Iran-US Talks: इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका की बीच शांति वार्ता भले ही फेल हो गई हो, लेकिन इस बीच पाकिस्तान ने अपना काम सेट कर लिया है। पाकिस्तान की नजर इस पूरी वार्ता को लेकर अपनी छवि सुधारने के साथ और सहयोग धनराशि हासिल करने पर था। पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति खस्ताहाली के दौर से गुजर रही है, लिहाजा उसे इस बहाने अमेरिका समेत मिडिल-ईस्ट के अन्य देशों के सामने अपनी अच्छी छवि बनानी थी। ताकि उसे दया की भीख मिल सके। अब पाकिस्तान ने सऊदी अरब और कतर से 5 अरब डॉलर की बड़ी सहयोग राशि हासिल कर ली है।
पाकिस्तान का बन गया काम
ईरान-अमेरिका के बीच मध्यस्थ की भूमिका में खुद को पेश करके शहबाज शरीफ और असीम मुनीर ने अपना काम बना लिया है। पाकिस्तान संयुक्त अरब अमीरात से 3.5 अरब डॉलर का कर्ज पहले ही ले चुका है, लिहाजा अब उसे नये मुर्गे की तलाश दी, जिसे वह फांस सके। पैंतरेबाजी दिखाते हुए पाकिस्तान आखिरकार अपने मायाजाल में सऊदी अरब और कतर को फंसा ही लिया। इस दौरान पाकिस्तान नकदी की गंभीर तंगी से जूझ रहा है। ऐसे वक्त में सऊदी अरब और कतर से 5 अरब अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 42,500 करोड़ रुपये की यह मदद उसके लिए संजीवनी का काम करेगी। यह सहायता पाकिस्तान की कमजोर विदेशी मुद्रा स्थिति के लिए महत्वपूर्ण राहत साबित होगी। यह जानकारी रविवार को एक मीडिया रिपोर्ट में दी गई।
यूएई से पहले ही पाकिस्तान ले चुका है 3.5 अरब डॉलर
डॉन अखबार की रिपोर्ट के अनुसार यह अपेक्षित राशि ऐसे महत्वपूर्ण समय पर मिल रही है, जब इस्लामाबाद इस महीने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को 3.5 अरब डॉलर चुकाने की तैयारी कर रहा है और उसके विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ रहा है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान के कमजोर विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने के लिए सऊदी अरब और कतर 5 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता प्रदान करेंगे। यह घटनाक्रम वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब की वाशिंगटन यात्रा के साथ मेल खाता है। वे IMF-विश्व बैंक स्प्रिंग मीटिंग्स में भाग लेने और पाकिस्तान की आर्थिक कूटनीति को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका जा रहे हैं। औरंगजेब 13 से 18 अप्रैल तक चलने वाली इन बैठकों में शामिल होंगे, जहां वे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे।
पाकिस्तान ने ढूंढ़ा नया मददगार
अब तक पाकिस्तान के प्रमुख कर्जदाताओं में यूएई, चीन और सऊदी अरब रहे हैं। इसके अलावा अमेरिका भी पाकिस्तान का मददगार रहा है। नीति-निर्माताओं का मानना है कि यह वार्ता पाकिस्तान की व्यापक रणनीतिक संपर्क का हिस्सा थी, जिससे वह सहयोग राशि हासिल कर सके। इसमें सख्त शर्तें या तीसरे पक्ष (जैसे UAE) पर निर्भरता अब पहले जितना महत्वपूर्ण नहीं रह गई है। IMF ने पाकिस्तान के तीन प्रमुख द्विपक्षीय ऋणदाताओं सऊदी अरब, चीन और UAE से कहा है कि वे पाकिस्तान में अपनी नकदी जमा राशि तब तक बनाए रखें जब तक चालू तीन वर्षीय कार्यक्रम पूरा नहीं हो जाता। रिपोर्ट में कहा गया है कि UAE की जगह अब कतर ले सकता है।
इसी महीने पाकिस्तान को लौटाने हैं सऊदी अरब के 3.5 अरब डॉलर
पाकिस्तान को इसी महीने UAE का 3.5 अरब डॉलर का कर्ज चुकाना है। लिहाजा वह इसकी योजना बना रहा है। ऐसे वक्त में सऊदी अरब पाकिस्तान के लिए रियायती वित्तपोषण का प्रमुख स्रोत बना हुआ है। उसने अब तक 5 अरब डॉलर की जमा राशि को रोलओवर किया है। पाकिस्तान ने कहा है कि वह अप्रैल के अंत तक UAE को 3.5 अरब डॉलर चुकता कर देगा। यह देनदारी 2018 से रोलओवर की जा रही थी।
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