A
Hindi News विदेश अन्य देश सूडान में Civil War को लेकर WHO का बड़ा दावा, अर्धसैनिक बलों के कब्जे वाले इलाके में 460 लोगों की हत्या

सूडान में Civil War को लेकर WHO का बड़ा दावा, अर्धसैनिक बलों के कब्जे वाले इलाके में 460 लोगों की हत्या

डब्ल्यूएचओ ने चेतावनी दी है कि यदि सहायता न पहुंची तो महामारी का खतरा बढ़ सकता है। सूडान सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है, लेकिन सच्चाई सामने लाने के लिए स्वतंत्र जांच जरूरी है। यह संघर्ष न केवल सूडान, बल्कि पूरे अफ्रीका की स्थिरता को प्रभावित कर रहा है।

सूडान अर्धसैनिक बल (फाइल फोटो)- India TV Hindi Image Source : AP सूडान अर्धसैनिक बल (फाइल फोटो)

काहिरा: सूडान के हिंसक संघर्ष ने एक नया भयावह रूप धारण कर लिया है। संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक टेड्रोस अधनोम घेब्रेयसस ने सूडान हिंसा पर बुधवार को गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पश्चिमी दारफुर क्षेत्र के उत्तरी हिस्से में स्थित प्रांतीय राजधानी अल-फशर के एक प्रमुख अस्पताल में कथित तौर पर 460 से अधिक लोग मारे गए हैं। यह घटना तब घटी जब सप्ताहांत में सूडानी अर्धसैनिक बलों ने शहर पर कब्जा कर लिया। 


घेब्रेयसस ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा, "हम इन खबरों से स्तब्ध और गहरे सदमे में हैं। यह मानवता के खिलाफ एक अपराध है।" उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। अल-फशर शहर दारफुर क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। पिछले 500 दिनों से सैन्य घेराबंदी का शिकार रहा है। सूडान की सेना और रैपिड सपोर्ट फोर्स (आरएसएफ) के बीच चल रहे गृहयुद्ध ने इस क्षेत्र को युद्ध का मैदान बना दिया है। आरएसएफ पूर्व जनरल मोहम्मद हमदान दागलो (हेमेदती) के नेतृत्व में है। दागलो ने अप्रैल 2023 से सेना के खिलाफ विद्रोह कर दिया था। इस संघर्ष में अब तक हजारों लोग मारे जा चुके हैं और लाखों विस्थापित हो चुके हैं। 

हमले में अस्पताल को भी भारी नुकसान

अल-फशर पर आरएसएफ का कब्जा इस युद्ध का एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है, क्योंकि यह शहर दारफुर के उत्तरी हिस्से में एकमात्र प्रमुख गढ़ था जो सेना के नियंत्रण में था। पीड़ितों में अधिकांश ‘सऊदी मैटरनिटी’ अस्पताल के मरीज और उनके तीमारदार शामिल हैं, जो महिलाओं और बच्चों की स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र था। डब्ल्यूएचओ के अनुसार हमले में अस्पताल की संरचना को भारी नुकसान पहुंचा है और अब क्षेत्र में चिकित्सा सेवाएं पूरी तरह ठप हो चुकी हैं। घेब्रेयसस ने कहा कि यह घटना युद्ध अपराधों की श्रृंखला का हिस्सा लगती है, जहां नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने पहले भी दारफुर में जातीय सफाई और बलात्कार जैसे आरोपों की जांच की मांग की थी। सूडान का यह संकट वैश्विक चिंता का विषय बन चुका है। 

25 मिलियन से ज्यादा लोग भुखमरी के शिकार

संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के मुताबिक 2023 से अब तक 25 मिलियन से अधिक लोग यान करीब ढाई करोड़ जनता भुखमरी और बीमारी का शिकार है। दारफुर क्षेत्र 2003 के गृहयुद्ध से ही अशांत रहा है। अब फिर से खूनखराबे का गवाह बन रहा है। अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) ने पहले ही सूडानी नेताओं पर युद्ध अपराधों के आरोप लगाए हैं। घेब्रेयसस ने आह्वान किया कि तत्काल युद्धविराम हो और मानवीय सहायता पहुंचाई जाए। इस घटना ने वैश्विक समुदाय को झकझोर दिया है। अमेरिका, यूरोपीय संघ और अफ्रीकी संघ ने निंदा की है और शांति वार्ताओं को तेज करने की मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अल-फशर जैसे शहर गिरते रहे, तो दारफुर में लाखों लोगों का जीवन खतरे में पड़ जाएगा।(एपी)।

Latest World News