Sheetala Saptami 2026 Katha, Puja Muhurat Live: आज है शीतला सप्तमी यानी बसोड़ा पूजा, जान लें इसकी कथा, पूजा विधि, मुहूर्त, मंत्र, आरती समेत संपूर्ण जानकारी
Sheetala Saptami 2026 Katha, Kahani, Puja Vidhi Live Updates: शीतला सप्तमी का पावन पर्व हर साल चैत्र कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है और इस साल ये तिथि 10 मार्च 2026 को पड़ रही है। यहां आप जानेंगे शीतला सप्तमी की पूजा विधि, मुहूर्त, मंत्र, कथा समेत सबकुछ।

Sheetala Saptami 2026 Katha, Kahani, Puja Vidhi Live Updates: शीतला सप्तमी का त्योहार इस साल 10 मार्च 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा। इसे बसोड़ा पूजा (Basoda Puja) के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन लोग व्रत रखते हैं और माता की विधि विधान पूजा करके उन्हें बासी भोजन का भोग लगाते हैं। लेकिन वहीं कई लोग शीतला अष्टमी के दिन ये काम करते हैं। जो लोग शीतला अष्टमी पूजते हैं वो शीतला सप्तमी के दिन भोग का भोजन तैयार करते हैं और जो लोग शीतला सप्तमी पूजते हैं वो उस दिन चढ़ाया जाने वाला भोग षष्ठी तिथि को ही तैयार कर लेते हैं। इस साल शीतला सप्तमी का भोग आज यानी 9 मार्च 2026 को तैयार किया जाएगा।
दरअसल शीतला अष्टमी या सप्तमी के दिन माता शीतला को बासी यानी ठंडे भोजन का भोग लगाने की परंपरा है इसी कारण से इस भोग को एक दिन पहले बना लिया जाता है। शीतला माता को मुख्य रूप से चावल और घी का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि शीतला अष्टमी या सप्तमी के दिन घर पर चूल्हा नहीं जलाना चाहिए और न ही घर में खाना बनाना चाहिए। चलिए जानते हैं शीतला सप्तमी की कथा, पूजा विधि और मुहूर्त।
शीतला सप्तमी डेट और टाइम 2026 (Sheetala Saptami Date And Puja Muhurat 2026)
- शीतला सप्तमी पूजा मुहूर्त - 10 मार्च 2026, 06:37 AM से 06:26 PM
- सप्तमी तिथि प्रारम्भ - 09 मार्च 2026 को 11:27 PM बजे
- सप्तमी तिथि समाप्त - 11 मार्च 2026 को 01:54 AM बजे
शीतला सप्तमी पूजा सामग्री (Sheetala Saptami Puja Samagri)
रोली, मौली, आम के पत्ते, जल का कलश, चावल, हल्दी, फूल, वस्त्र, एक दीपक, होली वाली बड़कुले की माला, सिक्के, नीम और भोग की चीजें।
शीतला सप्तमी व्रत कथा (Sheetala Saptami Ki Kahani/Katha In Hindi)
शीतला सप्तमी की प्रसिद्ध कथा के अनुसार एक समय की बात है एक दिन शीतला सप्तमी पर एक बुढ़िया माई और उसकी दो बहुओं ने व्रत रखा। उस दिन घर के हर सदस्य को बासी भोजन ग्रहण करना था इसलिए भोजन को एक दिन पहले ही तैयार कर लिया गया है। लेकिन बुढ़िया की दोनों बहुओं को कुछ समय पहले ही संतान हुई थी इसलिए उन्हें डर था कि कहीं बासी भोजन खाने से उनकी संतान बीमार न हो जायें। इसी कारण से उन्होंने शीतला सप्तमी के दिन बासी भोजन ग्रहण न करके अपने लिये रोट सेंक कर उनका चूरमा बनाकर खा लिया। जब सास ने बासी भोजन ग्रहण करने को कहा तो बहुओं ने काम का बहाना बनाकर टाल दिया। उनके इस कृत्य से शीतला माता क्रोधित हो गईं और उनके नवजात शिशुओं की मृत्यु हो गई। जब सास को