मोहाली: टी-20 और वनडे में साउथ अफ़्रीका के हाथों शिकस्त के बाद टीम इंडिया का थिंक टैक एक बात से तो एकमत हो गया कि अगर साउथ अफ़्रीका से टेस्ट सीरीज़ जीतना है तो बल्लेबाज़ी पर ध्यान देने के साथ ही स्पिन गेंदबाजी पर सबसे अधिक फोकस करना होगा। यही सोचकर भारत के सबसे तेज और उछाल लेने वाली पिच को प्यासा रखा गया जिसका नतीजा हुआ विकेट एकदम सूखा हो गया और स्पिन गेंदबाजों के लिए ऐशगाह बन गया। एक ऐसा विकेट जहां घूमती स्पिन गेंद का सामना करना बल्लेबाजों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं।
टॉस तो जीत लिया क्या मैच पर कब्जा कर सकेंगे विराट ?
कप्तान विराट कोहली ने जब गुरुवार को चार टेस्ट मैच की सीरीज़ के पहले मैच में सुबह टॉस जीता तो लगा मानों उन्हें मन मांगी मुराद मिल गई हो। एक झटके में उन्होंने घोषणा कर दी कि वे तीन स्पिनरों के साथ पहले बल्लेबाज़ी करेंगे।संदेश साफ था स्पिन गेंदबाजी के अनुकूल दिख रही पिच पर चौथी पारी में बैटिंग करना बेहद मुश्किल काम हो जाएगा। उधर साउथ अफ़्रीका के कप्तान हाशिम आमला, जो स्पिन के अच्छे बल्लेबाज़ माने जाते हैं लेकिन अभी तक इस दौरे पर संघर्ष कर रहे हैं, टॉस हारने से दुखी लगे।
तो क्या अपने ही जाल में फंस गई टीम इंडिया ?
लेकिन कोहली और टीम डायरेक्टर रवि शास्त्री की प्लानिंग पर तब पानी फिर गया जब टीम इंडिया बहुत मुश्किल से 200 तक पहुंच पायी। भारत की तरफ से सिर्फ मुरली विजय(75) ही साउथ अफ़्रीकी गेंदबाज़ों के सामने टिक सके। हैरानी की बात तो यह है कि दक्षिण अफ्रीका के नए चेहरे स्पिनर डीन एल्गर ने 8 ओवर में 22 रन देकर 4 विकेट चटका दिए।
हालंकि भारत ने दिन का खेल ख़त्म होने तक साउथ 28 रन पर अफ़्रीका के दो विकेट निकाल लिये हैं जिसमें एक विकेट डू प्लेसिस का भी है जो बहुत जुझारु बल्लेबाज़ हैं, लेकिन उसकी चिंता अभी यहीं ख़त्म नहीं होती। इसका कारण एक तो टीम इंडिया का 201 का स्कोर बहुत छोटा है, जिसे उसे बचाना है और अभी आमला विकेट पर हैं, और डिविलियर्स को अभी आना है।
अगर आमला अपना फ़ॉर्म पा लेते हैं और डिविलियर्स अपनी ख्याति के अनुरुप एक बार फिर खेल जाते हैं तो बहुत हैरानी नहीं होगी कि साउथ अफ़्रीका क़रीब 100 रन की बढ़त ले ले जो इस विकेट पर 200 की बढ़त से कम नही होगी।
गेंदबाजी के साथ भारत की दूसरी पारी में दिखाना होगा दम
ऐसी स्थिति में शुक्रवार को दूसरे दिन भारत को सुबह के सेशन में ज़्यादा से ज़्यादा विकेट कम से कम रन देकर निकालने होंगे वर्ना धीमी विकेट बनाने की उसकी रणनीति कहीं पोरस का हाथी साबित न हो जाए क्योंकि इस तरह के विकेट पर किसी भी बल्लेबाज़ का टिककर खेलना मुश्किल होता है और पिच के प्रकोप से कभी भी उसकी पारी भस्म हो सकती है।
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