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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: पहले चरण की वोटिंग आज, बीजेपी और टीएमसी ने लगाया पूरा जोर

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए चुनाव आयोग ने सुरक्षा इंतजाम बेहद कड़े हैं। इन चुनावों में बीजेपी और टीएमसी के नेताओं के तीखे बयानों के बीच मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है।

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Image Source : PTI गृह मंत्री अमित शाह और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी।

West Bengal Assembly Elections 2026 Phase 1 Voting: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के पहले चरण के लिए आज मतदान का दिन है। इस बार के चुनाव में खान-पान की आदतों, सीमा पार से घुसपैठ, समान नागरिक संहिता और संशोधित मतदाता सूची जैसे मुद्दे छाए रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस ने 23 अप्रैल को उत्तरी बंगाल के 152 निर्वाचन क्षेत्रों और राज्य के दक्षिणी हिस्से के कई जिलों में मतदान से पहले मतदाताओं को लुभाने के लिए पूरा जोर लगा दिया। निर्वाचन आयोग के अनुसार, इस चरण में 3.60 करोड़ से अधिक मतदाता मतदान कर सकेंगे। इन मतदाताओं में लगभग 1.84 करोड़ पुरुष, 1.75 करोड़ महिला और 465 तृतीय लिंग के मतदाता शामिल हैं।

पहले चरण की वोटिंग के पहले माहौल गर्म

पश्चिम बंगाल में पहले चरण की वोटिंग से ठीक पहले राजनीतिक माहौल बेहद गर्म हो गया है। एक तरफ बीजेपी नेता और गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया है कि इस बार 'कोई खेला नहीं होगा' और राज्य में बदलाव तय है, वहीं दूसरी तरफ ममता बनर्जी ने जवाब देते हुए कहा कि 'खेला तो होगा, और दुर्दांत खेला होगा।' उन्होंने इसे लोकतंत्र का 'बदला' भी बताया। बता दें कि पहले चरण में राज्य की 152 सीटों पर सुबह 7 बजे से मतदान शुरू होना है और इन सीटों पर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पोलिंग बूथ्स पर EVM पहुंच चुकी हैं, CCTV कैमरे लगाए जा चुके हैं और सुरक्षा बलों की तैनाती पूरी हो गई है।

औसतन हर 100 वोटर्स पर एक जवान

जिन 152 सीटों पर मतदान होना है उनमें उत्तर बंगाल के अलीपुरद्वार, कूच बिहार, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर तथा मालदा की 54 सीटें शामिल हैं। इसके अलावा मुर्शिदाबाद (22), बीरभूम (11), बांकुड़ा (12), पूर्व और पश्चिम मेदिनीपुर (31), पश्चिम वर्धमान (9), पुरुलिया (9) और झाड़ग्राम (4) सीटों पर भी मतदान होगा। इस बार चुनाव में सुरक्षा के बेहद कड़े इंतज़ाम किए गए हैं। पहली बार लगभग 2407 कंपनियों के साथ ढाई लाख से ज्यादा केंद्रीय सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है। यानी औसतन हर 100 वोटरों पर एक जवान मौजूद रहेगा।

सुरक्षाबलों की तैनाती गई गुना बढ़ी

मतदान को सुचारु रूप से कराने के लिए मुर्शिदाबाद में 316 कंपनियां, पूर्वी मेदिनीपुर में 273 कंपनियां, उत्तर दिनाजपुर में 132 कंपनियां तैनात की गई हैं और इसके अलावा जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार, दार्जिलिंग और अन्य जिलों में भी भारी तैनाती हुई है। बता दें कि 2021 के चुनाव में केवल 725 कंपनियां तैनात थीं, जबकि इस बार यह संख्या कई गुना बढ़ाई गई है। इसके अलावा इसके अलावा वोटिंग से 4-5 दिन पहले ही शराब की दुकानें बंद कर दी गई हैं। वोटिंग से पहले 12 घंटे बाइक पर प्रतिबंध लगा है, बाहरी लोगों को इलाकों से बाहर किया गया है और एक-एक गतिविधी की कंट्रोल रूम से मॉनिटरिंग हो रही है।

चुनाव आयोग पर ममता का हमला

ममता बनर्जी ने इन इंतज़ामों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि चुनाव को 'जंग' में बदल दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए काम कर रहा है और आम लोगों को वोट देने से रोका जा रहा है। ममता ने यह भी कहा कि BLO को निर्देश दिए गए हैं कि वे 100 में से केवल 25 लोगों को ही वोटिंग स्लिप दें, जो लोकतंत्र के खिलाफ है। वहीं सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि पहले चरण में बीजेपी 90% सीटें जीत सकती है। उन्होंने कहा कि यह बीजेपी का कोर क्षेत्र है और इस बार मुस्लिम वोटर भी बीजेपी का समर्थन करेंगे।

नंदीग्राम और मेदिनीपुर पर खास नजर

पूर्वी मेदिनीपुर की नंदीग्राम सीट सबसे हाई प्रोफाइल बनी हुई है। यहां पिछली बार सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को बेहद कम अंतर से हराया था। इस बार भी यहां बीजेपी और TMC के बीच सीधी टक्कर है। पश्चिम मेदिनीपुर की 15 सीटों पर भी मतदान होगा, जहां पिछली बार 13 सीटें TMC ने जीती थीं। खड़गपुर सदर सीट पर बीजेपी के दिलीप घोष मैदान में हैं और पार्टी को यहां जीत की उम्मीद है। मुर्शिदाबाद में 22 सीटों पर वोटिंग होगी, जहां मुस्लिम आबादी अधिक है। पिछली बार TMC ने 20 सीटें जीती थीं, लेकिन इस बार कांग्रेस और अन्य दल भी मजबूत चुनौती दे रहे हैं। मालदा की 12 सीटों पर भी मुकाबला दिलचस्प है।

पिछले चुनावों में कैसा रहा था प्रदर्शन?

पहले चरण की 152 सीटों पर पिछले चुनाव में TMC ने 92 सीटें जीती थीं, जबकि बीजेपी को 59 सीटें मिली थीं। इस बार दोनों ही दल अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में हैं। माना जा रहा है कि पहले चरण की वोटिंग बंगाल की राजनीति की दिशा तय कर सकती है। एक तरफ कड़ी सुरक्षा और चुनाव आयोग की सख्ती है, तो दूसरी तरफ नेताओं के तीखे बयान। अब यह जानने के लिए सबकी नजरें 4 मई पर ही होंगी कि आखिर इन चुनावों में जनता किसके पक्ष में फैसला सुनाती है।