अपनी बहुओं की गलती का पता चला तो उसने दोनों को घर से निकाल दिया। दोनों अपने शिशुओं के शवों को लेकर एक बरगद के पेड़ के नीचे जाकर बैठ गईं। वहीं पर ओरी व शीतला नामक दो बहनें आईं जो अपने सर में पड़ी जुओं से बहुत परेशान थीं। दोनों बहुओं को उन पर दया आ गई और उन्होंने उनके सर से जुएं निकाल दीं जिससे उन्हें कुछ चैन मिला और उन्होंने बहुओं को आशीष दिया कि तुम्हारी गोद हरी हो जाये। बहुओं ने कहा कि हरी भरी गोद ही लुट गई है इस पर शीतला ने लताड़ लगाते हुए कहा कि पाप कर्म का दंड तो भुगतना ही पड़ता है। बहुओं ने पहचान लिया कि ये साक्षात शीतला माता हैं दोनों माता के चरणों में पड़ गई और क्षमा याचना करने लगीं। माता को भी उनके पश्चाताप करने पर दया आ गई और माता ने उनके मृत बालकों को जीवित कर दिया। इसके बाद दोनों खुशी-खुशी गांव लौट आयी। इस चमत्कार को देखकर सब हैरान रह गये। कहते हैं इसके बाद से पूरा गांव माता को मानने लगा और शीतला सप्तमी का व्रत रखने लगा।
शीतला सप्तमी पूजा विधि (Sheetala Saptami Puja Vidhi)
- इस दिन व्रती को सुबह जल्दी उठकर शीतल यानी ठंडे जल से स्नान करना चाहिये।
- इसके बाद व्रत का संकल्प लेकर विधि-विधान से मां शीतला की पूजा करनी चाहिये।
- इस दिन माता को एक दिन पहले बने भोजन का भोग लगाना चाहिए।
- पूजा के समय शीतला सप्तमी की कथा भी जरूर सुनें।
- माता की आरती करें।
- रात्रि में माता का जागरण करें।
- इस बात का ध्यान रखें कि माता शीतला की पूजा में दीपक नहीं जलाया जाता है।
- अगर घर पर माता शीतला की प्रतिमा नहीं है तब एक मटके पर स्वास्तिक का चिन्ह बनाकर उसकी पूजा करें।
शीतला सप्तमी भोग (Sheetala Saptami Bhog)
शीतला सप्तमी पर माता को लगाया जाने वाला भोग एक दिन पहले ही तैयार कर लिया जाता है। इस भोग में मीठे चावल, पूड़ी, बेसन की सब्जी, गुजिया या दही-बड़े शामिल हैं। लेकिन इस दिन का मुख्य भोग दही, मीठे चावल और मालपुआ है। अगले दिन माता को इन चीजों का भोग लगाने के बाद परिवार के लोग एक साथ बैठकर इस भोजन को ग्रहण करते हैं।
Live updates : Sheetala Saptami 2026 Live: शीतला सप्तमी कब है, इस पूजा में क्या-क्या सामान लगेगा, पूजा विधि क्या है - जानें सबकुछ यहां
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March 10, 2026 9:54 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Sheetla Saptami 2026: क्या शीतला सप्तमी व्रत में कुछ खा सकते हैं?
शीतला सप्तमी व्रत में दिन में एक समय भोजन किया जा सकता है। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि इस दिन बासी भोजन का ही सेवन किया जाता है।
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March 10, 2026 9:36 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
बसोड़ा की कहानी (Basoda Ki Katha)
बसोड़ा पर्व की कहानी के अनुसार एक बार शीतला माता ने सोचा कि चलो आज देखूं कि धरती पर मेरी पूजा कौन करता है। ये सोचकर शीतला माता राजस्थान के डुंगरी गांव में पहुंची और देखा कि इस गांव में उनका कोई मंदिर नहीं है और ना ही यहां कोई उनकी पूजा करता है। माता शीतला गांव की गलियों में घूम ही रही थी कि तभी किसी ने गलती से उन पर चावल का उबला पानी फेंक दिया। इससे शीतला माता के शरीर में फफोले पड गये और माता का पूरा शरीर जलने लगा।
