कोरोना महामारी से बचने के लिए अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट बोर्ड (आईसीसी) ने सबके सामने एक विचार प्रकट किया था। जिसमें कहा गया था कि जब भी कोरोना के बाद क्रिकेट की वापसी होगी टीम के खिलाड़ी गेंद को चमकाने के लिए लार, थूक या पसीने का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। जिसके बाद अनिल कुंबले की अध्यक्षता आईसीसी की क्रिकेट समिति ने भी सलाइवा ( लार ) का उपयोग न करने की सिफारिश की है जबकि पसीने के इस्तेमाल पर रोक ना लगाने की बात कही है। इस पर फैसला अगले महीने आएगा। ऐसे में साउथ अफ्रीका के पूर्व कप्तान फाफ डु प्लेसिस का कहना है कि वह हर गेंद से पहले फिल्डिंग के लिए तैयार होने के लिए अपने हाथ पर थूंकते हैं। ऐसा करने वाले सिर्फ डु प्लेसिस नहीं हैं। दुनिया का लगभग हर फील्डर ऐसा करता है ताकि गेंद उसके हाथों में आसानी से चिपक सके।
डु प्लेसिस ने स्टार स्पोटर्स के एक शो पर कहा, "मैं स्लिप पर जब खड़ा होता हूं तो कैच लेने के लिए तैयार होने से पहले मैं अपने हाथ पर थूंकता हूं। अगर आप रिकी पोंटिंग जैसे खिलाड़ी को देखेंगे तो वह हर गेंद से पहले अपने हाथ पर इसी तरह थूंकते थे।"
गौरतलब है कि कोरोना महामारी के बीच जहां सभी प्रकार के खेलों पर रोक लगी हुई हैं वही टीम इंडिया के साउथ अफ्रीका दौरे पर भी विचार विमर्श किया जा रहा है। जो कि अगस्त में संपन्न हो सकता है। इसके लिए क्रिकेट सूउथ अफ्रीका भारतीय खिलाड़ियों को पूरी तरह से बायो-सिक्योर माहौल प्रदान करने के लिए प्रयासरत है। क्रिकेट साउथ अफ्रीका (सीएसए) खिलाड़ियों और अन्य हितधारकों को कोरोना वायरस से बचाने के लिये बायो-सिक्योर मॉडल का उपयोग कर सकता है।
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बता दें कि बीसीसीआई ने अगस्त में दक्षिण अफ्रीका दौरे को लेकर कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई है और केवल इस दौरे की संभावना के बारे में चर्चा हुई है। बीसीसीआई के कोषाध्यक्ष अरुण धूमल ने क्रिकेट दक्षिण अफ्रीका की पुष्टि के दावों को नकार दिया। इससे पहले क्रिकेट साउथ अफ्रीका (सीएसए) के निदेशक क्रिकेट ग्रीम स्मिथ और मुख्य कार्यकारी अधिकारी जैक फॉल ने कहा था कि भारत अगस्त में तीन टी 20 अंतरराष्ट्रीय मैचों के लिए अफ्रीका का दौरा करने के लिए सहमत हो गया है।
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