साड़ी पहनकर बर्फ से ढके पहाड़ पर स्नोबोर्डिंग वाकई एक चुनौती भरा काम है। लेकिन नवी मुंबई की उर्मिला पाब्ले ने इसे साबित कर दिखाया है। कश्मीर के गुलमर्ग में साड़ी में स्नोबोर्डिंग करते हुए उर्मिला का वीडियो सोशल मीडिया पर इन दिनों तेजी से वायरल हो रहा है। इसे उर्मिला ने अपने सोशल मीडिया पर शेयर किया है। इस विडियो में वह अपनी साथी राइडर लिंडा के साथ नजर आ रही है। दोनों महिलाएं साड़ी पहनकर बर्फीली ढलानों पर स्नोबोर्डिंग करती नजर आ रही हैं। साड़ी और लहराती चुनरी के साथ स्नोबोर्डिंग लोगों को काफी पसंद आ रहा है। इसे 85 लाख से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं।
जिंदगी के संघर्ष को बहुत करीब से देखा
दरअसल, अक्सर ऐसा देखा गया है कि मुश्किलें इंसान को या तो तोड़कर रख देती हैं या फिर उसे इतना मजबूत बना देती हैं कि वह इतिहास रच देता है। नवी मुंबई की 21 साल की उर्मिला पाबले की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। जो उम्र बच्चों के खिलौने के साथ खेलने की होती है, उस उम्र में उन्होंने जिंदगी के संघर्ष को देखा। लेकिन आज उर्मिला स्केटबोर्डिंग और स्नोबोर्डिंग दोनों में देश का मान बढ़ा रही हैं।
बचपन में ही सिर से उठ गया था पिता का साया
उर्मिला जब पांचवीं क्लास में थीं तभी उनके पिता का निधन हो गया और घर की पूरी जिम्मेदारी उनकी मां पर आ गई। उर्मिला की मां बहुत पढ़ी-लिखी नहीं थीं लेकिन एक सिंगल मदर के तौर पर उन्होंने कभी उर्मिला के सपनों के बीच गरीबी या अपनी सीमाओं को नहीं आने दिया।
कुछ दिनों के अभ्यास में स्नोबोर्डिंग में महारथ हासिल की
'खेलो इंडिया विंटर गेम्स 2025' (गुलमर्ग) में उर्मिला ने स्नोबोर्डिंग की ट्रेनिंग इसी साल 17 फरवरी को शुरू की थी। केवल कुछ दिनों के अभ्यास के दम पर उन्होंने प्रोफेशनल एथलीट्स को टक्कर दी और कांस्य पदक जीत लिया।
स्केटबोर्डिंग में भी कमाल कर चुकी हैं उर्मिला
स्नोबोर्डिंग में आने से पहले उर्मिला स्केटबोर्डिंग में अपनी एक अलग पहचान बना चुकी हैं। 36 वें राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल जीतकर उन्होंने महाराष्ट्र का नाम रोशन किया। उन्होंने UAE के शारजाह में वर्ल्ड स्केटबोर्डिंग चैंपियनशिप में भारत को रिप्रेजेंट किया, जो ओलंपिक क्वालिफायर के तौर पर काम आया।