शीतला माता गांव में इधर-उधर भागते हुए चिल्लाने लगी अरे में जल गई। कोई मेरी सहायता करो। लेकिन उस गांव में शीतला माता की सहायता किसी ने नहीं की। लेकिन वहीं पर अपने घर के बाहर एक कुम्हारन महिला बैठी थी। लेकिन जब उस कुम्हारन की नजर बूढ़ी माई पर पड़ी तो उसने कहा हे मां! तू यहां आकार बैठ जा, मैं तेरे शरीर के ऊपर ठंडा पानी डालती हूं जिससे तुझे आराम मिल जाएगा। कुम्हारन ने उस बूढी माई पर खूब ठंडा पानी डाला और बोली हे मां मेरे घर में रात की बनी हुई राबड़ी और थोड़ा दही रखा है। तू दही-राबड़ी खा ले इससे भी तुझे आराम मिलेगा। जब बूढी माई यानी माता शीतला ने ठंडी ज्वार के आटे की राबड़ी और दही खाया तो उनके शरीर को बहुत ठंडक मिली।
फिर उस कुम्हारन ने कहा मां बैठजा तेरे सिर के बाल बहुत बिखरे हैं मैं तेरी चोटी गूंथ देती हूं। कुम्हारन माई जैसे ही चोटी गूंथने हेतु बालों में कंगा करने लगी तो उसकी नजर बूढ़ी माई के सिर के पीछे पड़ी, तो वो आश्चर्य में पड़ गई। कुम्हारन ने देखा कि एक आंख बालों के अंदर छुपी है। यह देखकर कुम्हारन डर से घबराकर भागने लगी तभी उस बूढ़ी माई ने कहा - बेटी तू डर मत। मैं कोई भूत-प्रेत नही हूं। मैं शीतला देवी हूं मैं तो इस धरती पर ये देखने आई थी कि कौन मुझे पूजता है। इतना कहकर माता अपने असली रूप में आ गईं। माता के दर्शन पाकर कुम्हारन सोचने लगी कि अब मैं गरीब इन माता को कहां बिठाऊ। तब माता बोली - हे बेटी तुम किस सोच मे पड गई हो?
कुम्हारन ने हाथ जोड़कर माता से कहा - हे मां! मेरे घर में तो चारों तरफ दरिद्रता बिखरी हुई है। मुझे समझ ही नहीं आ रहा कि आपको कहां बिठाऊ। मेरे घर में ना तो चौकी है और ना ही बैठने का कोई आसन है। तब शीतला माता ने उस कुम्हारन के घर पर खड़े हुए गधे पर बैठ कर और एक हाथ में झाड़ू दूसरे हाथ में डलिया लेकर उस कुम्हारन के घर से दरिद्रता को झाड़कर डलिया में भरकर बाहर फैंक दिया। फिर उस कुम्हारन से कहा - हे बेटी मैं तेरे भक्ति-भाव से प्रसन्न हूं, अब तुझे जो भी वरदान चाहिये मुझसे मांग ले।
कुम्हारन ने हाथ जोड़ कर कहा हे माता मेरी इच्छा है अब से आप इसी डुंगरी गांव मे स्थापित होकर यहीं निवास करें और जिस प्रकार मेरे घर की दरिद्रता को आपने झाड़ू से साफ कर दिया है वैसे ही आपकी जो भी भक्त चैत्र कृष्ण पक्ष की सप्तमी को पूजा करे और अष्टमी के दिन आपको ठंडा जल, दही व बासी ठंडा भोजन चढ़ाये उसके घर में दरिद्रता का कभी वास न होने पाए और आपकी पूजा करने वाली महिला का अखंड सुहाग बना रहे और उसकी गोद हमेशा भरी रहे। साथ ही जो पुरुष शीतला अष्टमी को बाल ना कटवाये, धोबी को कपड़े धुलने ना दें और आप पर ठंडा जल चढ़ाएं और परिवार सहित बासी भोजन करे उसके काम धंधे व्यापार में भी कभी दरिद्रता ना आये।
