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Hindi News धर्म Shukra Pradosh Vrat 2026 Live: आज है शुक्र प्रदोष व्रत, जान लें पूजा का मुहूर्त, विधि, व्रत कथा, मंत्र, आरती...समेत सारी जानकारी
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Shukra Pradosh Vrat 2026 Live: आज है शुक्र प्रदोष व्रत, जान लें पूजा का मुहूर्त, विधि, व्रत कथा, मंत्र, आरती...समेत सारी जानकारी

Pradosh Vrat Shubh Muhurt: प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है साथ ही कई लोग इस दिन व्रत भी लेते है। प्रदोष व्रत के दिन व्रत लेने वालों को शिव मंत्रों का जप, आरती, भजन, कथा का पाठ भी अवश्य करना चाहिए। ऐसा करने से आपके जीवन की सभी परेशानियों का अंत होता है।

Shukra Pradosh Vrat- India TV Hindi Image Source : FREEPIK शुक्र प्रदोष व्रत

Pradosh Vrat Shubh Muhurt Puja Vidhi Live: शुक्रवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को शुक्र प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। इस व्रत को करने से सुख-समृद्धि और धन-धान्य की प्राप्ति होती है। जनवरी के महीने में 16 तारीख को शुक्र प्रदोष व्रत रखा जाएगा। प्रदोष व्रत की पूजा सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में करना ही शुभ माना जाता है इसलिए इसे प्रदोष व्रत कहा जाता है। 16 जनवरी के दिन आपको प्रदोष व्रत किस विधि से करना चाहिए, व्रत का शुभ पूजा मुहूर्त कब है, इस दिन पूजा में किन मंत्रों का जप करने से आपको लाभ होगा और व्रत की कथा के बारे में हम आपको जानकारी देंगे। 

प्रदोष व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त (Pradosh Vrat Puja Ka Shubh Muhurt)

प्रदोष व्रत पूजा मुहूर्त 16 जनवरी 2026 की शाम 6 बजकर 22 मिनट से रात्रि 8 बजकर 56 मिनट तक

प्रदोष व्रत पूजा की विधि

प्रदोष व्रत के दिन शाम के समय पूजा करना शुभ माना जाता है। हालांकि, व्रत का संकल्प आपको सूर्योदय से पहले ही लेना चाहिए। सूर्योदय से पहले उठकर स्नान-ध्यान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनकर पूजा स्थल पर दीपक जलाएं और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद शिव मंत्रों का जप, शिव चालीसा का पाठ और शिवजी की आरती का पाठ करें। शाम के समय प्रदोष काल में आपको विधिवत रूप से शिवजी की पूजा करनी चाहिए। साथ ही शुक्र प्रदोष व्रत कथा का पाठ भी आपको अवश्य करना चाहिए। शाम की पूजा में व्रत कथा के पाठ के बाद अंत में आरती का पाठ करें और फिर घर के लोगों में प्रसाद का वितरण करें। अंत में खुद प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रत को संपन्न करें। 

Live updates : Pradosh Vrat Shubh Muhurt Puja Vidhi Live

  • 10:07 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Ganesh Ji Ki Aarti: प्रदोष व्रत के दिन जरूर करें गणेश जी की आरती

    • सुखकर्ता दुःखहर्ता वार्ता विघ्नाची।
    • नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची।
    • सर्वांगी सुन्दर उटि शेंदुराची।
    • कण्ठी झळके माळ मुक्ताफळांची।।
    • जय देव जय देव जय मंगलमूर्ति।
    • दर्शनमात्रे मनकामना पुरती।।
    • रत्नखचित फरा तुज गौरीकुमरा।
    • चन्दनाची उटि कुंकुमकेशरा।
    • हिरे जड़ित मुकुट शोभतो बरा।
    • रुणझुणती नूपुरे चरणी घागरिया।।
    • जय देव जय देव जय मंगलमूर्ति।
    • दर्शनमात्रे मनकामना पुरती।।
    • लम्बोदर पीताम्बर फणिवर बन्धना।
    • सरळ सोण्ड वक्रतुण्ड त्रिनयना।
    • दास रामाचा वाट पाहे सदना।
    • संकटी पावावे निर्वाणीरक्षावे सुरवरवन्दना।।
    • जय देव जय देव जय मंगलमूर्ति।
    • दर्शनमात्रे मनकामना पुरती।।
  • 9:42 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Pradosh Vrat 2026: भगवान शिव को तुलसी क्यों नहीं चढ़ाते हैं?

