नई दिल्ली: शशांक मनोहर दूसरी बार बीसीसीआई के निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए हैं। बीसीसीआई अध्यक्ष पद के लिए श्रीनिवासन गुट भी रेस में था, लेकिन उसे बैकफुट पर जाना पड़ा। आपको बता दें कि इससे पहले साल 2008 में मनोहर बीसीसीआई अध्यक्ष चुने गए थे। उन्होंने तीन साल तक अध्यक्ष पद का जिम्मा संभाला था। इसके बाद साल 2011 में एन श्रीनिवासन को बोर्ड का नया प्रमुख चुना गया। गौरतलब है कि हाल ही में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष जगमोहन डालमिया की मौत हुई है।
पूर्व क्षेत्र की थी बारी-
करीब तीन माह पहले अध्यक्ष पद संभालने वाले जगमोहन डालमिया की मौत के बाद इस बार बोर्ड के अध्यक्ष पद की कमान संभालने के लिए पूर्वी क्षेत्र के पास प्रस्ताव रखने का मौका था। पूर्वी क्षेत्र की छह इकाइयों (पूर्वी क्षेत्र, बंगाल क्रिकेट संघ(कैब), ओडिशा, झारखंड, असम तथा त्रिपुरा क्रिकेट संघ) का समर्थन हासिल था। वहीं श्रीनिवासन खेमा अपनी दावेदारी मजबूती से पेश न कर बैकफुट पर आ गया। आपको बता दें कि मनोहर के नाम का प्रस्ताव डालमिया के पुत्र ने रखा। बंगाल के सौरव गांगुली, त्रिपुरा के सौरव दासगुप्ता, असम के गौतम राय, ओड़िशा के आशीर्वाद बेहड़ा और झारखंड राज्य क्रिकेट संघ के संजय सिंह ने भी मनोहर के नाम का प्रस्ताव रखा। शशांक मनोहर का कार्यकाल 2017 में खत्म होगा।
मनोहर के सामने चुनौती-
मनोहर के सामने सबसे बड़ी चुनौती बोर्ड में स्थिरता लाना होगी, श्रीनिवासन के कार्यकाल के दौरान और साल 2013 के आईपीएल सट्टेबाजी विवाद में सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद बोर्ड कई मौकों पर विवादों के घेरे में रहा है।
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