माता तथास्तु कहते हुए बोलीं हे बेटी जो तूने वरदान मांगे हैं मैं सब तुझे देती हूं। तुझे आर्शिवाद देती हूं कि मेरी पूजा का मुख्य अधिकार इस धरती पर सिर्फ कुम्हार जाति का ही होगा। कहते हैं तभी से डुंगरी गांव में शीतला माता स्थापित हो गईं और उस गांव का नाम हो गया शील की डुंगरी।
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March 10, 2026 8:10 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Sheetala Saptami Shubh Yog: शीतला सप्तमी 2026 पर बन रहा है शुभ योग
शीतला सप्तमी 2026 पर सुबह 08 बजकर 20 मिनट तक हर्षण योग है जिसे ज्योतिषशास्त्र में बहुत शुभ माना जाता है। शुभ कार्य शुरू करने के लिए इस योग को अत्यंत लाभकारी माना जाता है। यह योग विपरीत राजयोग में आता है। इस योग के प्रभाव से धन , उत्तम स्वास्थ्य और सम्मान प्राप्त होगा।
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March 10, 2026 7:17 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Sheetala Saptami Ka Bhog: शीतला अष्टमी का भोग
शीतला सप्तमी के दिन माता रानी को हलवा, बिना नमक वाली पूड़ी, दही, ठंडा दूध और मीठे चावल जैसी चीजों का भोग लगाएं। -
March 10, 2026 6:52 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Sheetala Saptami 2026 Live: शीतला सप्तमी पर क्या ना करें
शीतला सप्तमी के दिन चूल्हा नहीं जलाया जाता है। इस दिन भोजन नहीं बनाया जाता है। तो इस बात का ध्यान खास ध्यान रखें। वरना माता शीतला आपसे अप्रसन्न हो सकती हैं।
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March 10, 2026 6:35 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Sheetala Saptami Live: शीतला सप्तमी महत्व
आज के दिन माताएं अपने बच्चों और परिवार के अच्छे स्वास्थ्य के लिए शीतला माता के निमित्त व्रत रखती हैं। आरोग्य, स्वास्थ्य और शीतलता की देवी माना जाता है। शीतला माता की उपासना करने से चेचक, खसरा, फोड़े-फुंसी और त्वचा संबंधी रोगों से मुक्ति मिलती है। शीतला सप्तमी के दिन शीतला माता की आरती जरूर करें। साथ ही शीतला माता के मंत्रों का भी जाप करें।
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March 10, 2026 12:16 AM (IST) Posted by Vineeta Mandal
Sheetala Mata Ki Puja Kab Kare: शीतला माता की पूजा कब-कब कर सकते हैं?
शीतला माता की पूजा शीतला सप्तमी, शीतला अष्टमी या होली के बाद आने वाले पहले सोमवार या शुक्रवार को भी की जा सकती है।
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March 09, 2026 11:07 PM (IST) Posted by Vineeta Mandal
Sheetala Chalisa: शीतला चालीसा
॥ दोहा ॥
जय-जय माता शीतला,तुमहिं धरै जो ध्यान।होय विमल शीतल हृदय,विकसै बुद्धि बलज्ञान॥
॥ चौपाई ॥
जय-जय-जय शीतला भवानी।जय जग जननि सकल गुणखानी॥गृह-गृह शक्ति तुम्हारी राजित।पूरण शरदचन्द्र समसाजित॥
विस्फोटक से जलत शरीरा।शीतल करत हरत सब पीरा॥
मातु शीतला तव शुभनामा।सबके गाढ़े आवहिं कामा॥
शोकहरी शंकरी भवानी।बाल-प्राणरक्षी सुख दानी॥
शुचि मार्जनी कलश करराजै।मस्तक तेज सूर्य समराजै॥
चौसठ योगिन संग में गावैं।वीणा ताल मृदंग बजावै॥
नृत्य नाथ भैरो दिखरावैं।सहज शेष शिव पार ना पावैं॥
