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Hindi News वायरल न्‍यूज कंप्यूटर के कीबोर्ड में F और J Keys पर हल्का उभार क्यों होता है? बड़े-बड़े इंजीनियर नहीं जानते जवाब

कंप्यूटर के कीबोर्ड में F और J Keys पर हल्का उभार क्यों होता है? बड़े-बड़े इंजीनियर नहीं जानते जवाब

कंप्यूटर के कीबोर्ड की F और J कुंजियों पर बना हल्का उभार ‘होमिंग बार’ कहलाता है। आज हम आपको बता रहे हैं कि आखिर इसका इस्तेमाल क्या है, और टाइपिंग के दौरान इससे कोई मदद मिलती है या नहीं।

F and J keys bump, keyboard F J keys meaning, homing bar keyboard- India TV Hindi Image Source : PEXELS REPRESENTATIONAL कंप्यूटर के कीबोर्ड में F और J कुंजियों पर उभार होता है।

F and J keys bump meaning: क्या आपने कभी कंप्यूटर के कीबोर्ड पर F और J कीज या बटन को छुआ है? अगर हां, तो आपने महसूस किया होगा कि इन पर एक छोटा सा उभार या गांठ जैसा कुछ होता है। आपको बता दें कि यह कोई डिजाइन की गलती नहीं है, बल्कि एक सोचा-समझा फीचर है जो टाइपिंग को आसान बनाता है। कई लोग, यहां तक कि बड़े-बड़े इंजीनियर भी, इसकी वजह नहीं जानते। आइए, आपको आसान भाषा में बताते हैं कि आखिर कीबोर्ड के इन दोनों कुंजियों या बटनों पर यह उभार क्यों होता है।

F और J पर दिए उभार को कहते हैं 'होमिंग बार'

बता दें कि F और J कीज पर दिए गए इस उभार को 'होमिंग बार' या 'पोजीशन की' कहते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य है कि यूजर अपनी उंगलियों को बिना नीचे देखे कीबोर्ड पर सही जगह रख सके। स्टैंडर्ड QWERTY कीबोर्ड में, F कुंजी बाएं हाथ की इंडेक्स फिंगर या तर्जनी उंगली के लिए और J कुंजी दाएं हाथ की इंडेक्स फिंगर के लिए होती है। ये दोनों 'होम रो' का हिस्सा हैं, जहां से बाकी कुंजियां आसानी से पहुंच में आ जाती हैं। जब आप अपनी इंडेक्स फिंगर इन उभारों पर रखते हैं, तो बाकी उंगलियां अपने आप सही पोजीशन में आ जाती हैं, जैसे A, S, D पर बाएं हाथ की बाकी उंगलियां और K, L, ; पर दाएं हाथ की।

टाइपराइटर के जमाने से जुड़ा है इतिहास

F और J कुंजियों पर उभार होने की वजह से आपको टाइपिंग करते वक्त पता रहता है कि आपकी उंगलियों के नीचे कौन सी कुंजिया हैं, और आप इसके चलते टच टाइपिंग, यानी कि बिना देखे तेज टाइपिंग कर सकते हैं। नंबर पैड वाले कीबोर्ड में 5 कुंजी पर भी ऐसा उभार होता है, ताकि नंबर टाइप करते समय हाथ सही जगह रहे। इस फीचर का इतिहास टाइपराइटर के जमाने से जुड़ा है। 1880 के दशक में, अमेरिकी कोर्ट स्टेनोग्राफर फ्रैंक एडवर्ड मैकगुरिन ने टच टाइपिंग की तकनीक ईजाद की, लेकिन कीबोर्ड पर उभारों का विचार बाद में आया।

1960 के दशक में कंप्यूटर के कीबोर्ड में आया

1960 के दशक में कीबोर्ड डिजाइनरों ने इसे जोड़ा, ताकि टाइपिस्ट अपनी उंगलियों को जल्दी से सेट कर सकें। बता दें कि पुराने टाइपराइटर में ऐसे उभार नहीं थे, लेकिन कंप्यूटर कीबोर्ड में यह स्टैंडर्ड बन गया। ऐपल के कीबोर्ड में एक जमाने में D और K पर ऐसे उभार थे, लेकिन ज्यादातर QWERTY कीबोर्ड F और J पर ही इस उभार का इस्तेमाल करते हैं।