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बांग्लादेश में चुनाव से पहले हसीना कैबिनेट में मंत्री रहे रमेश चंद्र सेन की जेल में रहस्यमय मौत, आंदोलन के दौरान हुए थे गिरफ्तार

बांग्लादेश के पूर्व मंत्री रमेश चंद्र सेन की जेल के अंदर रहस्यमय मौत होने से हड़कंप मच गया है। बांग्लादेश में चुनाव से ठीक पहले हुई मौत ने हर किसी को हैरान कर दिया है। वह शेख हसीना के प्रधानमंत्री पद से अपदस्थ किए जाने के बाद जेल गए थे।

रमेश चंद्र सेन, बांग्लादेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री (फाइल)- India TV Hindi Image Source : DHAKA TRIBUNE रमेश चंद्र सेन, बांग्लादेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री (फाइल)

दिनाजपुर (बांग्लादेश): बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की कैबिनेट में मंत्री रहे रमेश चंद्र सेन की शनिवार को जेल के अंदर ही रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई। वह बांग्लादेश अवामी लीग के पूर्व वरिष्ठ नेता और पूर्व जल संसाधन मंत्री मंत्री थे। शनिवार सुबह दिनाजपुर जिला जेल में उनकी मौत होने की घोषणा की गई।  वे 85 वर्ष के थे। जेल प्रशासन ने तबीयत बिगड़ने के बाद मौत होने की बात कही है। मगर पार्टी के लोग इस मौत को संदिग्ध मान कर चल रहे हैं। 

हसीना के खिलाफ आंदोलन के दौरान गिरफ्तार हुए थे रमेश चंद्र सेन

ढाका ट्रिब्यून ने जेल सूत्रों के अनुसार लिखा है कि सेन को पिछले साल 16 अगस्त को तब गिरफ्तार किया गया था, शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद से अपदस्थ किया जा चुका था। गिरफ्तारी के बाद में उनको दिनाजपुर जिला जेल में स्थानांतरित कर दिया गया। जहां उन्हें तीन मामलों में रखा गया था, जिसमें हत्या का मामला भी शामिल है। शनिवार सुबह अचानक बीमार पड़ने पर उन्हें दिनाजपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। दिनाजपुर जिला जेल के सुपरिंटेंडेंट फरहाद सरकार ने मौत की पुष्टि की और कहा कि आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद शव परिवार को सौंप दिया जाएगा।

5 बार चुने गए थे सांसद

रमेश चंद्र सेन का जन्म 30 अप्रैल 1940 को ठाकुरगांव जिले के सदर उपजिला के रुहिया यूनियन के काशलगांव गांव में हुआ था। उनके पिता क्षितिंद्र मोहन सेन और माता बालाश्वरी सेन थीं। उन्होंने रंगपुर के कार्माइकल कॉलेज से पढ़ाई की। वे पांच बार संसद सदस्य चुने गए। सबसे हालिया बार 2024 में बांग्लादेश अवामी लीग से नामांकन मिलने के बाद ठाकुरगांव-1 सीट से सांसद बने, हालांकि बाद में पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया। वे पार्टी के पूर्व प्रेसिडियम सदस्य भी रह चुके थे। 2024 में छात्र-जन विद्रोह के माध्यम से अवामी लीग सरकार के पतन के बाद राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने संसद भंग कर दी, जिससे सेन अपनी संसदीय सीट खो बैठे।

हसीना के थे भरोसेमंद

रमेश चंद्र सेन हसीना कैबिनेट में उनके भरोसेमंद साथी थे। सेन को 2024 में छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर हमले के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, और बाद में विस्फोटक अधिनियम सहित अन्य मामलों में जेल भेजा गया। उनकी मौत जेल हिरासत में हुई है, जो राजनीतिक अस्थिरता के दौर में पूर्व अवामी लीग नेताओं के खिलाफ चल रही कार्रवाइयों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।

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