धन्य-धन्य धात्री महारानी।सुरनर मुनि तब सुयश बखानी॥
ज्वाला रूप महा बलकारी।दैत्य एक विस्फोटक भारी॥
घर-घर प्रविशत कोई न रक्षत।रोग रूप धरि बालक भक्षत॥
हाहाकार मच्यो जगभारी।सक्यो न जब संकट टारी॥
तब मैया धरि अद्भुत रूपा।करमें लिये मार्जनी सूपा॥
विस्फोटकहिं पकड़ि कर लीन्ह्यो।मुसल प्रहार बहुविधि कीन्ह्यो॥
बहुत प्रकार वह विनती कीन्हा।मैया नहीं भल मैं कछु चीन्हा॥
अबनहिं मातु, काहुगृह जइहौं।जहँ अपवित्र सकल दुःख हरिहौं॥
भभकत तन, शीतल ह्वै जइहैं।विस्फोटक भयघोर नसइहैं॥
श्री शीतलहिं भजे कल्याना।वचन सत्य भाषे भगवाना॥
विस्फोटक भय जिहि गृह भाई।भजै देवि कहँ यही उपाई॥
कलश शीतला का सजवावै।द्विज से विधिवत पाठ करावै॥
तुम्हीं शीतला, जग की माता।तुम्हीं पिता जग की सुखदाता॥
तुम्हीं जगद्धात्री सुखसेवी।नमो नमामि शीतले देवी॥
नमो सुक्खकरणी दुःखहरणी।नमो-नमो जगतारणि तरणी॥
नमो-नमो त्रैलोक्य वन्दिनी।दुखदारिद्रादिक कन्दिनी॥
श्री शीतला, शेढ़ला, महला।रुणलीह्युणनी मातु मंदला॥
हो तुम दिगम्बर तनुधारी।शोभित पंचनाम असवारी॥
रासभ, खर बैशाख सुनन्दन।गर्दभ दुर्वाकंद निकन्दन॥
सुमिरत संग शीतला माई।जाहि सकल दुख दूर पराई॥
गलका, गलगन्डादि जुहोई।ताकर मंत्र न औषधि कोई॥
एक मातु जी का आराधन।और नहिं कोई है साधन॥
निश्चय मातु शरण जो आवै।निर्भय मन इच्छित फल पावै॥
कोढ़ी, निर्मल काया धारै।अन्धा, दृग-निज दृष्टि निहारै॥
वन्ध्या नारि पुत्र को पावै।जन्म दरिद्र धनी होई जावै॥
मातु शीतला के गुण गावत।लखा मूक को छन्द बनावत॥
यामे कोई करै जनि शंका।जग मे मैया का ही डंका॥
भनत रामसुन्दर प्रभुदासा।तट प्रयाग से पूरब पासा॥
पुरी तिवारी मोर निवासा।ककरा गंगा तट दुर्वासा॥
अब विलम्ब मैं तोहि पुकारत।मातु कृपा कौ बाट निहारत॥
पड़ा क्षर तव आस लगाई।रक्षा करहु शीतला माई॥
॥ दोहा ॥
घट-घट वासी शीतला,शीतल प्रभा तुम्हार।शीतल छइयां में झुलई,मइया पलना डार॥
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March 09, 2026 9:33 PM (IST) Posted by Vineeta Mandal
Sheetala Mata Kinka Roop Hai: शीतला माता किनका रूप है
शीतला माता मां दुर्गा का ही रूप मानी जाती हैं ऐसे में इनकी उपासना से मां दुर्गा की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है।
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March 09, 2026 9:01 PM (IST) Posted by Vineeta Mandal
Sheetala Saptami Live: क्या शीतला सप्तमी पर पूरे दिन बासी का भोजन खाना चाहिए?
परंपराओं अनुसार शीतला सप्तमी के पूरे दिन ही सिर्फ बासी भोजन का ही सेवन करना चाहिए। लेकिन कुछ जगहों पर इस दिन सिर्फ सुबह के समय ही बासी भोजन किया जाता है। ऐसे में आपके यहां की जो परंपरा है आप उसी अनुसार ये काम करें।
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March 09, 2026 7:16 PM (IST) Posted by Vineeta Mandal
Sheetala Saptami Ki Puja Se Kya Hota Hai: शीतला सप्तमी की पूजा से क्या होता है
शीतला सप्तमी की पूजा से माता शीतला प्रसन्न होती हैं जिससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। साथ ही माता की कृपा से गर्मियों में होने वाले रोगों का खतरा कम हो जाता है।
