Mamata Banerjee Early Career: पश्चिम बंगाल की सियासत में Mamata Banerjee का उभार दिलचस्प है। उन्होंने पहली बार नेशनल लेवल पर सुर्खियां तब बटोरीं, जब वह 1984 का लोकसभा चुनाव लड़ीं और जाधवपुर सीट पर लेफ्ट के दिग्गज नेता Somnath Chatterjee को हराकर सबको हैरान कर दिया। इस विजय ने ममता बनर्जी को भारत की सबसे युवा सांसदों में शुमार कर दिया था और वह रातों-रात सियासत का बड़ा चेहरा बन गई थीं।
जब खून से लाल हो गई थी ममता बनर्जी की साड़ी
ममता बनर्जी की राजनीतिक करियर का एक बड़ा मोड़ 16 अगस्त 1990 को भी आया, जब कोलकाता के हाजरा क्षेत्र में एक रैली के दौरान उनके ऊपर जानलेवा हमला हुआ था। दरअसल, कांग्रेस ने उस दिन पश्चिम बंगाल बंद का आह्वान किया था और ममता बनर्जी खुद रैली को लीड कर रही थीं। इसी दौरान हुई हिंसक झड़प में एक हमलावर ने उनके सिर पर रॉड से वार कर दिया था। जिससे उनकी सफेद साड़ी खून से लाल हो गई और सिर पर गंभीर चोट लग गई थी।
सिर पर पट्टी बांध लेफ्ट के खिलाफ उतरीं ममता
ममता बनर्जी को इस घटना ने और मजबूत कर दिया। हॉस्पिटल से बाहर आते ही ममता सिर पर पट्टी बांधकर फिर सड़क पर लेफ्ट सरकार के खिलाफ उतर गईं। इस अटैक के बाद ममता का लेफ्ट के साथ टकराव खुलकर सामने आ गया। इसके बाद, ममता बनर्जी, लेफ्ट सरकार के खिलाफ विपक्ष की सबसे मजबूत आवाज बनकर उभरीं।
ममता के सामने सरकार बचाने की चुनौती
शायद ममता बनर्जी का इसी संग्राम ने ही उन्हें आगे चलकर पश्चिम बंगाल की सत्ता तक पहुंचाया, जहां उन्होंने दशकों पुरानी लेफ्ट सरकार को चुनौती दी और खुद को एक मजबूत नेत्री के तौर पर स्थापित कर लिया। ममता बनर्जी, 2011 से लगातार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हैं और अब उनके सामने 2026 के विधानसभा चुनाव में अपनी सरकार बचाने की चुनौती है।
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