इस्लामाबाद: मुंबई हमले के मुख्य साजिशकर्ता जकीउर रहमान लखवी की आवाज के नमूने पाकिस्तान के पास होने के बावजूद, उन नमूनों का इस्तेमाल लखवी के खिलाफ सबूत के रूप में नहीं किया जा सकता। दरअसल पाकिस्तान में ऐसा कोई कानून ही नहीं है, जिससे इसकी सत्यता प्रमाणित की जा सके। समाचार-पत्र 'डॉन' की रपट के अनुसार, एक वरिष्ठ अभियोजक ने कहा, "हालांकि यह जांच में मददगार हो सकता है, लेकिन भारतीय खुफिया एजेंसी द्वारा कथित तौर पर रिकॉर्ड ऑडियो का इस्तेमाल सबूत के रूप में नहीं किया जा सकता, क्योंकि ऐसा कोई कानून नहीं है, जिसके जरिए आवाज की सत्यता साबित की जा सके।"
पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) ने कहा है कि लखवी के आवाज के नमूनों का इस्तेमाल सबूत के रूप में नहीं किया जा सकता, क्योंकि सुनवाई में उसे प्रासंगिक नहीं माना जाता।
एफआईए के विशेष अभियोजक मोहम्मद अजहर चौधरी ने कहा, "पाकिस्तान में ऐसा कोई कानून नहीं है, जिसके तहत अभियोजन पक्ष आरोपी को अपने आवाज के नमूने देने के लिए बाध्य कर सके। भारत और अमेरिका में ऐसा कोई कानून नहीं है।"
उन्होंने कहा, "हम आरोपी को आवाज के नमूने देने के लिए बाध्य नहीं कर सकते।"
वर्ष 2011 में एफआईए ने लखवी तथा मामले के सह-आरोपियों -अब्दुल वाजिद, मजहर इकबाल, हम्मद अमीन सादिक, शाहिद जमील, जमील अहमद तथा यूनस अंजुम- के आवाज के नमूने लेने के लिए इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में आवेदन दिया था, जो अब भी उच्च न्यायालय में लंबित है।
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