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चीन ने 40 दिनों के लिए हवाई क्षेत्र पर लगाया प्रतिबंध, नहीं दिया कोई स्पष्टीकरण

चीन ने अपनी तटरेखा के पास 40 दिनों के लिए हवाई क्षेत्र को प्रतिबंधित करने की घोषणा की है। चीन ने ऐसा क्यों किया है इस बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है।

China PLA Jets- India TV Hindi
Image Source : AP China PLA Jets

China Imposes 40 Day Airspace Restrictions: चीन ने अपनी समुद्री तट के पास हवाई क्षेत्र को 40 दिनों के लिए बंद करने का ऐलान किया है। इस फैसले का कोई कारण या स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। अमेरिका के फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक, यह प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र शंघाई के उत्तर और दक्षिण दोनों तरफ के इलाकों को कवर करता है। यह क्षेत्र येलो सी से लेकर ईस्ट चाइना सी तक फैला हुआ है। यह बंदी 27 मार्च से शुरू होकर 6 मई तक चलेगी।

सैन्य अभ्यास की घोषणा नहीं

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य अभ्यास की घोषणा नहीं की है। इस प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र की कोई ऊपरी सीमा नहीं बताई गई है। इसे SFC-UNL नाम दिया गया है। यह जगह ताइवान से सैकड़ों मील दूर है। 

चीन ने नहीं दिया स्पष्टीकरण

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के SeaLight प्रोजेक्ट के डायरेक्टर रे पॉवेल ने कहा कि इस बात को खास बनाने वाली दो चीजें हैं। 40 दिनों की बहुत लंबी अवधि और कोई घोषित सैन्य अभ्यास ना होना। उन्होंने कहा कि यह किसी एक बार के अभ्यास का संकेत नहीं है, बल्कि लगातार सैन्य तैयारी वाली स्थिति का संकेत है। चीन ने इसकी कोई जरूरत नहीं समझी कि वह इसका स्पष्टीकरण दे।

क्या बोले ताइवान के सुरक्षा अधिकारी?

ताइवान के सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि चीन अपनी सैन्य उपस्थिति को क्षेत्र में बढ़ा रहा है। खासकर इस समय जब अमेरिका ईरान के साथ तनाव में व्यस्त है। ताइवान के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि ये बंद किए गए हवाई क्षेत्र "साफ तौर पर जापान को निशाना बनाते हैं।" यह अमेरिकी सेना को रोकने और उसकी ताकत कम करने की कोशिश लगती है। अमेरिका के नेवल वॉर कॉलेज के चाइना मैरिटाइम स्टडीज इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर क्रिस्टोफर शर्मन ने कहा कि इस बंद क्षेत्र में चीन हवाई युद्ध से जुड़े अभ्यास कर सकता है, जो भविष्य के किसी संघर्ष में काम आ सकते हैं। 

चीन ने क्या किया?

फरवरी से मार्च की शुरुआत तक चीन ने ताइवान के हवाई रक्षा क्षेत्र में अपने विमानों की रोजाना घुसपैठ रोक दी थी। उस समय ताइवान के एक अधिकारी ने कहा था कि चीन शायद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी नेता शी जिनपिंग की आने वाली बैठक से पहले शांति का झूठा संदेश देना चाहता था।

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