कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की करारी हार का असर अब पार्टी में कलह के रूप में सामने आ रहा है। पार्टी ने अपने तीन प्रवक्ताओं को 6 साल के लिए सस्पेंड कर दिया। टीएमसी ने यह कार्रवाई पार्टी विरोधी टिप्पणी करने के आरोप में की है।
कोहिनूर मजूमदार, रिजू दत्ता और कार्तिक घोष सस्पेंड
एक बयान के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अनुशासन का उल्लंघन करने के आरोप में प्रवक्ता कोहिनूर मजूमदार, रिजू दत्ता और कार्तिक घोष को निलंबित कर दिया गया है। तृणमूल कांग्रेस ने यह कार्रवाई विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद नेतृत्व और पार्टी की चुनावी रणनीति की आलोचना करने वाली टिप्पणियों के लिए पांच प्रवक्ताओं को कारण बताओ नोटिस जारी करने के कुछ दिनों बाद की है। पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा की 293 सीट पर हुए चुनाव में बीजेपी ने 207 सीट पर जीत दर्ज की है जबकि 15 साल से सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों पर सिमट गई।
पार्टी की इस करारी हार की तिलमिलाहट तृणमूल के अंदर साफ नजर आने लगी। पार्टी के अंदर से विरोध के स्वर उठने लगे थे। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ भी पार्टी के अंदर से बयान आने लगे। इसके बाद पार्टी ने इनके खिलाफ एक्शन लिया और तीन प्रवक्ताओं को 6 साल के लिए सस्पेंड कर दिया। पार्टी की ओर से सांसद डेरेक ओब्रायन ने इन्हें कारण बताओं नोटिस जारी किये थे, जो पार्टी की अनुशासनात्मक समिति के सदस्य हैं।
कृष्णेंदु चौधरी और पापिया घोष को नोटिस
तृणमूल ने तीन प्रवक्ताओं के निलंबन के अलावा कृष्णेंदु चौधरी और पापिया घोष को भी नोटिस जारी किए गए थे। पार्टी ने 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा था और पूछा था कि ''पार्टी अनुशासन के उल्लंघन'' के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों शुरू नहीं की जानी चाहिए। तृणमूल कांग्रेस नेताओं के अनुसार, चुनावी हार के बाद कुछ प्रवक्ताओं ने सार्वजनिक रूप से पार्टी नेतृत्व के कामकाज और चुनाव अभियान की रणनीति पर सवाल उठाए थे।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ''ये टिप्पणियां सोशल मीडिया के साथ-साथ मीडिया से बातचीत के दौरान भी की गईं।'' मजूमदार ने संवाददाताओं से कहा था कि तृणमूल नेताओं को अक्सर पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी से मिलने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता था। मालदा के एक वरिष्ठ नेता चौधरी ने डायमंड हार्बर से लोकसभा सदस्य अभिषेक के कामकाज के तरीके की भी आलोचना की थी। दत्ता ने इस बीच सोशल मीडिया पोस्ट में चुनाव के बाद की हिंसा को रोकने के लिए भाजपा सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की प्रशंसा करके सबका ध्यान आकर्षित किया। ओब्रायन और अनुशासनात्मक समिति की सदस्य चंद्रिमा भट्टाचार्य ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।