अफ्रीका के इस देश में गजब बढ़ी हिंदुओं की आबादी, 12 साल के अंदर ही दोगुनी से ज्यादा हुई
अफ्रीका का एक देश ऐसा है जहां हिंदुओं की आबादी 12 सालों में दोगुनी से ज्यादा हो गई है। 2010 में जहां यह 2.4% थी, वहीं 2022 में 5.4% पहुंच गई। इस बदलाव के पीछे सेशेल्स हिंदू कोविल संगम और नवशक्ति विनायगर मंदिर की अहम भूमिका रही है।
विक्टोरिया: अफ्रीका महाद्वीप में पड़ने वाला देश सेशेल्स अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है। यह एक द्वीपीय देश है जहां विभिन्न समुदायों को लोग मिलजुलकर रहा करते हैं। सेशेल्स में हिंदू आबादी पिछले कुछ सालों में इतनी तेजी से बढ़ी है कि हर कोई चौंक गया है। 2022 की जनगणना के मुताबिक, सेशेल्स में हिंदुओं की तादाद कुल आबादी का 5.4% हो गई है, जो 2010 में 2.4% थी। यानी सिर्फ 12 सालों में हिंदू आबादी दोगुनी से भी ज्यादा हो गई! आइए जानते हैं इस छोटे से देश में हिंदुओं की आबादी इतनी तेजी से कैसे बढ़ी।
कैसे बढ़ता गया हिंदू आबादी का ग्राफ?
सेशेल्स अपने खूबसूरत समुद्री तटों के लिए मशहूर है। इस धर्म में हिंदू धर्म दूसरा सबसे बड़ा धर्म बन चुका है। 1901 में यहां सिर्फ 332 हिंदू परिवार थे और कुल आबादी में तमिल भाषी लोग करीब 3,500 थे। बाद में विस्थापन हुआ लेकिन समय के साथ हालात बदलते चले गए। 1987 में सेशेल्स में जहां हिंदुओं की तादाद महज 506 थी, वहीं 1994 में ये बढ़कर 953 हो गई। 2002 में इस देश में 1,700 हिंदू थे, और 2010 में ये आंकड़ा 2,174 पहुंचा। लेकिन सबसे बड़ा उछाल 2010 से 2022 के बीच देखने को मिला, जब हिंदुओं की संख्या 5,508 हो गई, यानी कुल आबादी का 5.4%!
| साल | हिंदू आबादी | प्रतिशत | वृद्धि |
| 1987 | 506 | - | - |
| 1994 | 953 | 1.3% | +88.3% |
| 2002 | 1,700 | 2.1% | +78.4% |
| 2010 | 2,174 | 2.4% | +27.9% |
| 2022 | 5,508 | 5.4% | +153.4% |
सेशेल्स हिंदू कोविल संगम की अहम भूमिका
सेशेल्स में हिंदुओं की बढ़ती हुई आबादी के पीछे सेशेल्स हिंदू कोविल संगम का बड़ा हाथ है। 1984 में बनी इस संस्था ने हिंदू संस्कृति को न सिर्फ जिंदा रखा, बल्कि इसे और मजबूत किया। 1992 में नवशक्ति विनायगर मंदिर की स्थापना ने हिंदू धर्म को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। इस मंदिर में भगवान गणेश को मुख्य देवता के रूप में पूजा जाता है, और 1999 से गणेश जी यहां के प्रमुख आराध्य हैं। मंदिर में मुरुगन, नटराज, दुर्गा, श्रीनिवास पेरुमल, भैरवा और चंडीकेश्वर जैसे अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां भी स्थापित हैं, जिनके लिए खास मौकों पर पूजा-अर्चना होती है।
ताइप्पूसम कावड़ी को घोषित हुई छुट्टी
सेशेल्स में ताइप्पूसम कावड़ी उत्सव की धूम देखते ही बनती है। 1993 में मंदिर के भीतरी प्रांगण में शुरू हुआ ये उत्सव अब बाहरी प्रांगण में बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। रथ कावड़ी के साथ जुलूस निकाला जाता है, जो पूरे देश का ध्यान खींचता है। इस उत्सव की लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि 1998 से सेशेल्स सरकार ने इसे हिंदुओं के लिए आधिकारिक अवकाश घोषित कर दिया। राष्ट्रीय रेडियो और टेलीविजन पर इस उत्सव की खास कवरेज होती है, जिसमें तमिल और अंग्रेजी में इसका प्रसारण किया जाता है।
शुरू हुआ हिंदू संस्कृति का नया दौर
सेशेल्स हिंदू कोविल संगम ने सिर्फ 17 सालों में हिंदू संस्कृति को मजबूत नींव दी है। कावड़ी उत्सव के अलावा, गणेश चतुर्थी, दीवाली और अन्य हिंदू त्योहारों को भी बड़े जोश के साथ मनाया जाता है। ये आयोजन न सिर्फ हिंदू समुदाय को जोड़ते हैं, बल्कि सेशेल्स की बहु-सांस्कृतिक पहचान को भी दर्शाते हैं। संगम की कोशिशों से हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार बढ़ा है, जिसका असर नई पीढ़ी पर भी दिख रहा है। सेशेल्स जैसे छोटे से देश में, जहां कुल आबादी ही करीब एक लाख है, वहां हिंदू आबादी का इतना तेजी से बढ़ना और धर्म-संस्कृति का मजबूत होना अपने आप में एक मिसाल है।
