Israel US Iran War: क्या है ट्रंप की 15 सूत्री ईरान युद्ध विराम योजना, तेहरान की मांगों और शर्तों के है कितनी अनुरूप?
Israel US Iran War: ईरान युद्ध विराम को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का तेहरान को भेजा गया प्रस्ताव सामने आ गया है। हालांकि अमेरिका ने इतनी सख्त शर्तें इसमें रखी हैं, जिसे मानने के लिए ईरान कभी तैयार नहीं होगा।

Israel US Iran War: ईरान पर 5 दिनों तक हमला नहीं करने के ऐलान के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 15 सूत्री युद्ध विराम योजना का प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव की रूपरेखा से परिचित एक व्यक्ति ने मंगलवार देर रात यह जानकारी दी। इसी दौरान अमेरिकी सेना मध्य पूर्व में पहले से मौजूद लगभग 50,000 सैनिकों के अलावा कम से कम 1,000 अतिरिक्त सैनिक भेजने की तैयारी में है। दावा किया जा रहा है कि ट्रंप की इस योजना को पाकिस्तान के मध्यस्थों के माध्यम से ईरान को सौंपा गया है।
पाकिस्तान को ट्रंप ने बनाया मध्यस्थ
ईरान से वार्ता करने के लिए ट्रंप ने पाकिस्तान को मधस्थ बनाया है। वहीं पाकिस्तान ने वाशिंगटन और तेहरान के बीच नई वार्ता की मेजबानी की पेशकश भी की है। यह जानकारी उस व्यक्ति ने दी, जिसने गुमनामी की शर्त पर बात की, क्योंकि उसे सार्वजनिक रूप से बोलने की अनुमति नहीं थी। न्यूयॉर्क टाइम्स ने सबसे पहले रिपोर्ट किया कि यह योजना ईरानी अधिकारियों को सौंपी जा चुकी है। पेंटागन दो मरीन यूनिटों को भी तैनात करने की प्रक्रिया में है, जिससे क्षेत्र में लगभग 5,000 मरीन और हजारों नाविकों की संख्या बढ़ जाएगी। इस व्यक्ति ने बताया कि इन कदमों को ट्रंप द्वारा खुद को “अधिकतम लचीलापन” देने के रूप में देखा जा रहा है, ताकि आगे वे जो भी फैसला करें, उसके लिए तैयार रहें।
क्या है ट्रंप की ईरान युद्ध विराम की योजना का प्रस्ताव
Channel 12 के हवाले से ट्रंप की ओर से दिए गए 15 सूत्री प्रस्ताव इस प्रकार हैं-
- ईरान को अपने वर्तमान परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह विघटित करना होगा।
- ईरान को कभी भी परमाणु हथियार विकसित न करने की प्रतिबद्धता देनी होगी।
- ईरानी क्षेत्र के अंदर किसी भी प्रकार का यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
- 60 प्रतिशत संवर्धित लगभग 450 किलोग्राम यूरेनियम का स्टॉक अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को सौंपना होगा।
- नतांज, इस्फहान और फोर्डो स्थित परमाणु सुविधाओं को पूरी तरह नष्ट करना होगा।
- IAEA को पूरे ईरान में पूर्ण पहुंच और पूर्ण पारदर्शिता प्रदान करनी होगी।
- ईरान को अपने क्षेत्रीय प्रॉक्सी ऑपरेशनों को समाप्त करना होगा।
- सहयोगी मिलिशिया समूहों को समर्थन बंद करना होगा।
- हार्मुज जलडमरूमध्य को वैश्विक नौवहन के लिए हमेशा खुला रखना होगा।
- ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को रेंज (दूरी) और मात्रा दोनों में सीमित करना होगा।
- भविष्य में किसी भी मिसाइल का उपयोग सख्ती से केवल आत्मरक्षा तक ही सीमित रहेगा।
अमेरिका से वार्ता के लिए जानें ईरान की शर्तें?
- आंशिक नहीं, पूर्ण युद्धविराम हो, जिसमें अमेरिका और इजरायल दोनों शामिल हों।
- ईरान के संप्रभु अधिकारों, विशेष रूप से शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह मान्यता दी जाए।
- ईरान किसी भी सूरत में अपना यूरेनियम संवर्धन अधिकार छोड़ने को तैयार नहीं है।
- युद्ध में ईरान को हुए सभी तरह के बुनियादी नुकसान का मुआवजा (क्षतिपूर्ति) दी जाए।
- भविष्य में ईरान पर आक्रमण नहीं करने की मजबूत अंतरराष्ट्रीय गारंटी मिले।
- हार्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने पर ईरान अपनी शर्तें तय करेगा। कोई भी विदेशी ताकत (खासकर अमेरिका) इसके इस्तेमाल पर दबाव नहीं डाल सकेगी।
- क्षेत्रीय प्रॉक्सी और मिसाइल कार्यक्रम पर कोई समझौता नहीं
- खाड़ी क्षेत्र में सभी अमेरिकी सैन्य अड्डों को बंद करना
ट्रंप की युद्ध विराम योजना से इजरायल हैरान
ट्रंप की ईरान युद्ध विराम योजना से इजरायल हैरान है। वजह ये है कि इजरायल लगातार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान के खिलाफ युद्ध जारी रखने की वकालत कर रहा था। इसी दौरान ट्रंप ने ईरान युद्ध विराम योजना पेश कर दी है। इससे पहले ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका युद्ध समाप्त करने के लिए ईरान से बातचीत कर रहा है। इसी दौरान कूटनीतिक प्रयास तेज हुए और ईरान ने नया डीफिएंट बयान जारी किया। हालांकि इस बीच ईरान पर हवाई हमले जारी रहे। जवाब में ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों ने भी इजरायल और पूरे क्षेत्र के विभिन्न ठिकानों को निशाना बनाया।
अमेरिका से कोई वार्ता नहीं चाहता ईरान
ट्रंप ने यह युद्ध विराम योजना ऐसे वक्त में पेश की है, जब ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी वार्ता से इनकार किया है। वहीं ट्रंप ने लचीला रुख अपनाते हुए ईरान द्वारा हार्मुज जलडमरूमध्य फिर से खोलने के लिए अपने स्वयं के समय-सीमा को टाल दिया है। बता दें कि तेहरान द्वारा इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर अपनी पकड़ बनाए रखने से अंतरराष्ट्रीय नौवहन बाधित हो गया है, ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था को खतरा पैदा हो गया है।
वार्ता के सामने क्या हैं बड़ी चुनौतियां?
