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Hindi News खेल अन्य खेल अंडर-17 फुटबॉल टीम के इस खिलाड़ी को 17 साल की उम्र में ही परिवार का पेट भरने के लिए नौकरी की तलाश

अंडर-17 फुटबॉल टीम के इस खिलाड़ी को 17 साल की उम्र में ही परिवार का पेट भरने के लिए नौकरी की तलाश

सरकार ने कहा कि वह अपने परिवार की मदद करना चाहते हैं और इसी कारण वह सिर्फ 17 साल के होने के बाद भी नौकरी की तलाश में हैं। उन्होंने कहा, "हर राज्य ने जैसे मणिपुर, मिजोरम ने अपने खिलाड़ियों को लाखों रूपये के नगद पुरस्करा दिए हैं।

Abhijeet Sarkar- India TV Hindi Abhijeet Sarkar

कोलकाता: भारतीय टीम के मिडफील्डर अभिजीत सरकार और फॉरवर्ड रहीम अली का कहना है कि फीफा अंडर-17 विश्व कप में हासिल किया गया अनुभव आने वाले दिनों में उनके काफी काम आएगा और वे इस कभी भूलेंगे नहीं। भारत का विश्व कप का सफर ग्रुप दौर के साथ ही खत्म हो गया था।

ग्रुप-ए में भारत को अमेरिका, कोलंबिया और घाना ने मात दी थी, लेकिन टीम के प्रदर्शन ने सभी का दिल जीता था। घर लौटने के बाद बंगाल के इन लड़कों ने शुक्रवार को कहा कि विश्व कप का अनुभव उन्हें भविष्य में मदद करेगा। अली ने संवाददाताओं से कहा, "मैंने यहां काफी कुछ सीखा और इससे मुझे भविष्य में बेहतर करने में मदद मिलेगी।"

सरकार ने कहा कि वह अपने परिवार की मदद करना चाहते हैं और इसी कारण वह सिर्फ 17 साल के होने के बाद भी नौकरी की तलाश में हैं। उन्होंने कहा, "हर राज्य ने जैसे मणिपुर, मिजोरम ने अपने खिलाड़ियों को लाखों रूपये के नगद पुरस्करा दिए हैं। बंगाल भारतीय फुटबाल का घर है। हमने काफी कुछ किया है और मुझे लगता है कि हम भी ईनाम के हकदार हैं। मुझे उम्मीद है कि राज्य सरकार हमारी मदद करेगी।"

सरकार ने कोलंबिया के खिलाफ लगभग गोल कर दिया था, लेकिन गेंद गोलपोस्ट से टकरा कर वापस आ गई थी। कोलंबिया ने भारत को इस मैच में 2-1 से मात दी थी। सरकार ने कहा, "हम सभी ने यहां काफी कुछ सीखा। हम इस पल को कभी नहीं भूलेंगे। कोलंबिया के खिलाफ मुझे बेहतरीन मौका मिला था, लेकिन वो स्वर्णिम अवसर मेरे हाथ से चला गया। मैं अभी भी उस पल को नहीं भूल सकता हूं।" उन्होंने साथ ही बड़े फुटबाल क्लब के साथ खेलने की इच्छा भी जाहिर की।

उन्होंने कहा, "अब यह समय है जब हमें अगले स्तर पर जाना चाहिए और भारत के सीनियर खिलाड़ियों के साथ खेलना चाहिए लेकिन उससे पहले मैं एक अच्छे क्लब में जाना चाहता हूं। "मैं साथ ही एक नौैकरी की तलाश में भी हूं। मेरे माता-पिता बूढ़े हो गए हैं और मुझे उनकी देखभाल करनी है। अगर सरकार मुझे सहायता करती है तो यह मेरे लिए बड़ी बात होगी।"

सरकार बंगाल के हूगली जिले के बांडेल इलाके से आते हैं। उन्होंने कहा, "विश्व कप तक का सफर काफी मुश्किल था। बचपन से मैंने काफी चीजें कुरवान की हैं। मेरे माता-पिता और कोच ने मुझे हमेशा समर्थन दिया है।"

उन्होंने कहा, "ऐसा भी समय था जब मेरे पास जूते भी नहीं थे। मेरे कोच ने मुझे जूते लाकर दिए। मैं उन मुश्किल दिनों को कभी नहीं भूल सकता। पिताजी ने कभी भी मुझे न नहीं कहा तब भी नहीं जब वो असमर्थ होते थे। मैं अपने माता-पिता का आभारी हूं।" इन दोनों के साथ डिफेंडर जितेंद्र सिंह भी शुक्रवार को वापस अपने शहर आए। उन्होंने कहा, "नॉकआउट में नहीं जाने के बाद मैं पिछली रात सो नहीं सका।"