भारत के पड़ोसी देश म्यांमार में फिर आया भूकंप, एक के बाद एक लग रहे झटकों से दहशत में लोग
India Neighbour Country Earthquake | भारत के इस पड़ोसी देश में पिछले एक हफ्ते से लगातार भूकंप आ रहे हैं, जिससे लोगों में दहशत है। भूकंप के ये झटके 3.9 से 5.3 तीव्रता तक के लगे हैं इसलिए लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें देखने को मिल रही हैं।

Myanmar Earthquake: भारत के पड़ोसी देश म्यांमार में हाल के दिनों में भूकंपों की झड़ी लग गई है। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र यानी कि NCS के मुताबिक, शनिवार को म्यांमार में एक बार फिर 3.9 की तीव्रता का भूकंप आया। बताया जा रहा है कि यह भूकंप 85 किलोमीटर की गहराई पर आया था। NCS ने X पर पोस्ट करके बताया, 'म्यांमार में 7 फरवरी 2026 को भारतीय समयानुसार 03:01:45 बजे 3.9 तीव्रता का भूकंप आया। यह भूकंप 24.76 एन अक्षांश और 94.74 ई देशांतर पर आया था और इसकी गहराई 85 किमी थी।' बता दें कि म्यांमार में एक के बाद एक लगातार भूकंप आ रहे हैं जिससे जनता में दहशत फैल गई है।
पिछले एक हफ्ते में आए हैं कई भूकंप
म्यांमार में शुक्रवार को भी 4.9 तीव्रता का भूकंप आया था। यह भूकंप 96 किलोमीटर की गहराई पर आया था। इससे पहले 2 फरवरी को एक और भूकंप आया था, जिसकी तीव्रता 4.5 थी। यह भूकंप 115 किलोमीटर की गहराई पर आया। वहीं, 3 फरवरी को म्यांमार में 5.3 तीव्रता का भूकंप आया, जो सिर्फ 20 किलोमीटर की गहराई पर था। इस वजह से बाद में अभी भी छोटे-छोटे झटके आने की आशंका बनी हुई है। लगातार आ रहे ये भूकंप म्यांमार के लोगों में काफी दहशत पैदा कर रहे हैं। लोग रातों को सो नहीं पा रहे और हर छोटे झटके से डर जाते हैं।
म्यांमार के कई शहरों में तबाही का खतरा
म्यांमार के कई शहरों में जैसे सागिंग, मांडले, बागो और यंगून में रहने वाले लोग खासतौर पर चिंतित हैं, क्योंकि ये इलाके भूकंप के खतरे वाले जोन में हैं। म्यांमार की आबादी का 46 प्रतिशत हिस्सा इन इलाकों में रहता है। यहां तक कि यंगून, जो फॉल्ट लाइन से थोड़ी दूरी पर स्थित है, वहां घनी आबादी की वजह से खतरा ज्यादा है। बता दें कि 1903 में बागो में 7 की तीव्रता का भूकंप आया था, जिसका असर यंगून तक पहुंचा था। बताया जा रहा है कि बार-बार आ रहे भूकंप की वजह से कई परिवारों ने विकल्पों की तरफ देखना शुरू कर दिया है।
4 टेक्टॉनिक प्लेट्स के बीच फंसा है म्यांमार
खास बात यह है कि कम गहराई पर आने वाले भूकंप ज्यादा गहराई में आने वाले भूकंपों से ज्यादा खतरनाक होते हैं। दरअसल, उथले भूकंपों की लहरें सतह तक कम दूरी तय करती हैं, जिससे जमीन ज्यादा हिलती है और जान-माल का खतरा बढ़ जाता है। म्यांमार की लंबी तटीय रेखा की वजह से भूकंप के साथ-साथ सूनामी का भी खतरा है। यह 4 टेक्टॉनिक प्लेट्स भारतीय, यूरेशियन, सुंडा और बर्मा प्लेट्स के बीच फंसा हुआ है, जहां भूगर्भीय गतिविधियां लगातार चलती रहती हैं। म्यांमार से होकर 1400 किलोमीटर लंबी ट्रांसफॉर्म फॉल्ट गुजरती है, जो अंडमान स्प्रेडिंग सेंटर को उत्तर में सागिंग फॉल्ट से जोड़ती है। सागिंग फॉल्ट की वजह से कई शहरों में भूकंप का खतरा बढ़ जाता है।
भूकंप आने की स्थिति में क्या करें?
- ड्रॉप, कवर और होल्ड ऑन: झटका महसूस होते ही जमीन पर लेट जाएं, मजबूत टेबल या डेस्क के नीचे छिपें और सिर को हाथों से ढकें। झटका रुकने तक वैसे ही रहें।
- खिड़कियों और भारी सामान से दूर रहें: कांच या गिरने वाली चीजों से बचें जिससे आपको चोट लगने का खतरा कम हो जाए।
- बाहर न भागें: इमारत से बाहर भागने की कोशिश न करें, क्योंकि बाहर गिरने का खतरा होता है।
- बिजली और गैस बंद करें: अगर संभव हो, तो भूकंप के बाद गैस और बिजली बंद कर दें ताकि आग न लगे।
- सुनामी की चेतावनी पर ध्यान दें: तटीय इलाकों में सुनामी की आशंका हो तो ऊंची जगह पर जाएं।
- आपातकालीन किट तैयार रखें: पानी, दवाइयां, टॉर्च और जरूरी सामान हमेशा तैयार रखें।
भारत में भी महसूस हुए हैं भूकंप के झटके
एक्सपर्ट्स का मानना है कि म्यांमार जैसे इलाकों में भूकंपों की तैयारी बहुत जरूरी है। सरकार और स्थानीय प्रशासन को लोगों को जागरूक बनाने और मजबूत इमारतें बनाने पर जोर देना चाहिए। म्यांमार में पिछले कुछ दिनों से लगातार आ रहे भूकंपों ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। म्यांमार में आए कुछ भूकंपों को भारत के पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के इलाकों में भी महसूस किया गया है।