अमेरिका और ईरान के बीच कोई भी बातचीत बहुत बड़ी चुनौतियों का सामना करेगी। खासकर ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों पर वाशिंगटन के बदलते उद्देश्यों को हासिल करना बेहद मुश्किल है। ट्रंप के प्रस्ताव में ऐसी कोई शर्त नहीं है, जिसे ईरान आसानी से मानने के लिए तैयार हो सके। यह भी स्पष्ट नहीं है कि ईरानी सरकार में कौन सा व्यक्ति वार्ता करने का अधिकार रखता है या ऐसा करने को तैयार होगा, क्योंकि इजरायल ने ईरानी नेताओं को मारते रहने की कसम खाई है। ईरान अभी भी अमेरिका पर अत्यधिक संदेह करता है। ट्रंप प्रशासन के दौरान दो बार, उच्च-स्तरीय कूटनीतिक बातचीत के दौरान भी अमेरिका ने ईरान पर हमला किया है, जिसमें 28 फरवरी के हमले शामिल हैं, जिसने वर्तमान युद्ध की शुरुआत की।
ईरान के खार्ग द्वी पर कब्जे की आशंका
अमेरिका के मरीन यूनिटों की मध्य-पूर्व में तैनाती से अटकलें लग रही हैं कि वाशिंगटन ईरान के खार्ग द्वीप पर कब्जा करने की कोशिश कर सकता है, जो तेहरान के तेल नेटवर्क के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अमेरिका ने एक हफ्ते से ज्यादा पहले इस फारस की खाड़ी वाले द्वीप पर बमबारी की थी, जिसमें उसके बचाव तंत्र को नुकसान पहुंचाया गया, लेकिन तेल बुनियादी ढांचे को तब छोड़ दिया गया था। इधर ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका सैनिक उतारने की कगार पर दिखाई दिया तो वह खाड़ी में माइन्स बिछा देगा। ट्रंप ने कहा था कि वे ईरान के पावर स्टेशनों पर बमबारी की धमकी को तब तक टालेंगे जब तक बातचीत चल रही है।
वार्ता पर अमेरिका और ईरान का विरोधी बयान
युद्ध विराम वार्ता पर संशय इसलिए भी गहरा गया है कि अमेरिका और ईरान ने वार्ता की स्थिति पर परस्पर विरोधी बयान जारी किए हैं। मंगलवार को व्हाइट हाउस में बोलते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका “अभी फिलहाल वार्ता कर रहा है” और इसमें विटकोफ, कुश्नर, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और उपराष्ट्रपति जेडी वैंस शामिल हैं। ट्रंप ने कहा, “हमारे कई लोग इसे कर रहे हैं। और दूसरी तरफ, मैं आपको बता सकता हूँ कि वे डील करना चाहते हैं।” वहीं ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के कार्यालय ने कहा कि उन्होंने इस हफ्ते कई समकक्षों के साथ युद्ध पर चर्चा की है, लेकिन ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाग़ेर क़ालिबाफ़ ने ट्रंप के सीधी बातचीत के दावे से इनकार किया और ईरानी सैन्य प्रवक्ता ने कहा कि लड़ाई जारी रहेगी।
ईरान का दावा पूर्ण विजय तक जारी रहेगी जंग
ईरानी राज्य टेलीविजन ने मेजर जनरल अली अब्दोल्लाही अलीआबादी के हवाले से कहा, “ईरान की शक्तिशाली सशस्त्र सेनाएँ ईरान की अखंडता की रक्षा करते हुए गर्व, विजयी और अडिग हैं और पूर्ण विजय तक यह रास्ता जारी रहेगा।” मिस्र के एक अधिकारी ने कहा कि प्रयास “अमेरिका और ईरान के बीच विश्वास निर्माण” पर केंद्रित हैं, जिसका लक्ष्य लड़ाई में विराम लाना है। इजरायल इसमें शामिल नहीं है। उस अधिकारी ने कहा कि प्राथमिकता क्षेत्रीय ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों को रोकना है और वे ईरान द्वारा हार्मुज जलडमरूमध्य फिर से खोलने के लिए एक “तंत्र” पर काम कर रहे हैं। वार्ता की खबर से तेल की कीमतें थोड़ी देर के लिए गिर गईं और शेयर बाजार ऊपर चढ़ गए। लेकिन यह राहत अल्पकालिक रही।