Krishnanagar Uttar Election Result 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में आज नतीजों का दिन है। सुबह आठ बजे वोटों की गिनती शुरू हुई और अब सभी सीटों पर रुझाने आने शुरू हो चुके हैं। कृष्णानगर उत्तर सीट पर शुरुआती रुझानों में बीजेपी और टीएमसी के बीच कड़ी टक्कर नजर आ रही है। राज्य की अन्य सीटों पर भी असली मुकाबला इन्हीं दोनों पार्टियों के बीच रहा है। कृष्णानगर उत्तर में पिछला चुनाव बीजेपी ने जीता था, लेकिन विधायक मुकुल रॉय टीएमसी के ज्यादा करीब नजर आए। इस वजह से इस बार इस सीट के नतीजे पर सभी की निगाहें बनी हुई हैं।
पश्चिम बंगाल में इस चुनाव से पहले एसआईआर हुआ और इसे लेकर जमकर बवाल भी हुआ। बीजेपी ने कहा कि यह वोटर लिस्ट का शुद्धिकरण है। वहीं, टीएमसी ने कहा कि जबरन लोगों का नाम वोटर लिस्ट से काटा जा रहा है। वहीं, चुनाव आयोग ने साफ किया कि यह प्रक्रिया जरूरी है और पहले भी होती रही है। इसके बाद दो चरणों में मतदान हुआ और दोनों चरणों में जमकर वोटिंग हुई। इस पर बीजेपी ने कहा कि ममता के खिलाफ गुस्से में लोग वोट करने उतरे। वहीं, टीएमसी ने कहा कि एसआईआर के खिलाफ गुस्से में लोगों ने बीजेपी के खिलाफ वोट किया है।
किसके बीच मुकाबला?
कृष्णानगर उत्तर में सात उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई। इनमें सीपीआईएम के अद्वैता बिस्वास, निर्दलीय उम्मीदवार अमितवा नंदी, कांग्रेस के अर्घ्य गोन, बसपा के बिधान हल्दर, एसयूसीआई(सी) के जॉयदीप चौधरी, तृणमूल कांग्रेस के सोमनाथ दत्ता और भाजपा के तारकनाथ चटर्जी शामिल हैं। असली लड़ाई बीजेपी और टीएमसी उम्मीदवार के बीच ही रही।
कृष्णानगर उत्तर का इतिहास
भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर बसे कृष्णानगर में 1951 से चुनाव हो रहे हैं। पहले पूरे नगर की एक सीट थी। इसे बाद में पूर्व और पश्चिम में बांट दिया गया, लेकिन कुछ समय बाद इसे फिर एक कर दिया गया। 2011 में इसे उत्तर और दक्षिण में बांट दिया गया। इसके बाद से उत्तर की सीट लगातार दो बार टीएमसी के खाते में गई। 2019 लोकसभा चुनाव में इस सीट पर बीजेपी को बढ़त मिली और 2021 विधानसभा चुनाव में बीजेपी के टिकट पर मुकुल रॉय जीते। 2024 लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी उम्मीदवार को यहां से 50 हजार से ज्यादा वोटों की बढ़त मिली थी। मुकुल रॉय के टीएमसी में वापस लौटने के बाद ममता बनर्जी को जीत का भरोसा नहीं था। खुद मुकुल को भी दोबारा जीत का भरोसा नहीं था। इसी वजह से उन्होंने बीजेपी विधायक के रूप में इस्तीफा देकर टीएमसी के टिकट पर चुनाव नहीं लड़ा। इस सीट पर पिछले तीन चुनाव से बीजेपी हर बार टीएमसी पर हावी रही है।