क्रिकेट जगत में शोक, पूर्व क्रिकेटर का 67 साल की उम्र में निधन, टेस्ट डेब्यू के लिए शादी तक टाल दी थी
इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर टोनी पिगॉट का 67 साल की उम्र में देहांत हो गया है। टोनी के निधन से क्रिकेट जगत में शोक है।

इंग्लैंड से बड़ी खबर सामने आई है। इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर टोनी पिगॉट का 67 साल की उम्र में निधन हो गया। उनके जाने से इंग्लिश काउंटी क्रिकेट में शोक की लहर दौड़ गई है। टोनी पिगॉट ने साल 1978 में महज 20 साल की उम्र में ससेक्स के लिए डेब्यू किया था और अपने करियर की शुरुआत को उन्होंने यादगार बना दिया था। होव में सरे के खिलाफ मुकाबले में उन्होंने अपने पहले ही फर्स्ट क्लास विकेट को हैट्रिक में बदला।
टेस्ट डेब्यू के लिए शादी तक टाल दी
टोनी पिगॉट का इंटरनेशनल करियर भले ही छोटा रहा, लेकिन बेहद खास रहा। उन्होंने 1983-84 में इंग्लैंड के लिए अपना इकलौता टेस्ट मैच खेला। उस समय वह न्यूजीलैंड में क्लब क्रिकेट खेल रहे थे, तभी चोटों से जूझ रही इंग्लिश टीम को उनकी जरूरत पड़ी। इस टेस्ट मैच की खास बात यह भी रही कि पिगॉट को इसके लिए अपनी शादी तक टालनी पड़ी, जो उसी मैच के बाद सोमवार को तय थी।
इंजरी ने खत्म किया करियर
साल 1994 में उन्होंने ससेक्स छोड़कर सरे का रुख किया, लेकिन पीठ की गंभीर चोट के कारण उन्हें 1996 में संन्यास लेना पड़ा। इसके बाद वह अपनी होम काउंटी ससेक्स लौटे और सेकेंड टीम के कोच बने। हालांकि, क्रिकेट में उनका योगदान यहीं नहीं रुका। अगले ही साल बड़े बदलाव के बाद उन्हें ससेक्स का चीफ एग्जीक्यूटिव बनाया गया। टोनी पिगॉट के नेतृत्व में ससेक्स क्रिकेट क्लब ने ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की। क्लब ने स्थायी फ्लडलाइट्स लगाने वाला पहला काउंटी क्लब बनने का गौरव हासिल किया। इसके बाद साल 2003 में ससेक्स अपनी पहली काउंटी चैंपियनशिप का खिताब जीतने में सफल रही।
क्रिकेट जगत ने दी श्रद्धांजलि
2003 की चैंपियन टीम के कप्तान क्रिस एडम्स ने ससेक्स की वेबसाइट पर भावुक श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा- टोनी क्लब के इतिहास के सबसे बड़े बदलाव लाने वाले शख्स थे। यह न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि पूरे ससेक्स और क्रिकेट परिवार के लिए बेहद दुखद दिन है। एडम्स ने आगे कहा कि उनकी जिंदगी को सही दिशा देने में टोनी की बहुत बड़ी भूमिका रही। 1998 में ससेक्स से जुड़ने की सबसे बड़ी वजह वही थे। हमेशा पॉजिटिव रहने वाले, बेहद प्यारे इंसान थे, जिन्हें हर कोई याद करेगा।
आखिरी सालों में भी क्रिकेट से रहा जुड़ाव
1999 में CEO पद छोड़ने के बाद पिगॉट ने काउंटी क्रिकेट में पिच इंस्पेक्टर और मैच रेफरी जैसी कई भूमिकाएं निभाईं। खराब सेहत के बावजूद उन्होंने नवंबर 2025 में अपनी आत्मकथा ‘Lester and the Deckchair Revolution’ भी प्रकाशित की। टोनी पिगॉट का योगदान सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने प्रशासन और नेतृत्व के जरिए भी ससेक्स क्रिकेट को नई पहचान दी।
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