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बेलेघाटा विधानसभा चुनाव: यहां से TMC मार चुकी हैट्रिक, इस बार कुणाल कुमार घोष और पार्थ चौधरी के बीच है रोचक मुकाबला

बेलेघाटा विधानसभा सीट टीएमसी का गढ़ मानी जाती है। यहां से टीएमसी ने हैट्रिक मारी है। इस बार टीएमसी ने अपना उम्मीदवार बदल दिया है। बीजेपी ने पार्थ चौधरी को चुनावी मैदान में उतारा है।

बेलाघाटा विधानसभा चुनाव- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV GFX बेलाघाटा विधानसभा चुनाव

पश्चिम बंगाल की बेलेघाटा विधानसभा सीट काफी महत्वपूर्ण है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने यहां से पूर्व राज्यसभा सांसद कुणाल कुमार घोष को उम्मीदवार बनाया है। भाजपा ने पार्थ चौधरी, सीपीएम ने परमिता रॉय और कांग्रेस ने शाहिना जावेद को चुनावी मैदान में उतारा है। टीएमसी से पारेश पॉल यहां से हैट्रिक मार चुके हैं। अब टीएमसी ने यहां से उम्मीदवार बदला है।

हो सकता है वोटों का ध्रुवीकरण

भाजपा की ओर से पार्थ चौधरी मैदान में हैं, जो पार्टी को पिछले चुनाव से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद देते हैं। सीपीएम की परमिता रॉय और कांग्रेस की शाहिना जावेद वोटों के बंटवारे का खेल खेल सकती हैं। इस सीट वोटों का ध्रुवीकरण हुआ तो मुकाबला रोचक बन सकता है।

टीएमसी की मजबूत स्थिति

इस बार टीएमसी के कुणाल घोष को पार्टी ने भरोसा जताया है। घोष ने हाल ही में प्रचार के दौरान दावा किया कि बेलेघाटा में विकास कार्यों से टीएमसी की स्थिति मजबूत है और भाजपा का यहां कोई प्रभाव नहीं है। उन्होंने कहा, 'बंगाल में जितना विकास हुआ है, उतना कहीं नहीं। लोग बार-बार ममता बनर्जी को समर्थन दे रहे हैं।' 

पिछली बार टीएमसी ने भारी अंतर से दर्ज की जीत

पिछले विधानसभा चुनाव यानी 2021 में बेलेघाटा सीट पर टीएमसी उम्मीदवार ने जीत दर्ज की थी। टीएमसी उम्मीदवार पारेश पॉल ने भारी अंतर से जीत हासिल की थी। उन्होंने 1,03,182 वोट मिले थे जबकि भाजपा के काशीनाथ बिस्वास को 36,042 वोट ही मिले थे। सीपीएम के उम्मीदवार राजीब बिस्वास तीसरे स्थान पर रहे थे। 

इन तीन बार यहां से जीती टीएमसी

इस सीट पर TMC की पकड़ काफी मजबूत रही है। 2021 में TMC ने न केवल अपनी जीत बचाई, बल्कि वोट शेयर में भी सुधार किया। भाजपा ने 2016 की तुलना में कुछ सुधार दिखाया, लेकिन TMC की लोकप्रियता के आगे नहीं टिक सकी। वहीं, साल 2011, 2016 और 2021 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी से पारेश पॉल जीत दर्ज की थी।