नई दिल्ली: BCCI इंग्लैंड के खिलाफ भारत की आगामी घरेलू सीरीज के दौरान फैसला समीक्षा प्रणाली (DRS) के इस्तेमाल के लिए गंभीर रूप से विचार कर रहा है और इस कदम को उसके अपने पूर्व के पक्ष से हटना कहा जा सकता है। अगर DRS का इस्तेमाल किया जाता है तो यह पहली बार होगा जब भारत में द्विपक्षीय टेस्ट सीरीज में इस तकनीक को अपनाया जायेगा। पिछली बार भारतीय सरजमीं पर इसका इस्तेमाल 2011 ICC वर्ल्ड कप के दौरान किया गया था।
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आईसीसी के एक प्रवक्ता ने बताया कि वैश्विक संस्था के क्रिकेट महाप्रबंधक ज्योफ अलार्डिस तकनीकी सहयोग मुहैया कराने वाली कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ BCCI के शीर्ष अधिकारियों और कोच अनिल कुंबले से मुलाकात करेंगे। आईसीसी प्रवक्ता ने कहा, ‘अगले हफ्ते की बैठक में DRS टेक्नॉलजी टेस्टिंग प्रॉजेक्ट (एमआईटी इंजीनियरों द्वारा आयोजित) की सिफारिशों के साथ हॉकआई बॉल ट्रैकिंग टेक्नॉलजी पर भी चर्चा की जाएगी, जिसे हालिया वर्षों में शुरू किया गया है।
कुंबले की मौजूदगी अहम इसलिए भी है क्योंकि वह ICC क्रिकेट समिति के अध्यक्ष हैं और उन्होंने पिछले साल बॉल ट्रैकिंग और हॉक आई टेक्नॉलजी की प्रगति को मॉनिटर करने के लिए MIT लैबोरेटरी का भी दौरा किया था। भारत के सीमित ओवरों के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का मानना था कि बॉल ट्रैकिंग टेक्नॉलजी फूलप्रूफ नहीं है। BCCI के पूर्व अध्यक्ष एन. श्रीनिवासन के कार्यकाल में बोर्ड DRS की खामियों और फायदे पर चर्चा करने के लिए तैयार ही नहीं था।
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