अमेरिका और ईरान के बीच छिड़े युद्ध के बीच इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए गुप्त वार्ता चल रही है, और इसी बीच इस युद्ध में एक अप्रत्याशित बात हुई है, जानकारी मिली है कि पाकिस्तान भी अब इस युद्ध के मैदान में उतर आया है। दरअसल, अफगानिस्तान में तालिबान के साथ संघर्ष में उलझा पाकिस्तान खुद को खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध में प्रमुख मध्यस्थ के रूप में स्थापित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है और उसने वार्ता के लिए इस्लामाबाद को स्थल के रूप में भी प्रस्तावित किया है। एपी की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा है कि उनका देश ईरान युद्ध को समाप्त करने के लिए 'सार्थक और निर्णायक वार्ता को सुगम बनाने' के लिए तैयार है।
अब पाकिस्तान कराएगा ईरान और अमेरिका की सुलह
खबरों की बात करें तो ईरान के खिलाफ जारी इस युद्ध में पाकिस्तान मध्यस्थ बनने के पीछे उसका कोई स्वार्थ नजर नहीं आ रहा है, बल्कि इस जल्दबाजी के पीछे उसकी रणनीतिक मजबूरियां और उसके अपने स्वार्थ हो सकते हैं। हो सकता है कि वैश्विक स्तर पर अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए पाकिस्तान का यह एक हताश प्रयास हो। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा सोमवार को वाशिंगटन और तेहरान के बीच चल रही वार्ता की घोषणा के बाद, पाकिस्तान उन देशों में से एक है जो ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच राजनयिक वार्ता के लिए दबाव डाल रहा है।
सऊदी अरबिया का दावा-मिल गई खामेनेई की मंजूरी
अमेरिका ने एक दिन पहले ही ईरानी ऊर्जा ठिकानों पर हमलों को पांच दिनों के लिए टाल दिया था। अब ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने भी अमेरिका के साथ बातचीत को मंजूरी दे दी है। लेकिन यह मंजूरी गुपचुप तरीके से दी गई है। ऐसा सऊदी अरब की मीडिया ने दावा किया और कहा है कि ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने गुप्त रूप से अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ को सूचित किया कि ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका के साथ बातचीत को मंजूरी दे दी है।
Latest World News