Premanand Maharaj Pravachan: संत प्रेमानंद महाराज जी से मुलाकात के समय भक्त कई तरह के सवाल पूछते हैं और महाराज जी भी अपने भक्तों के सभी सवालों का जवाब देते हुए उन्हें सही मार्ग दिखाने की कोशिश करते हैं। हाल ही में प्रेमानंद महाराज जी से एकांतिक वार्तालाप के समय एक भक्त ने पूछा कि महाराज जी हमें जो पसंद है वो कार्य करना चाहिए या जो हो रहा है उसे ही करते रहना चाहिए। इस पर महाराज जी ने जो जवाब दिया वो सभी भक्तों को सुनना चाहिए।
भक्त का सवाल: जो पसंद है वो करें या जो कर रहे हैं उसी को करते रहें?
प्रेमानंद महाराज जी का जवाब- हम क्या कर रहे हैं, क्या करना चाहिए, क्या नहीं कर रहे हैं ये मनमानी नहीं होनी चाहिए। सब शास्त्र सम्मत होना चाहिए। सद्गुरु, शास्त्र और संत वाणी के अनुकूल हमारे आचरण होंगे तो हम बेहतर होते चले जायेंगे। बेहतर होने का मतलब है काम, क्रोध, लोभ, मोह इन सब चीजों से ऊपर उठते चले जाना। अगर हमसें कोई चूक नहीं होगी और ना ही हमसें कोई पाप होगा तो हम लौकिक और पारलौकिक दोनों उन्नति को प्राप्त होंगे। यदि हमसें पाप आचरण हुआ या गंदे आचरण हुए तो लोक में भी अशांति, चिंता, भय और शोक का सामना करना पड़ेगा और परलोक में भी हमारा पतन ही होगा और नरक आदि की प्राप्ति होगी। इसलिए हमें बेहतर बनने के लिए शास्त्र और संतों की आज्ञा अनुसार चलना चाहिए। मनमानी नहीं करनी चाहिए क्योंकि ये मन तो क्या-क्या पसंद करता है। हमारी मनमानी चलने पर ही तो दुर्गती हो जाती है। मनमानी चलने पर ही तो हम भगवान से विमुख हो जाते हैं। इसलिए शास्त्रों और गुरुओं के हिसाब से चलो जीवन में यही सबसे बेहतर रहेगा।
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