मुंबई: भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी 11 जून से जिंबाब्वे के सीमित ओवरों के दौरे पर दूसरे दर्जे की टीम की अगुआई के दौरान अलग खिलाडि़यों के साथ काम करने की चुनौती को लेकर उत्सुक हैं। विराट कोहली, रोहित शर्मा, शिखर धवन और रविचंद्रन अश्विन जैसे सीनियर खिलाडि़यों की गैरमौजूदगी में धोनी नये चेहरों वाली टीम की अगुआई करेंगे।
धोनी ने दौरे पर रवाना होने से पूर्व प्रेस कांफ्रेंस में कहा, मुझे लगता है कि यह मेरे लिए बिलकुल अलग अनुभव होगा, इसका कारण यह है कि आप अधिकतर खिलाडि़यों के एक ही समूह के साथ खेलते हो इसलिए आपको भूमिका और जिम्मेदारी पता होती है। इस द्विपक्षीय श्रृंखला में काफी खिलाड़ी ऐसे हैं जिनके साथ मैं पहली बार खेलूंगा। उन्होंने कहा, इसलिए मुझे जल्दी से आंकलन करना होगा कि उनके मजबूत पक्ष क्या हैं और साथ ही टीम के संयोजन को देखते हुए कौन सा सर्वश्रेष्ठ स्थान है जहां किसी खिलाड़ी का इस्तेमाल किया जा सकता है। संयोजन अच्छा लग रहा है। यह अच्छी टीम है। भारतीय टीम 11 से 22 जून तक जिंबाब्वे के खिलाफ तीन वनडे और इतने ही मैचों की टी20 श्रृंखला खेलेगी। सभी मैच हरारे में खेले जाएंगे।
धोनी का मानना है कि टास अहम भूमिका निभाएगा क्योंकि सभी मैच दिन में खेले जाएंगे। उन्होंने कहा, जिंबाब्वे ऐसा स्थान है जहां टास अहम होता है। काफी ऐसे स्थान नहीं हैं जहां आप दिन में मैच खेलते हो। अगर आप दिन में मैच खेलते हो तो टास अहम होता है क्योंकि आपको सामंजस्य बैठाना होता है और हालात का अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करना होता है।
धोनी का मानना है कि बल्लेबाजी की तुलना में गेंदबाजी में अधिक अंतरराष्ट्रीय अनुभव है। उन्होंने कहा, गेंदबाजी कागजों पर अच्छी दिख रही है। मैंने उन्हें गेंदबाजी करते हुए जितना भी देखा है। इस समूह में काफी सुधार नजर आता है। बुमराह में सुधार हुआ है। बरिंदर सरन ने सुधार दिखाया है, अक्षर पटेल और युजवेंद्र चहल सीमित ओवरों के मैच में अनुभवी खिलाड़ी हैं। जयंत यादव भी है। भारतीय कप्तान ने हालांकि साथ ही कहा कि इंडियन प्रीमियर लीग की तुलना अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से नहीं की जा सकती।
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