Sankashti Chaturthi Moon Rise Time: चैत्र माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। इस दिन गणेश भगवान की पूजा करना बेहद शुभ होता है लेकिन चंद्रोदय के बाद चंद्र पूजन करने से भी आपको शुभ फलों की प्राप्ति होती है। साल 2026 में भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी व्रत 6 मार्च को रखा जाएगा। ऐसे में आइए जान लेते हैं कि इस दिन चंद्रमा के दर्शन कब होंगे और किस विधि से आपको चंद्रमा की पूजा इस दिन करनी चाहिए।
संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रोदय का समय (Moon Rise Time On Sankashti Chaturthi)
चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 6 मार्च को शाम 5 बजकर 56 मिनट से शुरू हो जाएगी। वहीं चतुर्थी तिथि का समापन 7 मार्च को 7 बजकर 20 मिनट पर होगा। चतुर्थी तिथि के चांद का उदय 6 मार्च की शाम को ही होगा इसलिए 6 मार्च को ही संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा।
- संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रोदय- 6 मार्च की रात्रि 9 बजकर 14 मिनट पर
- चंद्रास्त- 7 मार्च की सुबह 8 बजे
संकष्टी चतुर्थी पर चंद्र पूजन की विधि
चंद्रमा की पूजा से पहले आपको आवश्यक सामग्री अवश्य जमा करनी चाहिए। चंद्र पूजन में जल, कच्चा दूध, अक्षत, धूप-दीप, फल और फूल आपको रखने चाहिए।
चंद्रोदय के समय पूर्व दिशा की ओर मुंह करके आपको चंद्रमा को 3 बार अर्घ्य देना चाहिए और अर्घ्य देते समय चंद्रमा के मंत्रों का जप करना चाहिए। ॐ सों सोमाय नमः और ॐ चंद्रमसे नमः। इन मंत्रों का जप आप अर्घ्य देते समय कर सकते हैं।
इसके बाद आपको चंद्रमा के निमित्त धूप और दीप जलाना चाहिए।
फिर आपको चंद्रमा को फल, फूल और कच्चा दूध भी अर्पित करना चाहिए।
इसके बाद चंद्रमा की आरती का पाठ आप कर सकते हैं।
आरती का पाठ करने के बाद चंद्रमा से सुख-समृद्धि की कामना आपको करनी चाहिए।
पूजा समाप्त होने के बाद प्रसाद का वितरण आप कर सकते हैं।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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