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पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: TMC बनाम BJP के बीच मुकाबला, क्या हैं प्रमुख चुनावी मुद्दे?

West Bengal Election Issues: पश्चिम बंगाल का चुनाव दो चरणों में होगा और 4 मई 2026 को परिणाम का ऐलान किया जाएगा। आइए जानते हैं कि पश्चिम बंगाल के चुनावी मुकाबले में नजर आ रहीं दोनों राजनीतिक पार्टियां TMC और BJP किन मुद्दों पर चुनाव लड़ेंगी।

West Bengal Election 2026- India TV Hindi
Image Source : PTI TMC Vs BJP में पश्चिम बंगाल की जनता इस बार किसे मौका देगी?

West Bengal Election Key Issues: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी माहौल तेजी से गर्म हो रहा है। यहां मेन टक्कर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस यानी TMC और BJP के बीच बताई जा रही है। पिछले विधानसभा चुनाव 2021 में TMC ने 294 में से 213 सीटें हासिल करके लगातार तीसरी बार पश्चिम बंगाल में सरकार बनाई थी, जबकि BJP महज 77 सीटों पर सिमट गई थी और मुख्य विपक्षी दल के तौर पर उभरी थी। अब 2026 के विधानसभा चुनाव में दोनों ही पार्टियां अपनी राजनीतिक पकड़ को मजबूत करने के लिए एक्टिव हो चुकी हैं। आइए जानते हैं कि TMC और BJP किन मुद्दों पर चुनाव में फोकस कर सकती हैं।

रोजगार और आर्थिक विकास पर बहस

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में कई ऐसे सियासी मुद्दे हैं जो वोटर्स के निर्णय को प्रभावित कर सकते हैं। यहां के प्रमुख चुनावी मुद्दों में रोजगार और आर्थिक विकास शामिल हैं। विपक्ष लंबे वक्त से पश्चिम बंगाल में इंडस्ट्री की कमी और युवाओं के लिए सीमित रोजगार के मौकों को लेकर सवाल पूछता रहा है। वहीं, ममता बनर्जी की सरकार का कहना है कि इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, सड़क और सामाजिक योजनाओं के जरिए पश्चिम बंगाल की इकोनॉमी को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।

भ्रष्टाचार पर ममता सरकार को घेरने की कोशिश

करप्शन का आरोप भी ममता बनर्जी सरकार के लिए एक बड़ा विषय बना हुआ है। शिक्षक भर्ती घोटाले को लेकर TMC के कई नेताओं और अधिकारियों की जांच हुई है। विपक्ष ने इस मुद्दे को चुनावी बहस में लगातार उठाया। दूसरी तरफ TMC का मानना है कि कानून अपना काम कर रहा है। भ्रष्टाचार के दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

कानून-व्यवस्था, तुष्टिकरण और राजनीतिक हिंसा

पश्चिम बंगाल की सियासत में कानून-व्यवस्था, तुष्टिकरण और राजनीतिक हिंसा का मुद्दा भी लंबे वक्त से चर्चा में है। चुनाव के दौरान राजनीतिक टकराव और हिंसा के आरोप पहले भी लगाए जाते रहे हैं, जिसको लेकर विपक्ष पश्चिम बंगाल सरकार की आलोचना करता रहा है। वहीं, सीएम ममता बनर्जी इन आरोपों को खारिज करती रही हैं।

कल्याणकारी योजनाएं भी चुनावी सियासत का हिस्सा

इसके अलावा कल्याणकारी योजनाएं भी इलेक्टोरल पॉलिटिक्स का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ममता बनर्जी सरकार की लक्ष्मी भंडार, स्वास्थ्य साथी और स्टूडेंट्स से जुड़ी स्कीम का बड़ा लाभार्थी वर्ग है। TMC इन योजनाओं को अपनी बड़ी उपलब्धियों के रूप पेश करती है। वहीं, BJP केंद्र सरकार की योजनाओं को पश्चिम बंगाल में लागू ना करके लोगों के नुकसान की बात कहती है। ममता बनर्जी पर स्वार्थ की राजनीति करने का आरोप लगाती है।

इन सभी मुद्दों के बीच इस बार का पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव एक बार फिर राज्य की सियासत की दिशा तय करेगा और यह देखना अहम होगा कि वोटर किस मुद्दे को प्राथमिकता देते हैं। ममता बनर्जी को लगातार चौथी बार सरकार बनाने का मौका देंगे या नए विकल्प के रूप में BJP के हाथ में सत्ता की चाबी सौंपेंगे।

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