    एक पौराणिक कथा के अनुसार पूर्व जन्म में तुलसी का नाम वृंदा था। वृंदा, जलंधर नाम के राक्षस की पत्नी थी जिसका जन्म शिव जी के अंश के रूप में हुआ था। लेकिन अपने बुरे कामों की वजह से वह राक्षस कुल में जन्मा था। जलंधर राक्षस से हर कोई परेशान था। फिर भी कोई भी उसकी हत्या नहीं कर पा रहा था क्योंकि उसकी पत्नी वृंदा एक पतिव्रता स्त्री थी और वह अपने पति जालंधर के मोह पाश में बंधी हुई थी।

    इसलिए जान कल्याण के लिए एक दिन भगवान विष्णु ने जलंधर का रुप धारण किया और उन्होंने वृंदा की पतिव्रता धर्म को तोड़ दिया। जब वृंदा को यह मालूम हुआ कि भगवान विष्णु ने उनका पतिव्रत धर्म भंग किया है, तो उन्होंने विष्णु जी को श्राप दिया कि आप पत्थर के बन जाएंगे।

    उस समय विष्णु जी ने वृंदा यानी तुलसी को बताया कि वो उसका जालंधर राक्षस से बचाव कर रहे थे। विष्णु जी ने भी वृंदा को श्राप दिया कि वो लकड़ी की बन जाए। इसके बाद शिव जी ने जलंधर राक्षस का वध कर दिया और विष्णु जी के श्राप के बाद वृंदा कालांतर में तुलसी का पौधा बन गईं। कहा जाता है कि तुलसी श्रापित हैं और शिव जी द्वारा उनके पति का वध हुआ है इसलिए शिव पूजन में तुलसी का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। 

  • 8:47 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    शुक्र प्रदोष व्रत कथा (Shukra Pradosh Vrat Katha)

    पुराणों में शुक्र प्रदोष व्रत की कथा वर्णित है। इस कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक नगर में तीन मित्र रहा करते थे। जिनमें एक मित्र ब्राह्मण, दूसरा धनिक और तीसरा राजा का पुत्र था। तीनों के बीच गहरी मित्रता थी और तीनों ही विवाहित थे। हालांकि, धनिक मित्र का अभी तक गौना नहीं हुआ था यानि धनिक की पत्नी अभी मायके में ही थी। 

    एक रोज तीनों मित्र बैठकर बातें कर रहे थे और स्त्रियों की तारीफ कर रहे थे। बातचीत के दौरान ही ब्राह्मण मित्र ने कहा कि- 'नारीहीन घर में भूतों का डेरा हो जाता है।' धनिक के पुत्र ने जब यह बात सुनी तो उसने निश्चय कर लिए कि वो अपनी पत्नी को मायके से लाएगा। यह मन बनाकर वो अपने घर गया और अगले दिन अपनी पत्नी को लाने मायके जाने के लिए तैयार होने लगा। जब धनिक पुत्र के माता-पिता को यह बात पता चली तो उन्होंने पुत्र को समझाया कि इस समय शुक्र अस्त हैं जो कि वैवाहिक जीवन की खुशियों का कारक भी हैं, इसलिए तुम्हें अभी अपनी पत्नी को वापस नहीं लाना चाहिए। हालांकि, धनिक पुत्र ने अपने माता-पिता की एक नहीं सुनी और वो अपनी भार्या को लाने निकल गया। 

    जब धनिक पुत्र ससुराल पहुंचा तो वहां उसके सास-ससुर ने भी उसे समझाया कि शुक्र अस्त के दौरान उसे पत्नी को नहीं ले जाना चाहिए। लेकिन धनिक पुत्र अपनी जिद्द पर अड़ा रहा और अंत में सास-ससुर ने अपनी बेटी को दामाद के साथ विदा कर दिया। दोनों पति-पत्नी जब बेलगाड़ी पर बैठकर जा रहे थे तो रास्ते में बैलगाड़ी का पहिया टूट गया और साथ ही बैल की टांग भी टूट गई। पति-पत्नी दोनों को चोट भी आयी। आगे चलकर उन्हें डाकुओं का सामना भी करना पड़ा जिन्होंने धनिक का पूरा धन भी लूट लिया। बड़ी मुश्किलों के साथ जब धनिक पुत्र और उसकी पत्नी घर पहुंचे तो धनिक पुत्र को सांप ने डस लिया। उसके पिता वैद्य के पास उसे ले गए तो वैद्य बोले की 3 दिन के बाद तुम्हारे पुत्र की मौत हो जाएगी। 

    धनिक पुत्र को सांप ने डस लिया है जब यह बात उसके दोस्त ब्राह्मण पुत्र को पता लगी तो वो धनिक पुत्र से मिलने जा पहुंचा। उसने धनिक पुत्र के पिता से कहा कि आप अपने पुत्र को उसकी पत्नी के साथ उसके ससुराल भेज दीजिए। यह परेशानियां इसीलिए आई हैं क्योंकि आपका पुत्र शुक्र अस्त के समय पत्नी को ससुराल ले आया है। अगर आपका पुत्र ससुराल पहुंच जाता है और आप शुक्र प्रदोष व्रत रखकर भगवान शिव को प्रसन्न कर देते हैं तो आपका पुत्र बच जाएगा। तत्पश्चात धनिक पुत्र के पिता ने ब्राह्मण पुत्र की बात मानी और अपने पुत्र और उसकी भार्या को ससुराल भेज दिया। इसके बाद शुक्र प्रदोष व्रत के चलते धनिक पुत्र की हालात ठीक हो गई और उसके जीवन के कष्ट भी दूर होने लगे। 