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March 09, 2026 4:49 PM (IST) Posted by Vineeta Mandal
Sheetala Saptami Puja Vidhi: शीतला सप्तमी की पूजा कैसे करें
प्रात काल उठकर पानी में गंगा जल मिलाकर स्नान करें।
फिर पूजा के लिए दो थाली सजाएं।
एक थाली में दही, बाजरा, नमक पारे, रोटी, पुआ, मठरी और एक दिन पहले बने बासी मीठे चावल रखें।
दूसरी थाली में रोली, वस्त्र, अक्षत, सिक्का और मेंहदी रखें।
साथ में ठंडे पानी से भरा कलश रखें।
फिर माता की सभी सामग्रियों से विधि विधान पूजा करें।
पूजा के बाद नीम के पेड़ पर जल जरूर चढ़ाएं।
शीतला माता के मंदिर जाएं और वहां भी माता की विधि विधान पूजा करें।
इसके बाद माता को बासी खाने का भोग लगाएं। -
March 09, 2026 2:47 PM (IST) Posted by Laveena Sharma
Sheetla Saptami 2026 Live: शीतला सप्तमी की पूजा किस समय की जाएगी
शीतला सप्तमी की पूजा 10 मार्च 2026 की सुबह 06:37 से शाम 06:26 के बीच की जाएगी।
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March 09, 2026 2:07 PM (IST) Posted by Laveena Sharma
शीतला अष्टकम
॥ विनियोग ॥
अस्य श्रीशीतलास्तोत्रस्यमहादेव ऋषिः।अनुष्टुप् छन्दः।शीतला देवता।
लक्ष्मीर्बीजम्।भवानी शक्तिः।
सर्वविस्फोटकनिवृत्यर्थेजपे विनियोगः॥
ईश्वर उवाच।
वन्देऽहं शीतलां देवींरासभस्थां दिगम्बराम्।मार्जनीकलशोपेतांशूर्पालङ्कृतमस्तकाम्॥1॥
वन्देऽहं शीतलां देवींसर्वरोगभयापहाम्।
यामासाद्य निवर्तेतविस्फोटकभयं महत्॥2॥
शीतले शीतले चेतियो ब्रूयद्दाहपीडितः।
विस्फोटकभयं घोरंक्षिप्रं तस्य प्रणश्यति॥3॥
यस्त्वामुदकमध्ये तुध्यात्वा सम्पूजयेन्नरः।
विस्फोटकभयं घोरंगृहे तस्य न जायते॥4॥
शीतले ज्वरदग्धस्यपूतिगन्धयुतस्य च।
प्रणष्टचक्षुषःपुंसस्त्वामाहुर्जीवनौषधम्॥5॥
शीतले तनुजान् रोगान्नृणां हरसि दुस्त्यजान्।
विस्फोटकविदीर्णानांत्वमेकाऽमृतवर्षिणी॥6॥
गलगण्डग्रहा रोगा येचान्ये दारुणा नृणाम्।
त्वदनुध्यानमात्रेणशीतले यान्ति सङ्क्षयम्॥7॥
न मन्त्रो नौषधं तस्यपापरोगस्य विद्यते।
त्वामेकां शीतले धात्रींनान्यां पश्यामि देवताम्॥8॥
॥ फल श्रुति ॥
मृणालतन्तुसदृशींनाभिहृन्मध्यसंस्थिताम्।यस्त्वां सञ्चिन्तयेद्देवितस्य मृत्युर्न जायते॥9॥
अष्टकं शीतलादेव्यायो नरः प्रपठेत्सदा।
विस्फोटकभयं घोरंगृहे तस्य न जायते॥10॥
श्रोतव्यं पठितव्यं चश्रद्धाभाक्तिसमन्वितैः।
उपसर्गविनाशायपरं स्वस्त्ययनं महत्॥11॥
शीतले त्वं जगन्माताशीतले त्वं जगत्पिता।
शीतले त्वं जगद्धात्रीशीतलायै नमो नमः॥12॥
रासभो गर्दभश्चैवखरो वैशाखनन्दनः।
शीतलावाहनश्चैवदूर्वाकन्दनिकृन्तनः॥13॥
एतानि खरनामानिशीतलाग्रे तु यः पठेत्।
तस्य गेहे शिशूनां चशीतलारुङ् न जायते॥14॥
शीतलाष्टकमेवेदं नदेयं यस्यकस्यचित्।
दातव्यं च सदा तस्मैश्रद्धाभक्तियुताय वै॥15॥
॥ इति श्रीस्कन्दपुराणे शीतलाष्टकं सम्पूर्णम् ॥
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March 09, 2026 1:36 PM (IST) Posted by Laveena Sharma
Sheetala Saptami 2026: शीतला सप्तमी पर चूल्हा क्यों नहीं जलाया जाता है?
