पूजा में इस फूल को भी शामिल कर सकते हैं।
    • चमेली: चमेली के सफेद फूल भी भगवान शिव के प्रिय माने जाते हैं। इससे भोलेनाथ की कृपा शीघ्र ही प्राप्त हो जाती है।
    • सफेद कमल: शिवलिंग पर सफेद कमल अर्पित करना बेहद शुभ माना जाता है।
    • बेला: इस फूल से भगवान शिव की पूजा करने से सौभाग्य में वृद्धि होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
  • 9:32 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri 2026: शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में अंतर?

    • शिवरात्रि हर महीने में आती है तो महाशिवरात्रि साल में एक बार, फाल्गुन महीने में आती है।
    • शिवरात्रि शिव की उपासना का पर्व है तो महाशिवरात्रि शिव और शक्ति दोनों की उपासना का महापर्व कहलाता है।
    • मासिक शिवरात्रि साधना और नियमित पूजा का दिन है जबकि महाशिवरात्रि एक बड़ा धार्मिक पर्व है। 
    • महाशिवरात्रि व्रत का फल साल में आने वाली अन्य शिवरात्रियों के व्रत से कई गुना अधिक मिलता है।
    • शिवरात्रि की पूजा दिन के समय होती है तो वहीं महाशिवरात्रि पर रात्रि पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।
    • जहां मासिक शिवरात्रि का व्रत कम लोग रखते हैं तो वहीं महाशिवरात्रि का व्रत लगभग हर सनातनी रखता है।
    • कहते हैं महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान भोलेनाथ शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे। वहीं कुछ धार्मिक मान्यताओं अनुसार इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इसलिए ही ये शिवरात्रि साल की सबसे शिवरात्रि कहलाती है।
    • महाशिवरात्रि पर शिव मंदिरों में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है जबकि मासिक शिवरात्रि अपेक्षाकृत सादगी से मनाई जाती है।
  • 9:02 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri 2026: महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा के फायदे

    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि से दिन चार प्रहर की पूजा करने से भगवान शिव शीघ्र ही प्रसन्न हो जाते हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण कर देते हैं।

  • 8:50 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    महाशिवरात्रि चार प्रहर पूजा विधि (Shivratri Char Prahar Puja Vidhi)

    1. चार प्रहर की पूजा विधि बेहद सरल होती है। हर प्रहर में शिवलिंग का अभिषेक और पूजन किया जाता है। 
    2. पहले प्रहर में जल और दूध से अभिषेक किया जाता है और मन ही मन ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करना होता है।
    3. दूसरे प्रहर में दही, शहद या पंचामृत से अभिषेक कर सकते हैं। 
    4. तीसरे प्रहर में घी या दूध से अभिषेक करें।
    5. चौथे प्रहर में शुद्ध जल से अभिषेक कर सकते हैं। 
    6. यानी हर प्रहर में किसी अलग चीज से शिवलिंग का अभिषेक करना है। साथ ही हर प्रहर की पूजा में शिवलिंग पर फल भी चढ़ाने हैं।
    7. इसके अलावा हर प्रहर में नया दीपक भी जलाना है और बेलपत्र भी चढ़ाना है।
    8. चौथे प्रहर में भगवान शिव की आरती करें और इसके बाद सभी में प्रसाद बांट दें।
  • 8:28 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri 2026: महा शिवरात्रि पर्व किस हिंदू तिथि पर मनाया जाता है

    महा शिवरात्रि का पावन पर्व फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है जो इस बार 15 फरवरी को पड़ रही है।

  • 8:25 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Maha Shivratri 2026 Date: महा शिवरात्रि किस तारीख को है

    महा शिवरात्रि का पावन पर्व 15 फरवरी 2026 को मनाया जाएगा और पूजा का शुभ मुहूर्त 15 फरवरी की रात 12:09 से 01:01 बजे तक रहेगा।