Vidur Niti: महाभारत में जहां पांडवों और कौरवों की कथा विस्तार से मिलती है वहीं एक और व्यक्तित्व था जिसने धर्म और नीति के रास्ते को हमेशा उजागर किया। ये थे महात्मा विदुर। उन्हें यमराज का अवतार माना गया है और धर्मराज की उपाधि से नवाजा गया। पांडु और धृतराष्ट्र के बड़े भाई होने के बावजूद उन्हें केवल दासीपुत्र होने की वजह से वह सम्मान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे। फिर भी उन्होंने न्याय-नीति और सत्य के मार्ग को सर्वोपरि रखा।
भगवान कृष्ण भी करते थे विदुर का सम्मान
महात्मा विदुर की बुद्धिमत्ता और गहन ज्ञान का लोहा स्वयं भगवान कृष्ण ने भी माना। धृतराष्ट्र कोई भी निर्णय बिना विदुर से परामर्श किये नहीं लेते थे। उनके विचारों और सलाहों को ही विदुर नीति कहा गया है। यह नीति जीवन के हर पहलू पर प्रकाश डालती है और बताती है कि इंसान को किन गलतियों से बचना चाहिये ताकि उसका जीवन सुखमय हो सके।
पहली गलती: अहंकार ले जाता है विनाश की ओर
विदुर नीति कहती है कि अहंकार व्यक्ति का सबसे बड़ा शत्रु है। जब किसी के भीतर घमंड और अहंकार की भावना घर कर जाती है तो उसका पतन निश्चित हो जाता है। ऐसा व्यक्ति खुद को सबसे श्रेष्ठ समझता है और सीखने की प्रवृत्ति खत्म कर देता है। वह दूसरों के दर्द को नहीं समझ पाता और धीरे-धीरे सब उससे दूर हो जाते हैं। अहंकार इंसान को भीतर से खोखला कर देता है। इसलिए इससे हमेशा बचना चाहिये।
दूसरी गलती: ज्यादा बोलना खुद के लिए है जाल बुनना
महात्मा विदुर के अनुसार जो व्यक्ति बहुत बोलता है वह अपने रहस्य और योजनाओं को अनजाने में उजागर कर देता है। इससे उसके विरोधी उसका फायदा उठा लेते हैं। कम बोलना हर परिस्थिति में लाभदायक होता है। शांत व्यक्ति न केवल समझदार दिखता है बल्कि उसके शब्दों का वजन भी बढ़ जाता है।
तीसरी गलती: क्रोध में इंसान खुद को जलाता है
क्रोध इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन है। जो व्यक्ति गुस्से पर काबू नहीं रख पाता वह खुद अपनी बुद्धि खो बैठता है। क्रोध में कही गई बातें और किये गये कर्म बाद में पछतावे का कारण बनते हैं। विदुर नीति कहती है कि संयम ही सच्ची शक्ति है। अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखने वाला व्यक्ति हमेशा सफल होता है।
चौथी गलती: आंख मूंदकर भरोसा करना
महात्मा विदुर ने कहा है कि कभी भी किसी पर अंधा विश्वास नहीं करना चाहिये। भरोसे का मतलब यह नहीं कि समझदारी छोड़ दी जाए। जो व्यक्ति बिना सोचे किसी पर भरोसा करता है वह अकसर धोखा खाता है और दुख झेलता है। बेहतर यही है कि भरोसा तो करें लेकिन विवेक के साथ।
पांचवीं गलती: लालच का अंत हमेशा विनाश होता है
विदुर नीति बताती है कि लालच इंसान की बुद्धि को भ्रष्ट कर देता है। लालच में पड़ा व्यक्ति दूसरों को नुकसान पहुंचाने से भी नहीं हिचकिचाता। वह छल करता है और दूसरों की भावनाओं से खेलता है। वही लालच उसे तबाह कर देता है। इसलिए विदुर नीति का स्पष्ट संदेश है कि संतोष ही सबसे बड़ा धन है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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