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बांग्लादेश बना नरक! दिसंबर में अल्पसंख्यकों पर हुए 51 हमले, जनवरी में भी बिगड़े हालात; सोती रही यूनुस सरकार

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार किया जा रहा है। धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा थमने का नाम ले रही है। बात सिर्फ बीते साल दिसंबर महीनें की करें तो यहां सांप्रदायिक हिंसा के 51 मामले सामने आए हैं।

Bangladesh Hindu- India TV Hindi
Image Source : AP Bangladesh Hindu

Bangladesh Attack On Minorities: बांग्लादेश जैसे-जैसे चुनाव की ओर बढ़ रहा है, धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं। हिंदुओं पर हो रहे लगातार हमलों की वजह से मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार सवालों के घेरे में आ गई है। बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद की ओर से जारी बयान के अनुसार, अकेले दिसंबर में सांप्रदायिक हिंसा की कम से कम 51 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें 10 हत्याएं, लूटपाट और आगजनी के 23 मामले, डकैती और चोरी की 10 घटनाएं, झूठे ईशनिंदा के आरोपों में हिरासत और यातना के 4 मामले, एक बलात्कार का प्रयास और शारीरिक हमले की 3 घटनाएं शामिल हैं। यहां अल्पसंख्यक समुदायों के घरों, मंदिरों और व्यवसायों को भी निशाना बनाया गया है।

जनवरी में भी जारी रहे हमले

बांग्लादेश में जनवरी के महीने में हिंसा बिना रुके जारी रही। 2 जनवरी को, लक्ष्मीपुर में सत्यरंजन दास की धान की फसलों में आग लगा दी गई। 3 जनवरी को, व्यवसायी खोकन चंद्र दास पर हमला किया गया। इसी दिन अपराधियों ने चट्टोग्राम और कुमिल्ला में डकैती की, परिवारों को बंधक बनाया और नकदी समेत गहने लूट लिए। 4 जनवरी को व्यापारी शुभो पोद्दार की दुकान से सोने के गहने लूट लिए गए। इसी दिन, झेनैदाह के कालीगंज में 40 वर्षीय हिंदू विधवा महिला के साथ गैंगरेप किया गया, उसे एक पेड़ से बांध दिया गया, उसके सिर के बाल मुंडवा दिए गए और उसे गंभीर यातना दी गई।

कई मामलों की जानकारी नहीं

5 जनवरी को, जशोर में एक आइस फैक्ट्री के मालिक रामा प्रताप बैरागी की गोली मारकर और गला काटकर सरेआम हत्या कर दी गई। नरसिंगदी में, किराना दुकान के मालिक मोनी चक्रवर्ती की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद ने यह भी कहा है कि ऐसी कई और घटनाएं भी हुई हैं जिनकी रिपोर्ट नहीं की गई है।

Image Source : apBangladesh Hindu

विफल रही यूनुस सरकार

हिंसा और क्रूरता के बीच अल्पसंख्यक नेताओं का कहना है कि नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार सुरक्षा देने में विफल रही है। देश भर में सुरक्षा उपायों का कोई संकेत नहीं मिला है, कमजोर समुदायों के लिए कोई आपातकालीन सुरक्षा योजना नहीं है। अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। काउंसिल ने बयान में कहा, "देश के अल्पसंख्यक डर और अनिश्चितता में जी रहे हैं, हमले अल्पसंख्यकों को डराने और उन्हें आने वाले चुनाव में स्वतंत्र रूप से वोट देने से रोकने के उद्देश्य से किए गए लगते हैं।

तारिक रहमान से मिला प्रतिनिधिमंडल

हमलों के बीच अल्पसंख्यक नेताओं के 8 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में BNP के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान से ढाका में मुलाकात की थी। प्रतिनिधिमंडल में हिंदू, बौद्ध, ईसाई और कल्याणकारी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे। उन्होंने रहमान को हिंसा और अल्पसंख्यक समुदायों में व्याप्त गहरी चिंता के बारे में विस्तार से बताया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, तारिक रहमान ने कानून-व्यवस्था बहाल करने की आवश्यकता पर जोर दिया और वादा किया कि धर्म या जातीयता की परवाह किए बिना नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए। 

कानून का हुआ पतन

मानवाधिकार पर्यवेक्षकों ने चेतावनी दी है कि मौजूदा स्थिति कानून के शासन के पतन को दर्शाती है। ढाका में एक वरिष्ठ सामुदायिक आयोजक ने कहा, "सरकार की चुप्पी और निष्क्रियता अपराधियों को बढ़ावा दे रही है। तत्काल हस्तक्षेप के बिना, यह हिंसा और बढ़ेगी।" बांग्लादेश एक अहम सियासी मोड़ पर खड़ा है, अल्पसंख्यकों पर चल रहा उत्पीड़न ना केवल मानवाधिकार संकट बन गया है, बल्कि अंतरिम सरकार की विश्वसनीयता की भी परीक्षा है।

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