A
  1. Hindi News
  2. पश्चिम बंगाल
  3. खुलकर सामने आई तृणमूल कांग्रेस की अंदरूनी कलह, काकोली घोष ने कल्याण बनर्जी पर लगाए बदसलूकी के आरोप

खुलकर सामने आई तृणमूल कांग्रेस की अंदरूनी कलह, काकोली घोष ने कल्याण बनर्जी पर लगाए बदसलूकी के आरोप

तृणमूल कांग्रेस सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने सांसद कल्याण बनर्जी पर संसद में बदसलूकी और महिला विरोधी व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की। चुनावी हार के बाद TMC में बढ़ती अंदरूनी कलह और असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है।

Kakoli Ghosh Dastidar, Kalyan Banerjee controversy, TMC internal conflict, Trinamool Congress news- India TV Hindi
Image Source : PTI एक कार्यक्रम में ममता बनर्जी को सुनतीं काकोली घोष और कल्याण बनर्जी।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सत्ता जाने के बाद तृणमूल कांग्रेस की अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने अपने ही सहयोगी सांसद कल्याण बनर्जी पर संसद के अंदर बदसलूकी, गाली-गलौज और महिला सांसदों के प्रति अपमानजनक व्यवहार करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर इस मामले में कार्रवाई की मांग की है। बारासात से 4 बार सांसद रह चुकीं काकोली घोष ने अपने पत्र में लिखा कि कल्याण बनर्जी ने कई बार लोकसभा के भीतर उनके साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया।

औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की अनुमति मांगी

काकोली ने आरोप लगाया कि यह सिर्फ उनके साथ नहीं, बल्कि कई महिला सांसदों के खिलाफ 'महिला विरोधी मानसिकता' का हिस्सा है और ऐसे व्यवहार को सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की अनुमति भी मांगी है। हालांकि, इस मामले पर अभी तक न तो कल्याण बनर्जी और न ही TMC नेतृत्व की ओर से कोई प्रतिक्रिया आई है। बता दें कि काकोली की शिकायत ऐसे समय आई है जब हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में पार्टी को झटका लगने के बाद TMC के भीतर असंतोष लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है और पार्टी के नेताओं के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं।

काकोली ने सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दिया

बता दें कि कल्याण बनर्जी की शिकायत से ठीक एक दिन पहले ही काकोली घोष ने पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि उन्होंने सांसद पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता नहीं छोड़ी है। काकोली ने टीएमसी प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी को लिखे पत्र में अखिल भारतीय तृणमूल महिला कांग्रेस की अध्यक्ष समेत सभी जिम्मेदारियों से मुक्त करने का अनुरोध किया। अपने इस्तीफे वाले पत्र में काकोली ने पार्टी के अंदर के माहौल पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने राशन घोटाले, भर्ती अनियमितताओं और वित्तीय व प्रशासनिक गड़बड़ियों का जिक्र करते हुए कहा कि इन मामलों से आम लोगों के बीच गुस्सा और अविश्वास बढ़ा है।

आरजी कर रेप मामले पर भी बोलीं काकोली घोष

आरजी कर मेडिकल कॉलेज की पूर्व छात्रा रहीं काकोली घोष ने वहां एक महिला डॉक्टर के रेप और हत्या मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस घटना और कथित लीपापोती की कोशिश ने उन्हें व्यक्तिगत तौर पर झकझोर दिया। अपने पत्र में काकोली घोष ने बिना नाम लिए एक वरिष्ठ टीएमसी सांसद पर भी हमला बोला, जिसे कल्याण बनर्जी की ओर इशारा माना जा रहा है। उन्होंने लिखा, 'ऐसी जिम्मेदारी में बने रहने का कोई मतलब नहीं, जहां एक असभ्य और अभद्र सांसद द्वारा महिला सांसद के साथ किए गए गलत व्यवहार को रोका न जा सके और जहां शीर्ष नेतृत्व से कोई समर्थन या सहानुभूति न मिले।'

चीफ व्हिप पद से हटाए जाने के बाद बढ़ी नाराजगी

दरअसल हाल ही में काकोली घोष को TMC संसदीय दल के चीफ व्हिप पद से हटाया गया था और यह जिम्मेदारी फिर से कल्याण बनर्जी को दे दी गई थी। बताया जाता है कि इस फैसले से वह काफी नाराज थीं। काकोली घोष ने चुनावी रणनीति संभालने वाली संस्था I-PAC के बढ़ते प्रभाव पर भी सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि अगर संगठन पर 'अस्पष्ट और गैर-लोकतांत्रिक प्रभाव' हावी होने लगे तो यह पार्टी की विचारधारा और परंपरा के लिए अच्छा नहीं है। उनके इस बयान से पार्टी के अंदर लंबे समय से चल रही उस बहस को भी हवा मिल गई है, जिसमें बाहरी रणनीतिकारों के बढ़ते दखल पर सवाल उठते रहे हैं।

शुभेंदु अधिकारी की बैठक में पहुंचने से बढ़ी हलचल

राजनीतिक हलकों में हलचल उस समय और बढ़ गई जब काकोली घोष भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी की प्रशासनिक समीक्षा बैठक में शामिल हुईं। बताया गया कि पार्टी नेतृत्व ने नेताओं को उस बैठक से दूर रहने को कहा था, लेकिन इसके बावजूद वह वहां पहुंचीं। इस बैठक में उनके साथ TMC के 6 विधायक भी मौजूद थे। बाद में शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि काकोली घोष ने उनसे कहा कि उन्हें 'आखिरकार आजादी मिल गई।' हालांकि काकोली घोष ने अपने बचाव में कहा कि प्रशासन किसी एक दल का नहीं होता और जनप्रतिनिधियों को ऐसे कार्यक्रमों को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखना चाहिए।

तृणमूल कांग्रेस छोड़कर नहीं जा रही हैं काकोली घोष

इन तमाम घटनाक्रमों के बावजूद काकोली घोष ने साफ किया है कि वह पार्टी नहीं छोड़ रही हैं और एक सामान्य कार्यकर्ता के तौर पर काम करती रहेंगी। लेकिन बंगाल की राजनीति में जिस तरह प्रतीकों और संकेतों को महत्व दिया जाता है, उसमें संगठन के सभी पद छोड़ना और नेतृत्व पर सवाल उठाना TMC के भीतर गहराते असंतोष का बड़ा संकेत माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी हार के बाद TMC के अंदर जो बेचैनी बढ़ रही है, काकोली घोष और कल्याण बनर्जी के बीच टकराव उसी का खुला उदाहरण बनकर सामने आया है।