कई ऐसे परिवार हैं जहां बसोड़ा पर्व वाले दिन चूल्हा नहीं जलाया जाता है और लोग इस दिन बासी भोजन का सेवन करते हैं। दरअसल ये परंपरा माता शीतला को शीतलता और आरोग्य समर्पित करने के लिए निभाई जाती है। पौराणिक कथा अनुसार जब शीतला माता धरती पर आई थीं तब उनके ऊपर किसी ने चावलों का पानी डाल दिया था जिससे उनके शरीर पर फफोले पड़ गए थे। इससे माता का शरीर खूब जल रहा था। तब एक महिला ने माता के शरीर पर खूब ठंडा पानी डाला जिससे माता को तुरंत राहत मिल गई। कहते हैं तभी से शीतला माता को ठंडी चीजें पसंद है और चूल्हा जलाने से गर्मी उत्पन्न होती है जो शीतला माता को पसंद नहीं है। इसी वजह से बसोड़ा पूजा पर घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता।
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March 09, 2026 1:17 PM (IST) Posted by Laveena Sharma
शीता माता पूजा मंत्र (Sheetala Mata Puja Mantra)
-ऊं शीतलां शान्ति रूपिणीं तुष्टां सर्व सुख प्रदाम्।
शरण्यां सर्व पापघ्नीं नित्या पूज्यां दयामयीं।
-ऊं शीतलायै नमः
-ऊं श्रीं शीतलायै नमः
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March 09, 2026 12:52 PM (IST) Posted by Laveena Sharma
Sheetala Saptami Par Kya Karna Chahiye: शीतला सप्तमी पर क्या करना चाहिए
इस दिन माता शीतला की पूजा करनी चाहिए और बासी भोजन खाना चाहिए। इसके अलावा इस दिन दान-पुण्य के कार्य करने चाहिए और जानवरों को भोजन कराना चाहिए।
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March 09, 2026 12:11 PM (IST) Posted by Laveena Sharma
शीतला माता का स्वरूप
माता शीतला का स्वरूप अत्यंत सौम्य, शीतल और रोगों को हरने वाला है। वे गधे पर सवार होती हैं, उनके एक हाथ में कलश, दूसरे में झाड़ू (स्वच्छता), तीसरे में नीम के पत्ते और चौथे में सूप होता है। वे चेचक, खसरा और चर्म रोगों जैसी संक्रामक बीमारियों की देवी हैं।
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March 09, 2026 11:47 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Sheetala Saptami Live: शीतला सप्तमी के दिन क्या नहीं करना चाहिए
शीतला सप्तमी के दिन चूल्हा नहीं जलाना चाहिए। इस दिन बासी भोजन का ही सेवन करना चाहिए।
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March 09, 2026 11:22 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Sheetala Mata Ke Bhajan: शीतला माता के भजन
- तोरा रोज रटूं नाम मां शीतला
- ज्योत पे झूम रही मां शीतला
- दुखियों के संकट काटे
- पूज ले मां शीतला रानी ने
- तेरी देखु ज्योत पे बाट शीतला
- शीतला सज्जा तेरा गुड़गामा दरबार
- मंदिर बना तेरा सुंदर
- शीतला माई मेरी करले सुनाई
- मेरे सर पे धर दे हाथ गुड़गामे आली
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March 09, 2026 11:02 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Sheetala Mata Bhog: शीतला माता को क्या-क्या भोग लगाएं?
- दही
- राबड़ी
- बासी पूरी
- मालपुआ
- बासी चावल
- मीठा चावल
- चने
- बाजरे या ज्वार की रोटी
- हलवा
- गुड़
- ठंडा दूध
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March 09, 2026 10:20 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Sheetala Saptami (Basoda Puja) 2026 Live: शीतला सप्तमी व्रत रखने के फायदे
हिंदू धर्म में माता शीतला की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। शीतला सप्तमी तिथि माता शीतला को समर्पित है। कहते हैं इस दिन व्रत रखने से चेचक, खसरा, फोड़े-फुंसी और त्वचा संबंधी किसी भी प्रकार के रोगों का खतरा नहीं रहता और परिवार में आरोग्य व सुख-शांति बनी रहती है। यह व्रत विशेष रूप से बच्चों के स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए किया जाता है।
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March 09, 2026 10:01 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Sheetala Saptami 2026: शीतला सप्तमी पर चूल्हा क्यों नहीं जलाया जाता
