Ranibandh Election Result 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे आने शुरू हो चुके हैं। रानीबांध सीट पर शुरुआती रुझानों में बीजेपी और टीएमसी के बीच कड़ी टक्कर नजर आ रही है। राज्य की अन्य सीटों पर भी असली मुकाबला इन्हीं दोनों पार्टियों के बीच रहा है। रानीबांध में पिछले दो विधानसभा चुनाव तृणमूल कांग्रेस जीते थे और इस बार ममता की पार्टी ने जीत की हैट्रिक लगाने के लिए हर दांव आजमाया है।
पश्चिम बंगाल में इस बार बंपर वोटिंग हुई है। बीजेपी और टीएमसी दोनों पार्टियां इसे अपनी जीत से जोड़कर देख रही हैं। बीजेपी का कहना है कि बंगाल की जनता ने बदलाव के लिए मतदान किया है। कई चुनावों में यह पैटर्न भी देखा गया है कि ज्यादा मतदान होने पर सत्ता परिवर्तन होता है। वहीं, टीएमसी ने दावा किया कि एसआईआर में वोट कटने से नाराज जनता ने बीजेपी के खिलाफ मतदान किया है।
किसके बीच मुकाबला?
टीएमसी ने इस सीट पर तनुश्री हंसदा और बीजेपी ने क्षुदिराम टुडू को उम्मीदवार बनाया है। इन्हीं दोनों के बीच कांटे की टक्कर मानी जा रही है। कांग्रेस ने यहां से गुरुपदा सरदार, सीपीआईएम ने देबलीना हेम्ब्रम, एजेयू ने महेश्वर बेसरा, एपीआई ने मोनोरंजन बेसरा और एसयूसीआईसी ने रंजन लाल टुडू को टिकट दिया है। इसके अलावा फुलचंद हंसदा, गोपाल चंद्र किस्कु, गौर हेमब्रम, सुरजीत बास्के, सरस्वती सरदार, बाबूराम किस्कू निर्दलीय उम्मीदवार हैं।
रानीबांध का इतिहास
रानीबांध सीट पिछले दो चुनाव से टीएमसी के खाते में जा रही है, लेकिन बीजेपी का वोट शेयर लगातार बढ़ा है। इस सीट पर आखिरी चुनाव 2024 में हुए थे। तब टीएमसी ने बढ़त हासिल की थी। इससे पहले 2021 में भी टीएमसी ने जीत हासिल की थी। हालांकि, पिछले एक दशक में बीजेपी का वोट बैंक इस सीट पर तेजी से बढ़ा है। ऐसे में एसआईआर में मतदाताओं की संख्या में कटौती के बाद यहां के समीकरण बदले हैं। 1962में बनी इस सीट पर 15 विधानसभा चुनाव हुए हैं। सबसे ज्यादा नौ बार सीपीआईएम को जीत मिली है। कांग्रेस और टीएमसी ने दो-दो बार यहां से जीत हासिल की है। हालांकि, कांग्रेस ने लंबे समय से यहां कोई चुनाव नहीं जीता है। असली मुकाबला राज्य की अन्य सीटों की तरह बीजेपी और टीएमसी के बीच है। 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने बढ़त हासिल की थी। 2014 में टीएमसी ने सीपीआईएम और 2009 में सीपीआईएम ने कांग्रेस को हराया था।