GPS Spoofing ने दिल्ली एयरपोर्ट पर मचाई अफरा-तफरी, कई फ्लाइट जयपुर हुए डायवर्ट, जानें क्या है ये टेक्नोलॉजी
दिल्ली एयरपोर्ट पर मंगलवार 5 नवंबर की शाम को अफरा-तफरी मच गई। दिल्ली आने वाली कई फ्लाइट्स या तो लेट थी या फिर उन्हें जयपुर डायवर्ट किया जा रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसा GPS Spoofing की वजह से हुआ है। आइए, जानते हैं क्या है ये टेक्नोलॉजी?

मंगलवार 5 नवंबर की शाम को दिल्ली एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। दिल्ली आने वाली कई फ्लाइट्स को जयपुर डायवर्ट कर दिया गया। दिल्ली आने वाली एयर इंडिया की फ्लाट्स 1 घंटे से ज्यादा लेट हो गई। विमानन कंपनियों ने इसकी वजह तकनीकी खराबी बताई है। सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली एयरपोर्ट पर ऐसा GPS Spoofing की वजह से हुआ है। यह एक ऐसी तकनीक है जिसकी मदद से सैटेलाइट नेविगेशन सिग्नल को मैनुपुलेट किया जा सकता है।
हालांकि, यह पहला मामला नहीं है जब GPS Spoofing की वजह से एयरपोर्ट का ऑपरेशन प्रभावित हुआ है। पिछले महीने भी मिडिल ईस्ट में वियाना से दिल्ली आने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट को दुबई डायवर्ट किया गया। बाद में पता चला कि ऐसा करप्ट सिग्नल यानी GPS Spoofing की वजह से हुआ है। एयरक्राफ्ट सिस्टम में मौजूद ऑटोपायलट, ऑटोथ्रस्ट, फ्लाइट डायरेक्ट और ऑटोलैंड सिस्टम इसकी वजह से फेल होए। पायलट को फ्लाइट को मैनुअली उड़ाना पड़ा और दुबई में सुरक्षित लैंड करवाना पड़ा।
क्या है GPS Spoofing?
यह भी एक तरह की हैकिंग है, जिसमें जीपीएस सिग्नल को मैनुपुलेट किया जाता है। दिल्ली एयरपोर्ट पर मंगलवार को इसी की मदद से कंजेशन दिखाया गया, जिसकी वजह से फ्लाइट लैंड करने में देरी हुई और कई फ्लाइट्स को नजदीकी जयपुर एयरपोर्ट पर डायवर्ट कर दिया गया। ग्लोबल एयरलाइंस ऑपरेशन पिछले कुछ सालों से इसकी वजह से प्रभावित हुई है, जो सुरक्षा के लिए बड़ा मुद्दा है। पहले जीपीएस स्पूफिंग वाले मामले ज्यादातर इंटरनेशनल रूट पर देखने को मिले थे लेकिन अब भारत में ऑपरेट होने वाले फ्लाइट्स भी इसकी जद में आ गए।
TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार शाम को दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर कंजेशन देखने को मिला है। एयरपोर्ट के आसपास हवाओं के डायरेक्शन में हुए इस अचानक बदलाव की वजह से इनकमिंग फ्लाइट्स को जयपुर डायवर्ट किया गया, जबकि दिल्ली एयरपोर्ट के सभी चारों रनवे उस दौरान पूरी तरह से ऑपरेशनल थे। फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट Flightradar24 की रिपोर्ट के मुताबिक, IGI एयरपोर्ट नाइट ऑपरेशन प्रभावित होने के मामले में दुनिया में काठमांडु के बाद दूसरे नंबर पर है। कई Air India और Indigo के फ्लाइट्स यहां से डायवर्ट किए गए।
एक सीनियर पायलट ने GPS Spoofing के बारे में बताया कि आगमन यानी Arrivals के लिए ज्यादातर एयरक्राफ्ट GPS बेस्ड एरिया नेविगेशन को फालो करती हैं। जीपीएस स्पूफिंग में एयरक्राफ्ट के नेविगेशन क्षमता घट जाती है, जिसकी वजह से कंट्रोलर्स को मैनुअली मेनटेन किया जाता है, ताकि विमानों के बीच एक सुरक्षित दूरी बनी रहे।
कैसे काम करता है GPS स्पूफिंग?
GPS Spoofing में हैकर्स फर्जी जीपीएस सिग्नल को ग्राउंड बेस्ड सोर्स से प्रभावित करते हैं। ऐसे में रियल सैटेलाइट डेटा में कंजेशन दिखता है, जिसकी वजह से फ्लाइट उड़ाने वाले पायलट को विमान उतारने के लिए सही पोजीशन नहीं मिल पाता है। उदाहरण के तौर पर इसमें अगर कोई फ्लाइट लखनऊ के ऊपर उड़ रहा है तो इसकी वजह से वो फ्लाइट की कोकपिट के एंटिना में पटना का सिग्नल दिखाएगा। इसकी वजह से किसी एयरक्राफ्ट की पोजीशन महज कुछ सेकेंड्स में 335 किलोमीटर बदल जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में जीपीएस सिग्नल जैमिंग के 4.3 लाख मामले सामने आए, जो 2023 के मुकाबले 62% तक ज्यादा रहे हैं।
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