शीतला माता को शीतलता और आरोग्य की देवी माना जाता है, इसलिए उन्हें ठंडा और बासी भोजन अर्पित करने की परंपरा है इसलिए शीतला सप्तमी पर माता को चढ़ाया जाने वाला भोग एक दिन पहले ही तैयाक कर लिया जाता है। इस दिन चूल्हा न जलाने का मुख्य कारण माता को प्रसन्न करना, उनसे रोगों से रक्षा की कामना करना और बदलते मौसम में स्वास्थ्य के प्रति सतर्कता बरतना है।
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March 09, 2026 9:07 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Sheetala Ashtami 2026: शीतला अष्टमी कब है
शीतला अष्टमी का पावन पर्व 11 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त 06:36 AM से 06:27 PM तक रहेगा।
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March 09, 2026 8:32 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Sheetala (Basoda) Saptami Geet: शीतला सप्तमी गीत
शीतला माई री सवारी आई
गधे पर बैठी शीतला माई
कलश भरा लाई शीतला माईठंडा पानी लाई शीतला माई
रोग सब हराई शीतला माई
भक्तन पर छाई शीतला माईनीम की डाली लाई शीतला माई
सूप हाथ में लाई शीतला माई
शीतल हवा चलाई शीतला माईबासी खाना भाई शीतला माई
चूल्हा ना जलाई शीतला माई
शीतलता फैलाई शीतला माईजय-जय शीतला माई
कृपा करो शीतला माई
सुख दो शीतला माई -
March 09, 2026 7:58 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Sheetala Mata Ke Mantra: शीतला माता के मंत्र
शीतला सप्तमी के दिन माता शीतला के "ॐ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः" मंत्र का जरूर करें जाप। इससे चेचक, खसरा जैसी बीमारियों से परिवार की होगी सुरक्षा।
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March 09, 2026 7:37 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Sheetala Saptami Puja Samagri: शीतला सप्तमी पूजा सामग्री
दही, मीठे चावल (गुड़/गन्ने के रस के), बाजरा, पूरी, गुलगुले, बेसन की सब्जी और आटे का दीपक शामिल हैं। माता को हल्दी, रोली, मेहंदी, कलावा, और बडकले की माला अर्पित करें।
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March 09, 2026 7:24 AM (IST) Posted by Laveena Sharma
Sheetala Mata Ki Aarti: शीतला माता की आरती
- जय शीतला माता,
- मैया जय शीतला माता ।
- आदि ज्योति महारानी,
- सब फल की दाता ॥
- ॐ जय शीतला माता..॥
- रतन सिंहासन शोभित,
- श्वेत छत्र भाता ।
- ऋद्धि-सिद्धि चँवर ढुलावें,
- जगमग छवि छाता ॥
- ॐ जय शीतला माता,
- मैया जय शीतला माता ।
- विष्णु सेवत ठाढ़े,
- सेवें शिव धाता ।
- वेद पुराण वरणत,
- पार नहीं पाता ॥
- ॐ जय शीतला माता,
- मैया जय शीतला माता ।
- इन्द्र मृदङ्ग बजावत,
- चन्द्र वीणा हाथा ।
- सूरज ताल बजावै,
- नारद मुनि गाता ॥
- ॐ जय शीतला माता,
- मैया जय शीतला माता ।
- घण्टा शङ्ख शहनाई,
- बाजै मन भाता ।
- करै भक्तजन आरती,
- लखि लखि हर्षाता ॥
- ॐ जय शीतला माता,
- मैया जय शीतला माता ।
- ब्रह्म रूप वरदानी,
- तुही तीन काल ज्ञाता ।
- भक्तन को सुख देती,
- मातु पिता भ्राता ॥
- ॐ जय शीतला माता,
- मैया जय शीतला माता ।
- जो जन ध्यान लगावे,
- प्रेम शक्ति पाता ।
- सकल मनोरथ पावे,
- भवनिधि तर जाता ॥
- ॐ जय शीतला माता,
- मैया जय शीतला माता ।
- रोगों से जो पीड़ित कोई,
- शरण तेरी आता ।
- कोढ़ी पावे निर्मल काया,
- अन्ध नेत्र पाता ॥
- ॐ जय शीतला माता,
- मैया जय शीतला माता ।
- बांझ पुत्र को पावे,
- दारिद्र कट जाता ।
- ताको भजै जो नाहीं,
- सिर धुनि पछताता ॥
- ॐ जय शीतला माता,
- मैया जय शीतला माता ।
- शीतल करती जननी,
- तू ही है जग त्राता ।
- उत्पत्ति व्याधि बिनाशन,
- तू सब की घाता ॥
- ॐ जय शीतला माता,
- मैया जय शीतला माता ।
- दास विचित्र कर जोड़े,
- सुन मेरी माता ।
- भक्ति आपनी दीजै,
- और न कुछ भाता ॥
- जय शीतला माता,
- मैया जय शीतला माता ।
- आदि ज्योति महारानी,
- सब फल की दाता ॥
- ॐ जय शीतला माता..॥