  • 8:06 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Shukra Pardosh Vrat Mahatwa: शुक्र प्रदोष व्रत का महत्व

    शुक्र प्रदोष के दिन भगवान शिव और माता पार्वती के साथ ही देवी लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है। शुक्र प्रदोष व्रत सौंदर्य, भोग, वैवाहिक सुख और धन संपदा की प्राप्ति होती है। यह व्रत स्त्रियों के लिए विशेष रूप से कल्याणकारी माना जाता है। शुक्र प्रदोष व्रत करनेसे वैवाहिक जीवन सुखमय होता है और घर में देवी लक्ष्मी का वास होता है।

  • 7:30 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    शिव चालीसा (Shiv Chalisa Lyrics in Hindi)

    दोहा ॥

    श्री गणेश गिरिजा सुवन , मंगल मूल सुजान।
    कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥

    ॥ चौपाई ॥
    जय गिरिजा पति दीन दयाला ।
    सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥
    भाल चन्द्रमा सोहत नीके ।
    कानन कुण्डल नागफनी के ॥

    अंग गौर शिर गंग बहाये ।
    मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥

    वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे ।
    छवि को देखि नाग मन मोहे ॥

    मैना मातु की हवे दुलारी ।
    बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥

    कर त्रिशूल सोहत छवि भारी ।
    करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥

    नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे ।
    सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥

    कार्तिक श्याम और गणराऊ ।
    या छवि को कहि जात न काऊ ॥

    देवन जबहीं जाय पुकारा ।
    तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥

    किया उपद्रव तारक भारी ।
    देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥

    तुरत षडानन आप पठायउ ।
    लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ॥

    आप जलंधर असुर संहारा ।
    सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥

    त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई ।
    सबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥

    किया तपहिं भागीरथ भारी ।
    पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥

    दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं ।
    सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥

    वेद नाम महिमा तव गाई।
    अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥

    प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला ।
    जरत सुरासुर भए विहाला ॥

    कीन्ही दया तहं करी सहाई ।
    नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥

    पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा ।
    जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥

    सहस कमल में हो रहे धारी ।
    कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥

    एक कमल प्रभु राखेउ जोई ।
    कमल नयन पूजन चहं सोई ॥

    कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर ।
    भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥

    जय जय जय अनन्त अविनाशी ।
    करत कृपा सब के घटवासी ॥

    दुष्ट सकल नित मोहि सतावै ।
    भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥

    त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो ।
    येहि अवसर मोहि आन उबारो ॥

    लै त्रिशूल शत्रुन को मारो ।
    संकट से मोहि आन उबारो ॥

    मात-पिता भ्राता सब होई ।
    संकट में पूछत नहिं कोई ॥

    स्वामी एक है आस तुम्हारी ।
    आय हरहु मम संकट भारी ॥

    धन निर्धन को देत सदा हीं ।
    जो कोई जांचे सो फल पाहीं ॥

    अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी ।
    क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥

    शंकर हो संकट के नाशन ।
    मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥

    योगी यति मुनि ध्यान लगावैं ।
    शारद नारद शीश नवावैं ॥

    नमो नमो जय नमः शिवाय ।
    सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥

    जो यह पाठ करे मन लाई ।
    ता पर होत है शम्भु सहाई ॥

    ॠनियां जो कोई हो अधिकारी ।
    पाठ करे सो पावन हारी ॥

    पुत्र हीन कर इच्छा जोई ।
    निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥

    पण्डित त्रयोदशी को लावे ।
    ध्यान पूर्वक होम करावे ॥

    त्रयोदशी व्रत करै हमेशा ।
    ताके तन नहीं रहै कलेशा ॥

    धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे ।
    शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥

    जन्म जन्म के पाप नसावे ।
    अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥

    कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी ।
    जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥

    ॥ दोहा ॥
    नित नेम कर प्रातः ही, पाठ करौ चालीसा।
    तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
    मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान ।
    अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण ॥

  • 7:04 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Shukra Paradosh Vrat: प्रदोष व्रत के दिन शिव जी को जरूर अर्पित करें ये चीजें

    शुक्र प्रदोष व्रत के दिन शिव जी की पूजा के दौरान आपको दूध, बेलपत्र, गंगाजल, मालपुआ, मिठाई आदि अवश्य अर्पित करनी चाहिए। इन चीजों को प्रदोष व्रत के दिन शिव जी को अर्पित करने से आपके जीवन की सभी परेशानियों का अंत हो सकता है। 

  • 6:49 AM (IST) Posted by Laveena Sharma

    Shukra Pradosh Vrat Mantra: प्रदोष व्रत के दिन इन मंत्रों के जप से होगा लाभ

    • ॐ नमः शिवाय
    • ॐ पार्वतीपतये नमः 
    • श्री सांबसदाशिवाय नमः
    • ॐ नमो नीलकण्ठाय नमः
    • ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः