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बंगाल में तृणमूल के खिलाफ माहौल बनाने की तैयारी, बीजेपी 9 अलग-अलग जगहों से शुरू करेगी परिवर्तन यात्राएं

भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ 1 मार्च से 9 परिवर्तन यात्राएं शुरू करेगी। ये यात्राएं सूबे में अलग-अलग जगहों से निकलेंगी और अंत में एक रैली का आयोजन किया जाएगा जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संबोधित करेंगे।

BJP Parivartan Yatra West Bengal, West Bengal Assembly Election 2026- India TV Hindi Image Source : PTI FILE बीजेपी बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ माहौल बनाने के लिए परिवर्तन यात्राएं शुरू करेगी।

कोलकाता: भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ माहौल बनाने की पूरी कोशिश कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पार्टी 1 मार्च से राज्य में परिवर्तन यात्राएं शुरू करेगी। ये यात्राएं पश्चिम बंगाल में 9 अलग-अलग जगहों से शुरू होंगी। यात्राओं के अंत में एक बड़ी रैली का आयोजन किया जाएगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोगों को संबोधित करेंगे। इन परिवर्तन यात्राओं में गृहमंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस समेत कई बड़े नेता शामिल होंगे।

क्या है बंगाल का मौजूदा सियासी माहौल?

पश्चिम बंगाल में फिलहाल तृणमूल कांग्रेस की सरकार है, लेकिन चुनाव से पहले माहौल गर्म है। तृणमूल पर भ्रष्टाचार, हिंसा और तुष्टिकरण के आरोप लग रहे हैं। सूबे में बीजेपी मजबूती से उभर रही है, जो बेरोजगारी, औद्योगीकरण और विकास जैसे मुद्दों पर जोर दे रही है। पार्टी शिक्षित, शहरी और पेशेवर वर्ग को जोड़ने की कोशिश कर रही है, जो टीएमसी की योजनाओं से इतने खुश नहीं हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि भले ही पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल एक बड़ी ताकत है, लेकिन हुमायूं कबीर का पार्टी से अलग जाना, बांग्लादेश से होने वाली घुसपैठ और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे जनता में बीजेपी को एक मजबूत आधार दे सकती है। 

2021 के विधानसभा चुनावों में क्या हुआ था?

2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने शानदार जीत हासिल की और 215 सीटें जीतकर सरकार बनाई। ममता बनर्जी की अगुवाई में पार्टी ने 48 प्रतिशत वोट पाए। बीजेपी ने भी विधानसभा चुनावों का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और 2016 की 3 सीटों से बढ़कर 77 सीटें जीतीं और 38 प्रतिशत वोट हासिल किए। इसके साथ ही पार्टी सूबे में पहली बार मुख्य विपक्षी दल बनी। वहीं, 2021 में लेफ्ट-कांग्रेस गठबंधन को करारी हार मिली, और इनके हाथ कोई सीट नहीं लगी। इन चुनावों में जीत के साथ ममता पहले से भी मजबूत बनकर उभरीं, लेकिन 2026 में उनके लिए चुनौती आसान नजर नहीं आ रही है।