Vat Savitri Puja Samagri 2026: वट सावित्री व्रत पति की दीर्घायु और वैवाहिक जीवन में खुशहाली बनाए रखने के लिए किया जाता है। इस व्रत में वट यानी बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है। वट सावित्री की कहानी सावित्री और सत्यवान से जुड़ी है। कहते हैं प्राचीन समय में सावित्री नाम की एक पतिव्रता स्त्री थी जिनके पति की मृत्यु हो गई थी। लेकिन जब यमराज सावित्री के पति सत्यवान के प्राण लेने आए तो उन्होंने अपने तप, भक्ति और बुद्धिमत्ता से यमराज को प्रसन्न कर अपने पति के प्राण वापस प्राप्त कर लिए। कहते हैं जिस दिन सावित्री के पति को फिर से जीवन प्राप्त हुआ था उस दिन ज्येष्ठ महीने की अमावस्या थी। यही कारण है कि इस तिथि पर हर साल महिलाएं वट सावित्री व्रत रखती हैं। चलिए आपको बताते हैं इस व्रत में क्या-क्या सामान लगता है।
वट सावित्री पूजा सामग्री लिस्ट (Vat Savitri Puja Samgri List)
- सावित्री-सत्यवान की मूर्ति या तस्वीर
- बांस का पंखा
- कच्चा सूत
- गंगाजल और शुद्ध जल
- रोली
- मिट्टी का घड़ा या कलश
- बरगद का फल या पत्ता
- ताजे फल
- मिठाई और घर के बने पकवान
- धूप
- अगरबत्ती और कपूर
- कुमकुम और हल्दी
- अक्षत
- भीगे हुए काले चने
- घी का दीपक और बाती
- सुपारी और लौंग-इलायची
- पुष्प और माला
- दक्षिणा (सिक्के या नोट)
- वट सावित्री व्रत कथा की पुस्तक
- मौली
- पान के पत्ते
वट सावित्री व्रत की मुख्य परंपराएं
- वट सावित्री व्रत की पूजा बरगद के पेड़ पर की जाती है।
- पूजा के दौरान बरगद के पेड़ को पंखे से हवा झलना अनिवार्य होता है। इसके बाद सुहागिनें अपने पति को भी हाथ पंखा से हवा करती हैं। बाद में पंखे को दान कर दिया जाता है।
- कई क्षेत्रों में इस दिन पूजा के बाद 12 या 21 भीगे हुए चने बिना चबाए निगलने की परंपरा भी निभाई जाती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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