नयी दिल्ली: ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ मौजूदा वनडे सिरीज़ में लगता है मानों धोनी एण्ड कंपनी की हर चाल पर मात हो रही है। धोनी की कप्तानी की धार जहां कुंद पड़ती दिख रही है वहीं भारतीय गेंदबाज़ शायद भूल गये हैं कि मैच जीतने के रन रोकना ही काफी नही बल्कि विकेट लेना भी ज़रुरी होता है।
पांच मैचों की सिरीज़ में भारत दो मैच आसानी से हार चुका है बावजूद इसके कि दोनों ही मैचों में उसने 300+ का स्कोर खड़ा किया था और दोनों ही मैचों में रोहित शर्मा ने शतक जड़े थे।
मैच को बाद धोनी का बॉलरों पर भड़कना भी जायज़ है। उन्होंने तंज़ कसते हुए कहा कि लगता है इस तरह की बॉलिंग के रहते 300 का स्कोर काफी नहीं है और शायद हमें 30-40 रन और बनाने चाहिये। जब हमें बल्लेबाज़ों पर दबाव डालना चाहिये तब हम वाइड डालते हैं।
बहरहाल, आइये एक नज़र डालते हैं उन 5 कारणों पर जिनकी वजह से टीम इंडिया हारी:
1- मज़बूत बुनियाद पर कमज़ोर इमारत
रोहित शर्मा (124), विराट कोहली (59) और अजंक्या रहाणे (89) ने शानदार और ज़िम्मेदाराना बलेलेबाज़ी कर टीम इंडिया के लिये एक मज़बूत बुनियाद रखी। टीम इंडिया ने 40 ओवर में 233 रन बना लिये थे और लग रहा था कि अब वो 340-350 के स्कोर की तरफ बड़ रही है लेकिन अफ़सोस कि अगले 10 ओवर में सिर्फ़ 75 रन ही जुड़ सके और 6 विकेट भी गिर गये।
2- बेअसर, बिना धार की गेंदबाज़ी
भारतीय बॉलर्स लगातार दूसरी बार 300+ का स्कोर डिफ़ेंड करने में नाकाम रहे। ईशांत ने जहां शुरुआत में दिल खोलकर वाइड बॉलिग की और बल्लेबाज़ को जमने का मौक़ा दिया वहीं सरन को छोड़कर किसी भी बॉलर ने ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ो पर कोई असर नहीं छोड़ा।
3- फ़िरकी का फ़ेर पड़ रहा है मंहगा, 'चमत्कारी' स्पिन गेंदबाजी की हवा निकली
अपने घर में यानी भारत में ''चमत्कारी'' गेंदबाज़ी करने वाले स्पिनर अश्विन और जडेजा रौब जमाना तो दूर, ऑस्ट्रेलिया के विकटों पर क्लब स्तर के बॉलर नज़र आ रहे हैं। दोनों ने 19 ओवर में 110 रन दिये और धोनी की झोली में गिरा भी तो बस एक विकेट।
4- कैच नहीं हवा पकड़ रहे थे ये फ़ील्डर्स
ईशांत शर्मा ने जडेजा की बॉलिंग पर शॉन मार्श का एक आसान सा कैच टपका दिया था। तब वह सिर्फ़ 19 रन पर थे। दरियादिली का सिलसिला ईशांत पर ही ख़त्म नहीं हुआ। उनके बाद बरिंदर सरन और मनीष पांडे ने भी मार्श पर मेहरबानी की और कैच छोड़े। मार्श ने फिर 71 रन की जिताऊ पारी केल डाली।
5- धोनी की धमक धीमी पड़ने लगी
एक समय था जब धोनी अकेले दम पर मैच का रुख़ बदल दिया करते थे लेकिन लगता है कि टेस्ट से रिटायर होने के बाद उनकी धमक कम पड़ने लगी है। इसके पहले भी हाल ही में साउथ अफ़्रीका से घरेलू टी20 और वनडे सिरीज़ भी वो हार चुके हैं। अगर हार का सिलसिला यूं ही जारी रहा तो लगता है कि मार्च में होने वाला टी20 विश्व तक धोनी का टिका रहना मुश्किल हो जाएगा।
हालांकि इन सब बातों के वावजूद महेन्द्रर सिंह धोनी पर देश के क्रिकेट प्रेमियों को भरोसा रखना चाहिए, सुनील गावस्कदर ने भी माही के बारे में बोलत हुए कहा है कि बेशक धोनी अभी संघर्ष कर रहे हो,लेकिन वह बेहतर करने का प्रयास कर रहे हैं,वह देश के गौरव है। ऐसे में शेष तीन वनडे में लगातार जीत के लिए टीम इंडिया को चमत्काकरी प्रदर्शन करना होगा। गेंदबाजी की धार कुंद है,सबसे बड़ा सवाल टीम इंडिया के सामने अभी फिलहाल यहीं है कि कमजोरी को
ताकत कैसे बनाया जाए ?
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