A
Hindi News उत्तर प्रदेश यूपीः लंगूर ने साड़ी खींचकर रोका डीएम का रास्ता, डीएम साहिबा बोलीं-'नो मटरू, मैं यहीं हूं', वीडियो वायरल

यूपीः लंगूर ने साड़ी खींचकर रोका डीएम का रास्ता, डीएम साहिबा बोलीं-'नो मटरू, मैं यहीं हूं', वीडियो वायरल

कभी-कभी खबरें हेडलाइन बनने से पहले दिल को छू लेती हैं। कभी कोई आदेश, कोई कार्रवाई नहीं, बस एक छोटा-सा पल, जो इंसानियत की बड़ी तस्वीर दिखा देता है। कभी सुर्खियां किसी बड़े फैसले से नहीं, एक छोटे से मानवीय पल से सज जाती हैं। बागपत में ऐसा ही एक दृश्य कैमरे में कैद हुआ।

लंगूर को दुलारतीं डीएम अस्मिता लाल- India TV Hindi Image Source : REPORTER लंगूर को दुलारतीं डीएम अस्मिता लाल

बागपतः उत्तर प्रदेश की चर्चित महिला आईएएस अफसर अस्मिता लाल एक बार फिर सुर्खियों में हैं। लेकिन इस बार वजह कोई प्रशासनिक सख्ती या बड़ा फैसला नहीं, बल्कि एक बेहद मानवीय और दिलचस्प पल है। मामला है बागपत का। एक कार्यक्रम के दौरान डीएम अस्मिता लाल परिसर में मौजूद थीं। माहौल सामान्य था, लोग उनसे मिलने के लिए आगे बढ़ रहे थे। तभी अचानक एक लंगूर उनके करीब आ गया। आसपास मौजूद लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही लंगूर ने डीएम की साड़ी का पल्लू पकड़ लिया—जैसे वह उन्हें जाने से रोक रहा हो।

सुरक्षा कर्मी सतर्क हुए, भीड़ एक पल को ठिठकी। लेकिन डीएम अस्मिता लाल के चेहरे पर घबराहट की जगह मुस्कान थी। उन्होंने झटके से खुद को छुड़ाने के बजाय स्थिति को सहजता से लिया। वह वहीं जमीन पर बैठ गईं। फिर प्यार से बोलीं—“नो मटरू…”

डीएम ने लंगूर को दुलाया

यह सुनते ही वहां मौजूद लोगों के चेहरे भी खिल उठे। डीएम ने हाथ आगे बढ़ाया तो लंगूर ने उनकी उंगली थाम ली। कुछ सेकंड के इस दृश्य ने माहौल का तनाव पूरी तरह खत्म कर दिया। ऐसा लगा मानो प्रशासन और प्रकृति के बीच एक अनकहा संवाद चल रहा हो। यही वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इस दृश्य को संवेदनशील प्रशासन का प्रतीक बता रहे हैं। कई यूजर्स लिख रहे हैं—“ऐसी डीएम हर जिले में होनी चाहिए।”

सामने आया वीडियो

अस्मिता लाल पहले भी बागपत में अपने जमीनी जुड़ाव और सरल व्यवहार के लिए जानी जाती रही हैं। लेकिन इस बार उनका यह अंदाज अलग था— न कोई औपचारिकता, न दूरी… बस एक सहज मुस्कान और अपनापन। साड़ी का पल्लू थामे वह लंगूर शायद यह नहीं जानता था कि वह जिले की सबसे बड़ी अधिकारी को रोक रहा है। लेकिन उस पल में न पद था, न प्रोटोकॉल—बस एक इंसान और एक बेजुबान जीव के बीच भरोसे का रिश्ता था। और शायद यही वजह है कि बागपत की ‘नो मटरू’ वाली डीएम एक बार फिर सुर्खियों में हैं—इस बार आदेशों से नहीं, अपने अपनत्व से।

 रिपोर्ट- पारस जैन, बागपत